La Liga में बवाल: रेफरी के फैसलों पर भड़का Barcelona, Spanish Federation को भेजी सीधी शिकायत

La Liga में बवाल: रेफरी के फैसलों पर भड़का Barcelona, Spanish Federation को भेजी सीधी शिकायत

स्पेनिश फुटबॉल में इन दिनों रेफरिंग को लेकर बहस तेज हो गई है और इसी बीच एफसी बार्सिलोना ने आधिकारिक रूप से अपनी नाराजगी दर्ज कराई है। क्लब ने रॉयल स्पैनिश फुटबॉल फेडरेशन (आरएफईएफ) को एक औपचारिक शिकायत पत्र भेजते हुए रेफरिंग मानकों में एकरूपता की कमी पर गंभीर चिंता जताई है।बता दें कि यह पत्र आरएफईएफ की अध्यक्षता और टेक्निकल कमेटी ऑफ रेफरीज़ (सीटीए) को संबोधित है। क्लब का आरोप है कि अलग-अलग मुकाबलों में फैसलों के लिए एक समान मानदंड लागू नहीं किए जा रहे, जिसका नकारात्मक प्रभाव पुरुष और महिला दोनों टीमों पर पड़ा है।मौजूद जानकारी के अनुसार, क्लब ने पांच प्रमुख बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज की है। पहला मुद्दा तथाकथित “डबल स्टैंडर्ड” से जुड़ा है। बार्सिलोना ने सुपर कप में फ्रेंकी डी जोंग को दिखाए गए रेड कार्ड की तुलना एलेजांद्रो बाल्डे द्वारा गिउलिआनो शिमोन पर किए गए चैलेंज से की, जिसमें समान सजा नहीं दी गई।हैंडबॉल के मामलों में भी क्लब ने असंगति का आरोप लगाया। एक पूर्व ‘एल क्लासिको’ में ऑरेलियन टचौमेनी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने का हवाला देते हुए कहा गया कि हाल ही में समान परिस्थिति में बार्सिलोना के खिलाफ पेनल्टी दे दी गई, जबकि दोनों फैसले एक ही अधिकारी द्वारा लिए गए थे। गौरतलब है कि ‘एल क्लासिको’ मुकाबले स्पेनिश लीग के सबसे हाई-प्रोफाइल मैच माने जाते हैं।क्लब ने यह भी कहा कि कई स्पष्ट गलतियां लगातार उनके खिलाफ जाती दिखी हैं, जिससे प्रतियोगिता की निष्पक्षता प्रभावित होती है। तकनीक के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए गए हैं। बार्सिलोना का दावा है कि अत्यंत सूक्ष्म या ‘नैनोमेट्रिक’ फैसले, जैसे रॉबर्ट लेवांडोव्स्की और लैमिन यमल के गोल रद्द किए जाना, अक्सर उनके खिलाफ गए हैं।विशेष रूप से पौ कुबार्सी के एटलेटिको मैड्रिड के खिलाफ रद्द किए गए गोल पर सात मिनट तक चले VAR रिव्यू की पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए हैं। इसके अलावा, क्लब ने VAR हस्तक्षेप में असमानता की ओर इशारा करते हुए कहा कि जहां एरिक गार्सिया के मामले में रिव्यू किया गया, वहीं बाल्दे और यामाल पर हुए कथित गंभीर फाउल को नजरअंदाज कर दिया गया।गौरतलब है कि बार्सिलोना ने अपने पत्र में रेफरियों की पेशेवर निष्ठा पर सवाल नहीं उठाया, बल्कि लागू किए जा रहे मानकों की तत्काल समीक्षा की मांग की है। क्लब का कहना है कि प्रतियोगिताओं की साख और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए समान मानदंड आवश्यक हैं। स्पेनिश फुटबॉल में पहले भी रेफरिंग को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं, ऐसे में यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। 

स्पेनिश फुटबॉल में इन दिनों रेफरिंग को लेकर बहस तेज हो गई है और इसी बीच एफसी बार्सिलोना ने आधिकारिक रूप से अपनी नाराजगी दर्ज कराई है। क्लब ने रॉयल स्पैनिश फुटबॉल फेडरेशन (आरएफईएफ) को एक औपचारिक शिकायत पत्र भेजते हुए रेफरिंग मानकों में एकरूपता की कमी पर गंभीर चिंता जताई है।
बता दें कि यह पत्र आरएफईएफ की अध्यक्षता और टेक्निकल कमेटी ऑफ रेफरीज़ (सीटीए) को संबोधित है। क्लब का आरोप है कि अलग-अलग मुकाबलों में फैसलों के लिए एक समान मानदंड लागू नहीं किए जा रहे, जिसका नकारात्मक प्रभाव पुरुष और महिला दोनों टीमों पर पड़ा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, क्लब ने पांच प्रमुख बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज की है। पहला मुद्दा तथाकथित “डबल स्टैंडर्ड” से जुड़ा है। बार्सिलोना ने सुपर कप में फ्रेंकी डी जोंग को दिखाए गए रेड कार्ड की तुलना एलेजांद्रो बाल्डे द्वारा गिउलिआनो शिमोन पर किए गए चैलेंज से की, जिसमें समान सजा नहीं दी गई।
हैंडबॉल के मामलों में भी क्लब ने असंगति का आरोप लगाया। एक पूर्व ‘एल क्लासिको’ में ऑरेलियन टचौमेनी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने का हवाला देते हुए कहा गया कि हाल ही में समान परिस्थिति में बार्सिलोना के खिलाफ पेनल्टी दे दी गई, जबकि दोनों फैसले एक ही अधिकारी द्वारा लिए गए थे। गौरतलब है कि ‘एल क्लासिको’ मुकाबले स्पेनिश लीग के सबसे हाई-प्रोफाइल मैच माने जाते हैं।
क्लब ने यह भी कहा कि कई स्पष्ट गलतियां लगातार उनके खिलाफ जाती दिखी हैं, जिससे प्रतियोगिता की निष्पक्षता प्रभावित होती है। तकनीक के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए गए हैं। बार्सिलोना का दावा है कि अत्यंत सूक्ष्म या ‘नैनोमेट्रिक’ फैसले, जैसे रॉबर्ट लेवांडोव्स्की और लैमिन यमल के गोल रद्द किए जाना, अक्सर उनके खिलाफ गए हैं।
विशेष रूप से पौ कुबार्सी के एटलेटिको मैड्रिड के खिलाफ रद्द किए गए गोल पर सात मिनट तक चले VAR रिव्यू की पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए हैं। इसके अलावा, क्लब ने VAR हस्तक्षेप में असमानता की ओर इशारा करते हुए कहा कि जहां एरिक गार्सिया के मामले में रिव्यू किया गया, वहीं बाल्दे और यामाल पर हुए कथित गंभीर फाउल को नजरअंदाज कर दिया गया।
गौरतलब है कि बार्सिलोना ने अपने पत्र में रेफरियों की पेशेवर निष्ठा पर सवाल नहीं उठाया, बल्कि लागू किए जा रहे मानकों की तत्काल समीक्षा की मांग की है। क्लब का कहना है कि प्रतियोगिताओं की साख और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए समान मानदंड आवश्यक हैं। स्पेनिश फुटबॉल में पहले भी रेफरिंग को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं, ऐसे में यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।

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