Escalation: ईरान के साथ बढ़ते तनाव और युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रक्षा बजट में 1.5 ट्रिलियन डॉलर की भारी बढ़ोतरी की मांग की है। इस बीच, यरूशलम में अल-अक्सा मस्जिद में प्रवेश पर हफ्तों से पाबंदी जारी है, जिससे नमाजियों को सड़कों पर प्रार्थना करनी पड़ रही है। इजराइली सेना ने पुष्टि की है कि ईरान की तरफ से कई मिसाइलें दागी गई हैं, जिन्हें रोकने के लिए वायु रक्षा प्रणाली सक्रिय है। वहीं, अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान के नागरिक और औद्योगिक ठिकानों पर किए जा रहे हमलों को लेकर मानवाधिकार विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है ।
नागरिक ठिकानों पर हमला युद्ध अपराध
ह्यूमन राइट्स वॉच के पूर्व प्रमुख केनेथ रोथ ने चेतावनी दी है कि ईरान के पावर प्लांट और नागरिक बुनियादी ढांचे पर अमेरिकी हमले युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी ट्रंप की धमकियों को बड़े पैमाने पर युद्ध अपराध करने का इरादा करार दिया है। उनका कहना है कि इतिहास ऐसे अपराधियों को कभी माफ नहीं करेगा।
ईरान का 70% स्टील उत्पादन तबाह
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि संयुक्त वायु हमलों में ईरान की 70 प्रतिशत स्टील उत्पादन क्षमता नष्ट हो गई है। उन्होंने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताया है जिससे ईरान के रिवोल्युशनरी गार्ड्स के वित्तीय संसाधन और हथियार बनाने की क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर पलटवार
ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी सेना से जुड़े ठिकानों पर ड्रोन हमले किए हैं। ईरानी सेना के अनुसार, यह कार्रवाई उनके औद्योगिक परिसरों और विश्वविद्यालयों पर हुए अमेरिकी और इजराइली हमलों का सीधा बदला है।
राहत सामग्री गोदामों पर हमले से संकट
दक्षिणी ईरान के बुशहर में एक इजराइली-अमेरिकी ड्रोन हमले में रेड क्रॉस और रेड क्रीसेंट की राहत सामग्री और आपातकालीन वाहनों वाले गोदाम को नष्ट कर दिया गया है। इससे प्रभावित इलाकों में चिकित्सा और मानवीय सहायता का भारी संकट खड़ा हो गया है, और आम नागरिकों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
अमेरिकी सैन्य अड्डों की सुरक्षा हाई अलर्ट पर कर दी गई
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने नागरिक और मानवीय ठिकानों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की है। ईरान ने इसे खुलेआम उकसावे और युद्ध अपराध की कार्रवाई बताया है, जबकि इजराइल और अमेरिका इसे दुश्मन के सैन्य ढांचे को पंगु बनाने की जरूरी रणनीति मान रहे हैं। इस बढ़ते सैन्य संघर्ष के बाद अब संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक समुदाय पर युद्धविराम कराने का अत्यधिक दबाव है।
अमेरिकी सैन्य अड्डों की सुरक्षा हाई अलर्ट पर
ईरान के पलटवार के बाद खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों की सुरक्षा हाई अलर्ट पर कर दी गई है। युद्ध के कारण यरूशलम में धार्मिक तनाव भी अपने चरम पर पहुंच गया है। अल-अक्सा मस्जिद में फिलिस्तीनियों का प्रवेश निषेध होने से स्थानीय लोगों में भारी रोष है। यह स्थिति इस सैन्य संघर्ष में एक नया और बेहद संवेदनशील धार्मिक मोर्चा खोल सकती है।


