मिडिल ईस्ट में ईरान-इजराइल जंग के बीच अमेरिका के बाजार में आज मंगलावर (3 मार्च) को बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। डाउ जोन्स 2.5% (1200 अंक) की गिरवाट के साथ 47,750 अंक के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं अमेरिका का टेक बेस्ड इंडेक्स नैस्डैक कंपोजिट1.95% यानी 485 अंक गिरकर 22,300 के स्तर पर और SP 500 इंडेक्स 2.02% यानी 138 अंक गिरकर 6,750 के स्तर पर है। अमेरिकी बाजार में गिरावट के 5 प्रमुख कारण 1. ईरान का पलटवार और युद्ध का विस्तार इजराइल-अमेरिका के ईरान पर किए गए हमलों के बाद उसकी जवाबी कार्रवाई ने निवेशकों को डरा दिया है। सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमले और मिडिल ईस्ट के अन्य हिस्सों में बढ़ती हिंसा से यह डर बैठ गया है कि यह जंग अब लंबी खिंचेगी। बाजार को अंदेशा है कि यह केवल दो देशों तक सीमित न रहकर पूरे क्षेत्र में फैल सकती है। 2. कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बंद करने का ऐलान किया है। जहां से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। इस तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें आज 5% से ज्यादा उछलकर 80.14 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। तेल महंगा होने का सीधा मतलब है कंपनियों की लागत बढ़ना और मुनाफा घटना। 3. महंगाई और ब्याज दरों का डर तेल और गैस की कीमतों में अचानक आई इस तेजी ने महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा कर दिया है। निवेशकों को डर है कि अगर महंगाई बढ़ी, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करने के बजाय उन्हें और बढ़ा सकता है या लंबे समय तक स्थिर रख सकता है। ऊंची ब्याज दरें शेयर बाजार के लिए हमेशा निगेटिव संकेत होती हैं। 4. एयरलाइंस और टेक शेयरों में भारी बिकवाली एयरलाइंस: तेल की कीमतें बढ़ने से फ्यूल कॉस्ट बढ़ गई है, जिससे डेल्टा, यूनाइटेड और अमेरिकन एयरलाइंस के शेयर 3-6% तक टूट गए हैं। टेक स्टॉक्स: नैस्डैक में गिरावट की बड़ी वजह ऊंची वैल्यूएशन वाले टेक शेयर हैं। अनिश्चितता के माहौल में निवेशक जोखिम वाले टेक शेयरों से पैसा निकालकर सोना-चांदी जैसे सुरक्षित जगहों में लगा रहे हैं। 5. सप्लाई चेन बाधित होने की आशंका मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण न केवल तेल बल्कि ग्लोबल ट्रेड रूट भी प्रभावित हो रहे हैं। अमेजन जैसी बड़ी कंपनियों ने बताया है कि उनके डेटा सेंटर्स और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर भी प्रभाव पड़ रहा है। सप्लाई चेन रुकने से ग्लोबल ट्रेड की रफ्तार धीमी होने का डर बाजार को नीचे खींच रहा है। ईरान ने स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान किया दरअसल, ईरान ने स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान कर दिया है। साथ ही ईरान की सेना ने चेतावनी दी है कि इस रूट से अगर कोई भी जहाज गुजरता है, तो उसे आग लगा दी जाएगी। ओमान और ईरान के बीच स्थित यह रूट दुनिया के ऑयल बिजनेस के लिए सबसे जरूरी माना जाता है। होर्मुज रूट के बंद होने से दुनिया के कई देशों की तेल सप्लाई पर प्रभाव पड़ेगा, जिसमें भारत समेत एशियाई देशों पर सबसे ज्यादा असर होगा। इस रूट के बंद होने कारण ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें भी 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। जिसका असर ग्लोबल मार्केट्स पर देखने को मिल सकती है। कच्चे तेल की कीमत दो दिन में 15% चढ़ी अभी ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 5% बढ़कर 80.14 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। कल इसमें 10% की तेजी आई थी। यानी, दो दिन में ये 15% से ज्यादा चढ़ चुका है। जानकारों का मानना है कि अगर यह तनाव और बढ़ा, तो तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। इसका असर ग्लोबल मार्केट पर आगे भी देखने को मिल सकता है। एशियाई शेयर बाजारों में आज मिला जुला कारोबार रहा कल सेंसेक्स 1048 अंक गिरकर बंद हुआ अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते भारतीय शेयर बाजार में कल यानी 2 मार्च को गिरावट रही थी। सेंसेक्स 1048 अंक (1.29%) गिरावट के साथ 80,239 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी में भी करीब 313 अंकों (1.24%) की गिरावट रही, ये 24,866 के स्तर पर बंद हुआ था। ये खबर भी पढ़ें… भारत के पास सिर्फ 25 दिन का तेल बचा: इजराइल-ईरान जंग के बीच इम्पोर्ट रूट बंद; सरकार नए सप्लायर्स तलाश रही पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-इजराइल युद्ध के बीच भारत के पास अब सिर्फ 25 दिनों का क्रूड ऑयल यानी कच्चा तेल और रिफाइंड ऑयल का स्टॉक बचा है। न्यूज एजेंसी ANI ने देश की एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर यह अपडेट सरकारी सूत्रों के मुताबिक दिया है। हालांकि सरकार अभी पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाएगी। पूरी खबर पढ़ें…
ईरान-इजराइल जंग के बीच अमेरिकी बाजार 1200 अंक गिरा:डाउ जोन्स 47,788 अंक के स्तर पर आया; नैस्डैक 1.95% और SP 500 इंडेक्स 2.02% टूटा


