Trump Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को घोषणा की कि वे प्रस्तावित वैश्विक आयात शुल्क (टैरिफ) को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर देंगे। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह फैसला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के अमेरिका विरोधी फैसले की विस्तृत समीक्षा के बाद लिया गया है।
बता दें कि एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि राष्ट्रपति ट्रंप के पास आपातकालीन शक्तियों के तहत व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। इसके बावजूद ट्रंप ने शुक्रवार रात एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दुनिया भर से आने वाले आयात पर 10 प्रतिशत शुल्क लागू करने की व्यवस्था कर दी। हालांकि यह शुल्क अधिकतम 150 दिनों के लिए ही लागू रह सकता है, जब तक कि कांग्रेस इसे कानून के जरिए आगे न बढ़ाए।
भारत पर क्या असर होगा?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के नए कदम से अनिश्चितता बढ़ गई है। पिछले वर्ष भारत पर अमेरिका ने 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में रूस से तेल आयात के मुद्दे पर 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया था। वॉशिंगटन का आरोप था कि इससे यूक्रेन युद्ध को बल मिला।
वहीं फरवरी 2026 में दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे पर सहमति के बाद भारत पर यह शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उम्मीद थी कि टैरिफ घटकर लगभग 3.5 प्रतिशत पर आ सकता है।
अब यदि 15 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लागू होता है, तो भारत पर प्रभावी दर लगभग 18.5 प्रतिशत होगी—यानी हाल ही में तय 18 प्रतिशत से मामूली बढ़ोतरी।
सुप्रीम कोर्ट बनाम ट्रंप
बता दें कि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने 6–3 के बहुमत से फैसला देते हुए कहा कि 1977 का अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां कानून (IEEPA) राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें उन न्यायाधीशों पर शर्म है जिन्होंने उनके खिलाफ निर्णय दिया। उन्होंने असहमति जताने वाले तीन जजों—ब्रेट कैवनॉ, क्लेरेंस थॉमस और सैमुअल एलिटो—की खुलकर प्रशंसा की और उन्हें “मेक अमेरिका ग्रेट अगेन” का समर्थक बताया।
व्हाइट हाउस के अधिकारियों के अनुसार, जिन देशों के साथ अमेरिका के व्यापार समझौते हैं—जिनमें भारत भी शामिल है—उन्हें अस्थायी रूप से 10 प्रतिशत शुल्क का लाभ मिलेगा, जिसके बाद नई दरें लागू की जाएंगी।


