उपेंद्र कुशवाहा की जीत तय, BJP ने बनाया चौथा कैंडिडेट:चिराग-मांझी टूट न जाएं, इसके लिए भाजपा की नई रणनीति, सामने उतारा दलित कैंडिडेट

उपेंद्र कुशवाहा की जीत तय, BJP ने बनाया चौथा कैंडिडेट:चिराग-मांझी टूट न जाएं, इसके लिए भाजपा की नई रणनीति, सामने उतारा दलित कैंडिडेट

राष्ट्रीय लोकमोर्चा (RLM) सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा का एक बार फिर से राज्यसभा जाना तय हो गया है। पर्दे के पीछे से BJP ने बड़ा उलटफेर कर दिया है। दरअसल, कुशवाहा ने भले RLM के तहत अपना नॉमिनेशन किया है, लेकिन BJP ने NDA कोटे से उन्हें अपना चौथा कैंडिडेट बना दिया है। 5वीं सीट के लिए पर्याप्त विधायक न NDA के पास है और न ही महागठबंधन के पास। उस सीट पर BJP ने पार्टी के महामंत्री शिवेश राम को उतारा है। RLM के प्रदेश अध्यक्ष आलोक सिंह ने इसकी पुष्टि की है। भास्कर को आलोक सिंह ने बताया, ‘हमारे नेता की जीत में कहीं कोई बाधा नहीं है। वे चौथे कैंडिडेट हैं। अगले एक से दो दिन में उन्हें समर्थन देने वाले विधायकों की पूरी लिस्ट जारी कर दी जाएगी।’ वहीं, BJP कैंडिडेट शिवेश राम ने बताया, ‘हमें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।’ एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में जानिए, भाजपा ने क्यों अचानक रणनीति बदली और अपने दलित नेता की जगह उपेंद्र कुशवाहा के जीत को प्रायोरिटी दी? सबसे पहले समझिए, चुनाव की प्रक्रिया क्या होगी बिहार विधानसभा के एक सीनियर अधिकारी ने भास्कर को बताया, ’चुनाव के लिहाज से यहां नंबर-1 या नंबर-2 कुछ नहीं होता है। यहां की प्रक्रिया को ऐसे समझिए कि राज्यसभा के लिए 5 सीटें खाली हो रही हैं। इस पर 6 कैंडिडेट ने अपना नॉमिनेशन कराया है। इसके कारण वोटिंग होगी।’ वोटिंग केवल एक सीट के लिए नहीं होगी, बल्कि सभी 6 कैंडिडेट के लिए होगी। सभी 243 विधायक वैलेट पेपर पर फर्स्ट प्रायोरिटी और सेकेंड प्रायोरिटी लिखेंगे। एक सांसद के लिए 41 विधायक के वोट की जरूरत होगी। 41 वोट पूरा होने के बाद बाकी बचे विधायक सेकेंड प्रायोरिटी में शिफ्ट हो जाएंगे। इस लिहाज से समझिए तो 4 कैंडिडेट को जीतने में कहीं कोई परेशानी नहीं होगी। 5वें कैंडिडेट को जीतने के लिए मशक्कत करनी पड़ेगी। अब दोनों गठबंधन के कैंडिडेट और उनके जीत के समीकरण को समझिए 16 मार्च को बिहार के राज्यसभा की खाली हो रही 5 सीटों के लिए चुनाव होना है। इसमें NDA की तरफ से 5 कैंडिडेट CM नीतीश कुमार, BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर, RLM के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और ‌BJP के प्रदेश महामंत्री शिवेश राम ने नॉमिनेशन किया है। महागठबंधन की तरफ से राजद के मौजूदा सांसद एडी सिंह ने अपना पर्चा दाखिल कर दिया है। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत है, ये पहले से ही तय होता है। वोटों की संख्या के कैलकुलेशन के लिए चुनाव आयोग ड्रॉप कोटा फॉर्मूले को लागू करता है। ड्रॉप कोटा फॉर्मूला: कोटा (Q) = ⌊ कुल वैध वोट / (सीटें + 1)। अब बिहार के संदर्भ में इस फॉर्मूले को समझिए… Q= 243/ (5=1)= 40.5 मतलब 41 5 सीटें जीतने के लिए कुल वोट चाहिए: 5×41=205 NDA के विधायक: 202 वोट घाटा: 205-202=3 वोट मतलब NDA को 4 सीटें आसानी से मिल जाएंगी। उसके पास 202 विधायक हैं। 41 वोट के लिहाज से 4 सीटें जीत के लिए 164 विधायक लगेंगे। इसके बाद NDA के पास 38 विधायक बचेंगे और 5वीं सीट जीतने के लिए उसे 3 और विधायकों का समर्थन चाहिए। वहीं, राजद उम्मीदवार एडी सिंह (अमरेंद्र धारी सिंह) को जीत के लिए 41 वोट चाहिए। राजद के पास अपने 25, कांग्रेस के 6, माले के 2 के साथ सीपीएम और आईआईपी के 1-1 वोट यानी कुल 35 वोट हैं। इस स्थिति में एडी अगर एआईएमआईएम के 5 और बसपा के 1 विधायक को अपने साथ जोड़ लेंगे तो राज्यसभा पहुंच जाएंगे। पार्टी की रणनीति- कैंडिडेट के हिसाब से विधायकों की लिस्ट जारी कर सकती है चुनाव को ट्रांसपैरेंट बनाने के लिए NDA अपनी रणनीति पर काम कर रही है। सूत्रों की मानें तो NDA के कौन से विधायक राज्यसभा के किस कैंडिडेट को वोट करेंगे, इसकी पूरी एक लिस्ट जारी करने की तैयारी की जा रही है। इससे तय हो जाएगा कि नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर को जदयू के कौन से विधायक वोट देंगे। नितिन नवीन और उपेंद्र कुशवाहा को भाजपा के कौन से विधायक वोट देंगे। इसके साथ ही BJP और जदयू के बाकी विधायकों के साथ LJP(R) और HAM के विधायकों को 5वें कैंडिडेट को वोट देने के लिए कहा जाएगा। लिस्ट जारी होने के बाद 4 सीटों के लिए वोटिंग एक फॉर्मिलिटी रह जाएगी। अब 3 पॉइंट में जानिए, कुशवाहा को लेकर भाजपा ने क्यों बदली रणनीति… 1. NDA के भीतर किसी तरह की क्रॉस वोटिंग की संभावना खत्म 2. उपेंद्र कुशवाहा ने नाम पर BJP की प्रतिष्ठा दांव पर 3. समझिए कुशवाहा BJP के लिए क्यों जरूरी राष्ट्रीय लोकमोर्चा (RLM) सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा का एक बार फिर से राज्यसभा जाना तय हो गया है। पर्दे के पीछे से BJP ने बड़ा उलटफेर कर दिया है। दरअसल, कुशवाहा ने भले RLM के तहत अपना नॉमिनेशन किया है, लेकिन BJP ने NDA कोटे से उन्हें अपना चौथा कैंडिडेट बना दिया है। 5वीं सीट के लिए पर्याप्त विधायक न NDA के पास है और न ही महागठबंधन के पास। उस सीट पर BJP ने पार्टी के महामंत्री शिवेश राम को उतारा है। RLM के प्रदेश अध्यक्ष आलोक सिंह ने इसकी पुष्टि की है। भास्कर को आलोक सिंह ने बताया, ‘हमारे नेता की जीत में कहीं कोई बाधा नहीं है। वे चौथे कैंडिडेट हैं। अगले एक से दो दिन में उन्हें समर्थन देने वाले विधायकों की पूरी लिस्ट जारी कर दी जाएगी।’ वहीं, BJP कैंडिडेट शिवेश राम ने बताया, ‘हमें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।’ एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में जानिए, भाजपा ने क्यों अचानक रणनीति बदली और अपने दलित नेता की जगह उपेंद्र कुशवाहा के जीत को प्रायोरिटी दी? सबसे पहले समझिए, चुनाव की प्रक्रिया क्या होगी बिहार विधानसभा के एक सीनियर अधिकारी ने भास्कर को बताया, ’चुनाव के लिहाज से यहां नंबर-1 या नंबर-2 कुछ नहीं होता है। यहां की प्रक्रिया को ऐसे समझिए कि राज्यसभा के लिए 5 सीटें खाली हो रही हैं। इस पर 6 कैंडिडेट ने अपना नॉमिनेशन कराया है। इसके कारण वोटिंग होगी।’ वोटिंग केवल एक सीट के लिए नहीं होगी, बल्कि सभी 6 कैंडिडेट के लिए होगी। सभी 243 विधायक वैलेट पेपर पर फर्स्ट प्रायोरिटी और सेकेंड प्रायोरिटी लिखेंगे। एक सांसद के लिए 41 विधायक के वोट की जरूरत होगी। 41 वोट पूरा होने के बाद बाकी बचे विधायक सेकेंड प्रायोरिटी में शिफ्ट हो जाएंगे। इस लिहाज से समझिए तो 4 कैंडिडेट को जीतने में कहीं कोई परेशानी नहीं होगी। 5वें कैंडिडेट को जीतने के लिए मशक्कत करनी पड़ेगी। अब दोनों गठबंधन के कैंडिडेट और उनके जीत के समीकरण को समझिए 16 मार्च को बिहार के राज्यसभा की खाली हो रही 5 सीटों के लिए चुनाव होना है। इसमें NDA की तरफ से 5 कैंडिडेट CM नीतीश कुमार, BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर, RLM के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और ‌BJP के प्रदेश महामंत्री शिवेश राम ने नॉमिनेशन किया है। महागठबंधन की तरफ से राजद के मौजूदा सांसद एडी सिंह ने अपना पर्चा दाखिल कर दिया है। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत है, ये पहले से ही तय होता है। वोटों की संख्या के कैलकुलेशन के लिए चुनाव आयोग ड्रॉप कोटा फॉर्मूले को लागू करता है। ड्रॉप कोटा फॉर्मूला: कोटा (Q) = ⌊ कुल वैध वोट / (सीटें + 1)। अब बिहार के संदर्भ में इस फॉर्मूले को समझिए… Q= 243/ (5=1)= 40.5 मतलब 41 5 सीटें जीतने के लिए कुल वोट चाहिए: 5×41=205 NDA के विधायक: 202 वोट घाटा: 205-202=3 वोट मतलब NDA को 4 सीटें आसानी से मिल जाएंगी। उसके पास 202 विधायक हैं। 41 वोट के लिहाज से 4 सीटें जीत के लिए 164 विधायक लगेंगे। इसके बाद NDA के पास 38 विधायक बचेंगे और 5वीं सीट जीतने के लिए उसे 3 और विधायकों का समर्थन चाहिए। वहीं, राजद उम्मीदवार एडी सिंह (अमरेंद्र धारी सिंह) को जीत के लिए 41 वोट चाहिए। राजद के पास अपने 25, कांग्रेस के 6, माले के 2 के साथ सीपीएम और आईआईपी के 1-1 वोट यानी कुल 35 वोट हैं। इस स्थिति में एडी अगर एआईएमआईएम के 5 और बसपा के 1 विधायक को अपने साथ जोड़ लेंगे तो राज्यसभा पहुंच जाएंगे। पार्टी की रणनीति- कैंडिडेट के हिसाब से विधायकों की लिस्ट जारी कर सकती है चुनाव को ट्रांसपैरेंट बनाने के लिए NDA अपनी रणनीति पर काम कर रही है। सूत्रों की मानें तो NDA के कौन से विधायक राज्यसभा के किस कैंडिडेट को वोट करेंगे, इसकी पूरी एक लिस्ट जारी करने की तैयारी की जा रही है। इससे तय हो जाएगा कि नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर को जदयू के कौन से विधायक वोट देंगे। नितिन नवीन और उपेंद्र कुशवाहा को भाजपा के कौन से विधायक वोट देंगे। इसके साथ ही BJP और जदयू के बाकी विधायकों के साथ LJP(R) और HAM के विधायकों को 5वें कैंडिडेट को वोट देने के लिए कहा जाएगा। लिस्ट जारी होने के बाद 4 सीटों के लिए वोटिंग एक फॉर्मिलिटी रह जाएगी। अब 3 पॉइंट में जानिए, कुशवाहा को लेकर भाजपा ने क्यों बदली रणनीति… 1. NDA के भीतर किसी तरह की क्रॉस वोटिंग की संभावना खत्म 2. उपेंद्र कुशवाहा ने नाम पर BJP की प्रतिष्ठा दांव पर 3. समझिए कुशवाहा BJP के लिए क्यों जरूरी  

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