US-Israel-Iran: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई जरूरी थी, ताकि वह परमाणु हथियार हासिल न कर सके। उन्होंने इस खतरे की तुलना एक ‘कैंसर’ से की, जिसे तुरंत निकालना आवश्यक था।
एनआरसीसी के फंडरेजिंग डिनर के दौरान उन्होंने कहा, ‘जब मैंने वह काम करने का फैसला किया जो पिछले 47 वर्षों में किसी अन्य राष्ट्रपति ने नहीं किया, और आपने सुना होगा कि कई लोग कहते थे कि काश उन्होंने ऐसा किया होता, लेकिन उनमें ऐसा करने का साहस नहीं था। हमारे पास कोई विकल्प नहीं था, लेकिन मुझे लगा कि स्थिति और भी गंभीर हो जाएगी।’
उन्होंने आगे कहा, ‘अल्पकालिक रूप से, हमें जो करना था, वह था इस कैंसर से छुटकारा पाना। हमें इस कैंसर को जड़ से उखाड़ फेंकना था। यह कैंसर परमाणु हथियार से लैस ईरान था। हमने इसे जड़ से उखाड़ फेंका है और अब इसे पूरी तरह खत्म करने जा रहे हैं।’
महत्वपूर्ण चीज पर दागी थी 100 मिसाइलें
डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी रक्षा प्रणाली ने ईरान के एक बड़े पैमाने पर किए गए मिसाइल हमले को विफल कर दिया। उन्होंने कहा, ‘आपको पता है कि हम पर हमला हुआ था। ईरान ने हमारी एक बहुत ही महत्वपूर्ण वस्तु पर 100 मिसाइलें दागी थीं। कुछ कारणों से मैं यह नहीं बताऊंगा कि वह क्या थी।’
उन्होंने कहा, ‘100 मिसाइलें 2,000 मील प्रति घंटे की रफ्तार से उस महत्वपूर्ण वस्तु की ओर बढ़ रही थीं। वह वस्तु बहुत ही शक्तिशाली और महत्वपूर्ण थी। हम पर दागी गई उन 100 मिसाइलों में से सभी को तुरंत मार गिराया गया। उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया गया और वे समुद्र में गिर गईं। कोई भी मिसाइल अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंची। इस सफल बचाव का श्रेय ‘पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम’ को दिया गया।’
ईरान का बयान: कोई बातचीत नहीं हुई
उधर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बातचीत के दावे पर ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि फिलहाल हम हमले का जवाब देते रहेंगे। अमेरिका से कोई बातचीत नहीं हुई है। बिना विश्वसनीय गारंटी या बिना बातचीत के संघर्ष विराम की संभावनाओं को ईरान ने पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने बाहरी आश्वासनों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाया।


