US-Iran Peace Talk: डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान, कहा- ईरान को होर्मुज में टोल लगाने की अनुमति नहीं

US-Iran Peace Talk: डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान, कहा- ईरान को होर्मुज में टोल लगाने की अनुमति नहीं

US President Donald Trump on Hormuz Strait: अमेरिका और ईरान के बीच आज 11 अप्रैल को बातचीत शुरू होने वाली है। उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस जहां अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल तो, वहीं मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ईरान का प्रतिनिधत्व करेंगे। दोनों देशों की बातचीत से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि वाशिंगटन ईरान को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने के किसी प्रयास की अनुमति नहीं देगा। तेहरान से बढ़ते तनाव के बीच उन्होंने इसे एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग बताया।

अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस के रवाना होने से पहले जॉइंट बेस एंड्रयूज में मीडिया से बातचीत में बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार के पारगमन शुल्क यानी ट्रांजिट फीस की अनुमति देने की संभावना को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा, ‘नहीं, हम इसकी इजाज़त नहीं देंगे, यह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र है। अगर वे ऐसा कर रहे हैं, तो हम इसे होने नहीं देंगे।’

ट्रंप ने की थी तेहरान की आलोचना

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ये टिप्पणी तब आई है, जब उन्होंने तेहरान की उस कथित प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की थी, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर पारगमन शुल्क लगाने की बात कही गई थी। यह होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल शिपमेंट के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग का काम करता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप न ट्रुथ सोशल पर लिखा था, ‘ईरानी शायद यह नहीं समझते कि उनके पास अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों का इस्तेमाल करके दुनिया से अल्पकालिक ब्लैकमेल करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। आज वे सिर्फ बातचीत करने के लिए ही जीवित हैं!’

‘ईरान को अमेरिका पर भरोसा नहीं’

एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने जर्मनी समकक्ष योहान वाडेफुल से फोन पर कहा है कि उनके देश को अमेरिका पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल को होने वाली बातचीत पर भी यकीन नहीं है। अब्बास अराघची ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने बार-बार अपने वादे तोड़े हैं। कूटनीतिक रूप से विश्वासघात किया है। इसी कारण से ईरानी प्रतिनिधिमंडल को होने वाली बातचीत पर यकीन नहीं है। उन्होंने दोहराया कि ईरान जनता के हितों और अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी ताकत से लड़ेगी।

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