US-Israel vs Iran: क्या ईरानी सत्तावर्ग में पड़ी फूट? राष्ट्रपति पेजेशकियन ने खाड़ी देशों से मांगी थी माफी

US-Israel vs Iran: क्या ईरानी सत्तावर्ग में पड़ी फूट? राष्ट्रपति पेजेशकियन ने खाड़ी देशों से मांगी थी माफी

US-Israel-Iran: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने अब तेहरान के भीतर एक बड़े राजनीतिक संकट का रूप ले लिया है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन द्वारा उन पड़ोसी देशों से माफी मांगने की पहल, जो ईरानी हमलों की जद में आए थे, उनके लिए आंतरिक मोर्चे पर भारी पड़ गई है। पेजेशकियन ने न केवल खेद जताया था बल्कि भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने का आश्वासन भी दिया था, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की कमजोरी बताते हुए इसे ‘बिना शर्त आत्मसमर्पण’ की दिशा में बढ़ा कदम करार दिया है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति के इस नरम रुख ने ईरान के शक्तिशाली और कट्टरपंथी सत्ताधारी वर्ग के बीच असंतोष की लहर पैदा कर दी है। विशेष रूप से ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) के शीर्ष कमांडरों ने इस माफीनामे पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। सैन्य नेतृत्व के इस कड़े विरोध के कारण ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय को आनन-फानन में सफाई देनी पड़ी है। उनकी तरफ से यह स्पष्ट किया गया है कि ईरान की सेना क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर होने वाले किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

ईरान में सत्ताधारी वर्ग में आंतरिक कलह का असर सोशल मीडिया पर भी साफ दिख रहा है। प्रमुख धार्मिक नेता हामिद रसाई ने राष्ट्रपति के बयान का कड़ा विरोध किया और कहा, “आपका रुख अनप्रोफेशनल, कमजोर और नामंजूर।”

वहीं, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारिजानी ने सख्त लहजा अपनाते हुए साफ कर दिया है कि जब तक दुश्मन क्षेत्रीय ठिकानों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ करेगा, तब तक जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी। विरोधाभासी स्थिति यह है कि एक ओर राष्ट्रपति शांति का भरोसा दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

ईरानी राष्ट्रपति क्या कहा था?

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा था वे व्यक्तिगत रूप से उन पड़ोसी देशों से माफी मांगते हैं, जो उनके देश की तरफ से किए गए हमलों से प्रभावित हुए हैं। इसके साथ ही उन्होंने खाड़ी देशों से अपील की कि थी कि वे अमेरिका और इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में शामिल नहीं हों।

उन्होंने यह भी कहा था कि जब तक किसी पड़ोसी देश की जमीन से ईरान पर हमला नहीं किया जाता, तब तक उनकी तरफ से उन देशों को निशाना नहीं बनाया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि क्षेत्रीय विवादों का समाधान कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए।

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