UPSC Result 2026 : शिक्षामित्र की बेटे की बड़ी कामयाबी, अनुपम वर्मा बने IAS, छठे प्रयास में UPSC फतह

UPSC Result 2026 : शिक्षामित्र की बेटे की बड़ी कामयाबी, अनुपम वर्मा बने IAS, छठे प्रयास में UPSC फतह

UPSC Result Story:  बाराबंकी जिले के मसौली क्षेत्र के एक छोटे से गांव से निकलकर कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर एक युवा ने देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता हासिल कर ली। मसौली थाना क्षेत्र के मुबारकपुर गांव निवासी अनुपम कुमार वर्मा का चयन प्रतिष्ठित Union Public Service Commission Civil Services Examination में हुआ है। अब वे भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी Indian Administrative Service के अधिकारी बनेंगे।

अनुपम की इस सफलता ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे जिले को गौरवान्वित कर दिया है। खास बात यह है कि उनकी मां पूनम वर्मा एक शिक्षामित्र हैं, जिनकी मेहनत और प्रेरणा ने बेटे को इस मुकाम तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गांव में जैसे ही अनुपम के चयन की खबर पहुंची, पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों ने मिठाइयां बांटकर और बधाइयां देकर परिवार की खुशी में भागीदारी की।

साधारण परिवार से निकलकर हासिल की असाधारण सफलता

अनुपम कुमार वर्मा का परिवार बेहद साधारण पृष्ठभूमि से जुड़ा है। उनके पिता सुरेंद्र सिंह गांव में रहकर खेती-बाड़ी करते हैं, जबकि उनकी मां पूनम वर्मा बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षामित्र के रूप में कार्यरत हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद माता-पिता ने बेटे की पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी। अनुपम की शुरुआती शिक्षा बाराबंकी शहर के बाबा गुरुकुल एकेडमी से हुई। उन्होंने यहीं से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान ही उनका लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में जाने का बन गया था।

स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद अनुपम ने उच्च शिक्षा के लिए University of Lucknow में दाखिला लिया। यहां से उन्होंने वर्ष 2019 में स्नातक (बीए) की डिग्री प्राप्त की। कॉलेज के दिनों से ही उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी।

कई साल की मेहनत और संघर्ष के बाद मिली सफलता

सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। इसमें सफलता प्राप्त करने के लिए वर्षों की तैयारी और धैर्य की आवश्यकता होती है। अनुपम वर्मा ने भी इस परीक्षा की तैयारी में कई साल लगाए। उन्होंने कई बार परीक्षा दी और हर बार अपने अनुभव से सीखते हुए आगे बढ़ते रहे। वर्ष 2022 में वे सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू चरण तक पहुंचे थे, लेकिन अंतिम चयन सूची में स्थान नहीं बना सके। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और तैयारी जारी रखी।

उसी वर्ष उन्हें एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली, जब उनका चयन Uttar Pradesh Public Service Commission PCS Exam में हो गया। इसके बाद उन्हें प्रशासनिक सेवा में नियुक्ति मिली और वर्तमान में वे Sohawal Tehsil, Ayodhya में बीडीओ (ब्लॉक विकास अधिकारी) के पद पर कार्यरत हैं। पीसीएस अधिकारी बनने के बाद भी अनुपम ने अपने बड़े लक्ष्य को नहीं छोड़ा। उन्होंने पूरी लगन से तैयारी जारी रखी और अंततः छठे प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त कर ली।

मां की मेहनत और प्रेरणा बनी ताकत

अनुपम की इस सफलता के पीछे उनकी मां पूनम वर्मा का विशेष योगदान रहा है। पूनम वर्मा बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षामित्र के रूप में कार्यरत हैं और वर्तमान में बाराबंकी के Baniyatara, Banki, Barabanki स्थित प्राथमिक विद्यालय में तैनात हैं। उन्होंने हमेशा अपने बेटे को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और कठिन परिस्थितियों में भी उसका हौसला बनाए रखा। पूनम वर्मा का कहना है कि बेटे की मेहनत और लगन पर उन्हें हमेशा भरोसा था। उन्होंने कहा कि अनुपम बचपन से ही पढ़ाई में काफी मेहनती था और उसका सपना प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज के लिए काम करना था। आज उसका यह सपना पूरा हो गया है।

गांव और जिले में खुशी का माहौल

अनुपम वर्मा के आईएएस बनने की खबर जैसे ही मुबारकपुर गांव पहुंची, पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल बन गया। गांव के लोग उनके घर पहुंचकर परिवार को बधाई देने लगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि अनुपम की सफलता से गांव के युवाओं को भी प्रेरणा मिलेगी। यह साबित करता है कि अगर लक्ष्य बड़ा हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो साधारण परिवार का बेटा भी देश की सर्वोच्च सेवाओं तक पहुंच सकता है। शिक्षामित्रों और बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों ने भी अनुपम की इस उपलब्धि को गर्व का क्षण बताया है। उनका कहना है कि यह सफलता उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने का साहस रखते हैं।

युवाओं के लिए प्रेरणा बने अनुपम

अनुपम वर्मा की कहानी संघर्ष, धैर्य और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। उन्होंने कई बार असफलताओं का सामना किया, लेकिन हार नहीं मानी। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियां कभी भी सफलता की राह में स्थायी बाधा नहीं बन सकतीं। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार की जाए तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है। अनुपम का कहना है कि सिविल सेवा की तैयारी करने वाले युवाओं को धैर्य बनाए रखना चाहिए और हर असफलता से सीख कर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और मार्गदर्शकों को दिया है।

परिवार को है बेटे पर गर्व

अनुपम की इस उपलब्धि से उनका पूरा परिवार बेहद खुश और गर्व महसूस कर रहा है। पिता सुरेंद्र सिंह का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका बेटा एक दिन आईएएस अधिकारी बनेगा, लेकिन उसकी मेहनत और लगन ने यह सपना सच कर दिया। मां पूनम वर्मा की आंखों में खुशी के आंसू थे। उन्होंने कहा कि यह सफलता उनके परिवार के साथ-साथ पूरे शिक्षामित्र समुदाय के लिए गर्व का क्षण है।

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