Us-Israel Iran War: ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल की जंग कब खत्म होगी, इसका कोई पुख्ता अनुमान लगाना अभी मुमकिन नहीं है। भले ही अमरीकी राष्ट्रपति कह रहे हों कि युद्ध लगभग पूरा हो गया है। इस बीच अपुष्ट खबरें आ रही हैं कि युद्ध के शुरुआती छह दिनों में ही अमेरिका के 11.3 अरब डॉलर स्वाहा हो गए हैं। और यह पूरा खर्च नहीं है। इस हिसाब से देखा जाए तो अमेरिका का रोज का खर्च दो अरब डॉलर से भी ज्यादा का है।
युद्ध में दर्जन भर देशों के करीब 2100 लोग मारे जा चुके हैं और हजारों घायल हुए हैं। असर की बात करें तो दुनिया की करीब आधी आबादी इस लड़ाई की आग से किसी न किसी रूप में झुलस रही है। तेल की बढ़ रही कीमत के असर से तो कोई नहीं बच पाएगा।
जानकार चेतावनी दे रहे हैं कि अगर आने वाले हफ्तों में तेल के दाम चढ़ते ही रहे दुनिया के कई देशों को मंदी, महंगाई और बेरोजगारी की मार एक साथ झेलनी पड़ेगी। चीन को भी इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा। मध्य-पूर्व देशों में चीनी सामान के ग्राहक बड़े संख्या में हैं। वहां उसके सामान की बिक्री कम हुई तो इसका सीधा असर चीन के विकास दर पर पड़ेगा।
भारत में 12 मार्च को सरकार ने जो आंकड़ा जारी किया उसके मुताबिक फरवरी में खुदरा महंगाई दर 3.21 फीसदी पर पहुंच गई, जो जनवरी में 2.74 प्रतिशत थी। यह तब है, जब फरवरी में युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा नहीं हुआ था।
जानकार मानते हैं कि ईरान से अमरीका-इजरायल के युद्ध का रूस को दोहरा फायदा हो सकता है। एक तो, तेल से कमाई के रूप में। हाल के दिनों में भारत का ही रूस से तेल आयात 50 फीसदी बढ़ गया है। उसकी तेल से कमाई बढ़ेगी तो उसे यूक्रेन के खिलाफ लड़ाई में भी मदद मिलेगी। दूसरा, अमेरिका को अगर ईरान से युद्ध में ज्यादा मिसाइलें लगानी पड़ीं तो यूक्रेन का अमरीकी रक्षा कवच कमजोर पड़ सकता है। रूस इसका भी फायदा उठा सकता है।
वैसे, अमेरिका के लिए भी यह लड़ाई गले की फांस बनी हुई है। अमरीकी जनता पहले से महंगाई से परेशान है। इस युद्ध के लिए ट्रम्प को जनता और नेताओं का वैसा समर्थन भी हासिल नहीं है। हालांकि, ट्रम्प बेपरवाह दिखते हैं और कहते हैं कि तेल से जुड़ी समस्या कुछ ही दिनों की बात है।
ट्रम्प के अफसरों ने भी मामले को हल्के में लिया था। अमरीकी अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने लिखा है कि ईरान पर हमला करने से पहले तेल की सप्लाई बाधित कर ‘आर्थिक युद्ध’ छेड़ने ई ईरान की ताकत को ट्रम्प प्रशासन ने कम करके आंका। ईरान दुनिया को सप्लाई होने वाले 20 फीसदी तेल का रास्ता (स्ट्रेट ऑफ होरमुज) रोक सकता है और वह ऐसा कर रहा है। साथ ही, तेल टैंकरों पर हमले भी कर रहा है।
उधर, यूरोपीय देशों को शरणार्थी संकट पैदा होने की चिंता सता रही है। उन्हें डर है कि ईरान-तुर्की सीमा से शरणार्थियों की बाढ़ उनके यहां न आ जाए।


