Winter Olympics में ‘Remembrance Helmet’ पर बवाल, यूक्रेनी एथलीट Heraskevych अयोग्य घोषित

Winter Olympics में ‘Remembrance Helmet’ पर बवाल, यूक्रेनी एथलीट Heraskevych अयोग्य घोषित

मिलानो कॉर्तिना शीतकालीन ओलंपिक में गुरुवार का दिन खेल से ज्यादा भावनाओं और विवादों के नाम रहा। यूक्रेन के स्केलेटन खिलाड़ी व्लादिस्लाव हेरास्केविच को उनके विशेष “हेलमेट ऑफ रिमेम्ब्रेंस” के कारण प्रतियोगिता से अयोग्य घोषित कर दिया गया। इस हेलमेट पर रूस के आक्रमण के बाद मारे गए यूक्रेनी खिलाड़ियों की तस्वीरें दर्शाई गई थीं।बता दें कि 27 वर्षीय हेरास्केविच इटली में प्रशिक्षण के दौरान भी यही हेलमेट पहन रहे थे। प्रतियोगिता शुरू होने से कुछ मिनट पहले उन्हें रेस से बाहर कर दिया गया और शुरुआती जानकारी में उनकी मान्यता रद्द करने की बात भी कही गई। हालांकि बाद में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने स्पष्ट किया कि अध्यक्ष कर्स्टी कोवेंट्री के अनुरोध पर उनकी मान्यता बरकरार रखी गई, लेकिन उन्हें रेस में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी गई।मौजूद नियमों के अनुसार ओलंपिक खेलों के मैदान पर किसी भी प्रकार का राजनीतिक संदेश प्रदर्शित करना प्रतिबंधित है। आईओसी का मानना है कि हेलमेट पर प्रदर्शित संदेश इस नियम का उल्लंघन था। हेरास्केविच ने इस फैसले पर निराशा जताते हुए कहा कि वह अपना ओलंपिक क्षण खो चुके हैं और यह उन खिलाड़ियों की स्मृति का अपमान है जिनकी मृत्यु युद्ध में हुई।गौरतलब है कि उन्होंने खेल की सर्वोच्च न्यायिक संस्था कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट (CAS) में अपील दायर की है। उनका आग्रह है कि या तो उन्हें बहाल किया जाए या कम से कम अंतिम निर्णय तक एक पर्यवेक्षित रन की अनुमति दी जाए। सीएएस ने मामले की तात्कालिक समीक्षा का संकेत दिया है।आईओसी अध्यक्ष कोवेंट्री स्वयं सुबह प्रतियोगिता स्थल पर पहुंचीं और हेरास्केविच से मुलाकात की। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने भावुक होकर कहा कि संदेश की भावना से असहमति नहीं है, लेकिन नियमों का पालन करना आवश्यक है। आईओसी ने काले आर्मबैंड जैसे वैकल्पिक तरीकों का सुझाव दिया था, परंतु समाधान नहीं निकल सका।यह पहला मौका नहीं है जब ओलंपिक में राजनीतिक अभिव्यक्ति पर कार्रवाई हुई हो। 1968 मेक्सिको सिटी ओलंपिक में अमेरिकी धावक टॉमी स्मिथ और जॉन कार्लोस ने नस्लीय भेदभाव के विरोध में मुट्ठी उठाई थी, जिसके बाद उन्हें खेलों से निष्कासित कर दिया गया था।यूक्रेन की ओलंपिक समिति ने इस फैसले पर असंतोष जताया है, हालांकि खेलों के बहिष्कार से इनकार किया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा कि खेलों को युद्ध की स्मृति से अलग नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार अब तक 660 यूक्रेनी खिलाड़ी और कोच युद्ध में मारे जा चुके हैं। यूक्रेन के युवा और खेल मंत्री ने भी कहा कि हेलमेट पर किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि युद्ध में शहीद खिलाड़ियों का उल्लेख था।टीम के अन्य सदस्यों को फैसले के बाद भावुक देखा गया। मिक्स्ड रिले ल्यूज टीम ने अपने रन के बाद हेलमेट उठाकर हेरास्केविच के समर्थन का संकेत दिया। उनके पिता और कोच मिखाइलो भी स्थल पर मौजूद थे और भावुक नजर आए।अमेरिकी स्केलेटन खिलाड़ी डेनियल बेयरफुट ने हेरास्केविच के साहस की सराहना की और कहा कि उन्होंने अपने विश्वास के साथ खड़े रहने का फैसला किया। वहीं लातविया के कोच इवो स्टाइनबर्ग्स ने भी अंतरराष्ट्रीय महासंघ से पुनर्विचार की मांग की है।मौजूद जानकारी के अनुसार रूस की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। 2022 में रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद रूसी और बेलारूसी खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से बड़े पैमाने पर बाहर किया गया था, हालांकि बाद में आईओसी ने सख्त शर्तों के साथ उनकी सीमित वापसी का समर्थन किया।फिलहाल यह मामला खेल और राजनीति के संतुलन को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ चुका है, जहां एक ओर नियमों की सख्ती है तो दूसरी ओर युद्ध में जान गंवाने वालों की स्मृति का सवाल जुड़ा हुआ है। 

मिलानो कॉर्तिना शीतकालीन ओलंपिक में गुरुवार का दिन खेल से ज्यादा भावनाओं और विवादों के नाम रहा। यूक्रेन के स्केलेटन खिलाड़ी व्लादिस्लाव हेरास्केविच को उनके विशेष “हेलमेट ऑफ रिमेम्ब्रेंस” के कारण प्रतियोगिता से अयोग्य घोषित कर दिया गया। इस हेलमेट पर रूस के आक्रमण के बाद मारे गए यूक्रेनी खिलाड़ियों की तस्वीरें दर्शाई गई थीं।
बता दें कि 27 वर्षीय हेरास्केविच इटली में प्रशिक्षण के दौरान भी यही हेलमेट पहन रहे थे। प्रतियोगिता शुरू होने से कुछ मिनट पहले उन्हें रेस से बाहर कर दिया गया और शुरुआती जानकारी में उनकी मान्यता रद्द करने की बात भी कही गई। हालांकि बाद में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने स्पष्ट किया कि अध्यक्ष कर्स्टी कोवेंट्री के अनुरोध पर उनकी मान्यता बरकरार रखी गई, लेकिन उन्हें रेस में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी गई।
मौजूद नियमों के अनुसार ओलंपिक खेलों के मैदान पर किसी भी प्रकार का राजनीतिक संदेश प्रदर्शित करना प्रतिबंधित है। आईओसी का मानना है कि हेलमेट पर प्रदर्शित संदेश इस नियम का उल्लंघन था। हेरास्केविच ने इस फैसले पर निराशा जताते हुए कहा कि वह अपना ओलंपिक क्षण खो चुके हैं और यह उन खिलाड़ियों की स्मृति का अपमान है जिनकी मृत्यु युद्ध में हुई।
गौरतलब है कि उन्होंने खेल की सर्वोच्च न्यायिक संस्था कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट (CAS) में अपील दायर की है। उनका आग्रह है कि या तो उन्हें बहाल किया जाए या कम से कम अंतिम निर्णय तक एक पर्यवेक्षित रन की अनुमति दी जाए। सीएएस ने मामले की तात्कालिक समीक्षा का संकेत दिया है।
आईओसी अध्यक्ष कोवेंट्री स्वयं सुबह प्रतियोगिता स्थल पर पहुंचीं और हेरास्केविच से मुलाकात की। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने भावुक होकर कहा कि संदेश की भावना से असहमति नहीं है, लेकिन नियमों का पालन करना आवश्यक है। आईओसी ने काले आर्मबैंड जैसे वैकल्पिक तरीकों का सुझाव दिया था, परंतु समाधान नहीं निकल सका।
यह पहला मौका नहीं है जब ओलंपिक में राजनीतिक अभिव्यक्ति पर कार्रवाई हुई हो। 1968 मेक्सिको सिटी ओलंपिक में अमेरिकी धावक टॉमी स्मिथ और जॉन कार्लोस ने नस्लीय भेदभाव के विरोध में मुट्ठी उठाई थी, जिसके बाद उन्हें खेलों से निष्कासित कर दिया गया था।
यूक्रेन की ओलंपिक समिति ने इस फैसले पर असंतोष जताया है, हालांकि खेलों के बहिष्कार से इनकार किया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा कि खेलों को युद्ध की स्मृति से अलग नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार अब तक 660 यूक्रेनी खिलाड़ी और कोच युद्ध में मारे जा चुके हैं। यूक्रेन के युवा और खेल मंत्री ने भी कहा कि हेलमेट पर किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि युद्ध में शहीद खिलाड़ियों का उल्लेख था।
टीम के अन्य सदस्यों को फैसले के बाद भावुक देखा गया। मिक्स्ड रिले ल्यूज टीम ने अपने रन के बाद हेलमेट उठाकर हेरास्केविच के समर्थन का संकेत दिया। उनके पिता और कोच मिखाइलो भी स्थल पर मौजूद थे और भावुक नजर आए।
अमेरिकी स्केलेटन खिलाड़ी डेनियल बेयरफुट ने हेरास्केविच के साहस की सराहना की और कहा कि उन्होंने अपने विश्वास के साथ खड़े रहने का फैसला किया। वहीं लातविया के कोच इवो स्टाइनबर्ग्स ने भी अंतरराष्ट्रीय महासंघ से पुनर्विचार की मांग की है।
मौजूद जानकारी के अनुसार रूस की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। 2022 में रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद रूसी और बेलारूसी खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से बड़े पैमाने पर बाहर किया गया था, हालांकि बाद में आईओसी ने सख्त शर्तों के साथ उनकी सीमित वापसी का समर्थन किया।
फिलहाल यह मामला खेल और राजनीति के संतुलन को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ चुका है, जहां एक ओर नियमों की सख्ती है तो दूसरी ओर युद्ध में जान गंवाने वालों की स्मृति का सवाल जुड़ा हुआ है।

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