Middle East Conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीखी और आपत्तिजनक टिप्पणी ने मिडिल ईस्ट में तनाव को और बढ़ा दिया है। अब इसको लेकर ईरान की तरफ से कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के बाद ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गालिबफ ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका के गैर-जिम्मेदाराना कदम पूरे क्षेत्र को बड़े संघर्ष की ओर धकेल रहे हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ऐसी नीतियां आम लोगों के लिए ‘जीता-जागता नर्क’ साबित हो सकती हैं।
गालिबफ ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका, बेंजामिन नेतन्याहू के दबाव में काम कर रहा है। उनका कहना है कि इसी वजह से हालात और बिगड़ रहे हैं और क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ रही है। ईरानी नेतृत्व ने साफ किया कि युद्ध किसी भी पक्ष के लिए फायदेमंद नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका को सैन्य कार्रवाई से कोई लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि इससे क्षेत्रीय और वैश्विक संकट और गहरा सकता है।
ट्रंप ने क्या कहा था?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया ट्रुथ आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए ईरान को सख्त चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर तय समय सीमा तक कोई समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ट्रंप ने खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि 6 अप्रैल तक ईरान ने इस दिशा में कदम नहीं उठाया, तो उसके बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया जा सकता है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि मंगलवार पावर प्लांट और ब्रिज डे होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा हमला पहले कभी नहीं देखा गया होगा। इसके अलावा उन्होंने मंगलवार रात 8 बजे (ईस्टर्न टाइम) का समय भी बताया, जिससे स्थिति और गंभीर लगने लगी।
ट्रंप को समझौते की उम्मीद
वहीं ट्रंप ने एक्सियोस के साथ एक इंटरव्यू में यह भी कहा कि अमेरिका वर्तमान में इस्लामिक गणराज्य के साथ गहन वार्ता में लगा हुआ है। इसकी अच्छी संभावना है, लेकिन अगर वे कोई समझौता नहीं करते हैं, तो मैं वहां सब कुछ उड़ा दूंगा। उन्होंने आगे कहा कि बातचीत जारी है और सुझाव दिया कि समय सीमा से पहले अभी भी एक समझौता हो सकता है।
नागरिकों को संभावित नुकसान के बारे में चिंताओं का जवाब देते हुए ट्ंप ने कहा कि उनका मानना है कि ईरान के वे नागरिक जो अपनी सरकार के विरोधी हैं, ऐसे कार्यों का समर्थन करेंगे। वे भय में जी रहे हैं। उन्हें डर है कि हम युद्ध के बीच में ही छोड़कर चले जाएंगे, लेकिन हम नहीं जाएंगे।


