औरंगाबाद में यूजीसी के विरोध में एकजुट होंगे सवर्ण:29 मार्च से होगा अभियान, कहा- ये बिल बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय करने वाला

औरंगाबाद में यूजीसी के विरोध में एकजुट होंगे सवर्ण:29 मार्च से होगा अभियान, कहा- ये बिल बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय करने वाला

औरंगाबाद में यूजीसी से जुड़े प्रस्तावित बिल के विरोध में सवर्ण एकता मंच ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। आज शहर के चित्तौड़ नगर में आयोजित एक प्रेसवार्ता में मंच के नेताओं ने इस बिल के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई और देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की। इस दौरान भाजपा नेता प्रवीण सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एकमत होकर इस बिल को अस्वीकार्य बताया और कहा कि किसी भी स्थिति में इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय करने वाला बिल प्रेसवार्ता के दौरान वक्ताओं ने कहा कि सवर्ण समाज ने साल 2014 में राष्ट्रहित में नरेंद्र मोदी को देश की बागडोर सौंपी थी, लेकिन साल 2026 में उनकी नीतियां सवर्ण विरोधी प्रतीत हो रही हैं। नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से लाया गया यह बिल सवर्ण समाज के बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय करने वाला है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वे पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने से भी पीछे नहीं हटेंगे और आने वाली पीढ़ी के लिए संघर्ष का उदाहरण प्रस्तुत करेंगे। यूजीसी बिल के विरोध में देश स्तर पर करेंगे आंदोलन सवर्ण एकता मंच के सदस्यों ने कहा कि यह केवल औरंगाबाद तक सीमित आंदोलन नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश में इसे विस्तार दिया जाएगा। मंच ने 29 मार्च से व्यापक अभियान शुरू करने की घोषणा की है, जिसके तहत गांव-गांव और शहर-शहर जाकर लोगों को इस बिल के खिलाफ जागरूक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मंच एक मजबूत संगठन तैयार करेगा, जो सरकार के समानांतर खड़ा होकर इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएगा। नेताओं ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि जवाहरलाल नेहरू के समय जब इस प्रकार के प्रावधान बनाए गए थे, तब सभी वर्गों दलित और सवर्ण दोनों के हितों का ध्यान रखा जाता था। लेकिन वर्तमान में जो बिल लाया गया है, वह एकतरफा और संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया जा रहा है। उन्होंने इसे नीतिगत रूप से भी गलत करार दिया। सवर्ण समाज के लोगों से एकजुट होने की अपील इस मौके पर सवर्ण समाज के लोगों से एकजुट होने की अपील भी की गई। मंच ने सभी लोगों को भगवान भास्कर की नगरी देव में आयोजित होने वाली महापंचायत में शामिल होने का आह्वान किया, जहां आगे की रणनीति तय की जाएगी। मंच के नेताओं ने यह भी बताया कि फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। यदि कोर्ट इस बिल को निरस्त करता है तो यह न्याय की जीत होगी, लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि बिल वापसी के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष किया जाएगा। मंच से जुड़े लोगों ने बताया कि यूजीसी बिल प्रस्ताव में आने के बाद मंच का गठन किया गया है। सवर्ण समाज से जुड़े लोगों का भरपूर समर्थन मंच को मिल रहा है। उम्मीद है जल्द ही मंच राष्ट्रीय स्तर पर खड़ा होगा और सवर्णा हित में आवाज बुलंद किया जाएगा। औरंगाबाद में यूजीसी से जुड़े प्रस्तावित बिल के विरोध में सवर्ण एकता मंच ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। आज शहर के चित्तौड़ नगर में आयोजित एक प्रेसवार्ता में मंच के नेताओं ने इस बिल के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई और देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की। इस दौरान भाजपा नेता प्रवीण सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एकमत होकर इस बिल को अस्वीकार्य बताया और कहा कि किसी भी स्थिति में इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय करने वाला बिल प्रेसवार्ता के दौरान वक्ताओं ने कहा कि सवर्ण समाज ने साल 2014 में राष्ट्रहित में नरेंद्र मोदी को देश की बागडोर सौंपी थी, लेकिन साल 2026 में उनकी नीतियां सवर्ण विरोधी प्रतीत हो रही हैं। नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से लाया गया यह बिल सवर्ण समाज के बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय करने वाला है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वे पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने से भी पीछे नहीं हटेंगे और आने वाली पीढ़ी के लिए संघर्ष का उदाहरण प्रस्तुत करेंगे। यूजीसी बिल के विरोध में देश स्तर पर करेंगे आंदोलन सवर्ण एकता मंच के सदस्यों ने कहा कि यह केवल औरंगाबाद तक सीमित आंदोलन नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश में इसे विस्तार दिया जाएगा। मंच ने 29 मार्च से व्यापक अभियान शुरू करने की घोषणा की है, जिसके तहत गांव-गांव और शहर-शहर जाकर लोगों को इस बिल के खिलाफ जागरूक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मंच एक मजबूत संगठन तैयार करेगा, जो सरकार के समानांतर खड़ा होकर इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएगा। नेताओं ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि जवाहरलाल नेहरू के समय जब इस प्रकार के प्रावधान बनाए गए थे, तब सभी वर्गों दलित और सवर्ण दोनों के हितों का ध्यान रखा जाता था। लेकिन वर्तमान में जो बिल लाया गया है, वह एकतरफा और संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया जा रहा है। उन्होंने इसे नीतिगत रूप से भी गलत करार दिया। सवर्ण समाज के लोगों से एकजुट होने की अपील इस मौके पर सवर्ण समाज के लोगों से एकजुट होने की अपील भी की गई। मंच ने सभी लोगों को भगवान भास्कर की नगरी देव में आयोजित होने वाली महापंचायत में शामिल होने का आह्वान किया, जहां आगे की रणनीति तय की जाएगी। मंच के नेताओं ने यह भी बताया कि फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। यदि कोर्ट इस बिल को निरस्त करता है तो यह न्याय की जीत होगी, लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि बिल वापसी के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष किया जाएगा। मंच से जुड़े लोगों ने बताया कि यूजीसी बिल प्रस्ताव में आने के बाद मंच का गठन किया गया है। सवर्ण समाज से जुड़े लोगों का भरपूर समर्थन मंच को मिल रहा है। उम्मीद है जल्द ही मंच राष्ट्रीय स्तर पर खड़ा होगा और सवर्णा हित में आवाज बुलंद किया जाएगा।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *