UP Agriculture: नकली बीजों पर कसेगा शिकंजा: ‘साथी’ पोर्टल से किसान जान सकेंगे हर पैकेट की सच्चाई

UP Agriculture: नकली बीजों पर कसेगा शिकंजा: ‘साथी’ पोर्टल से किसान जान सकेंगे हर पैकेट की सच्चाई

‘SATHI’ Portal to Curb Fake Seeds: प्रदेश में किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने और नकली व मिलावटी बीजों पर सख्त अंकुश लगाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब बीज उत्पादन से लेकर किसान तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया ‘साथी’ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन ट्रैक की जाएगी। अप्रैल से सभी बीज व्यवसायियों को इस पोर्टल पर अपनी संपूर्ण जानकारी अनिवार्य रूप से अपडेट करनी होगी। डबल इंजन सरकार की इस पहल का उद्देश्य बीज वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाना, गुणवत्ता सुनिश्चित करना और किसानों को फर्जीवाड़े से बचाना है। इससे बीज के स्रोत, प्रमाणीकरण और गुणवत्ता संबंधी हर जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध होगी।

क्या है ‘साथी’ पोर्टल

‘साथी’ (Seed Authentication, Traceability and Holistic Inventory) पोर्टल को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा विकसित किया गया है। यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका मकसद बीज उत्पादन, प्रमाणीकरण, भंडारण और वितरण की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है। इस पोर्टल के माध्यम से बीज के पैकेट पर लगे टैग के QR कोड को स्कैन कर किसान यह जान सकेंगे कि बीज किस संस्था या फर्म ने तैयार किया है, उसका प्रमाणीकरण किस एजेंसी ने किया है और उसकी गुणवत्ता की स्थिति क्या है। इससे बीज की प्रामाणिकता की पुष्टि तुरंत हो सकेगी।

नकली बीजों पर लगेगी रोक

अक्सर देखा गया है कि बाजार में नकली या मिलावटी बीजों की बिक्री से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। फसल खराब होने पर उनकी लागत भी डूब जाती है और आय पर भी असर पड़ता है। नई व्यवस्था में बीज की हर खेप का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा। उत्पादन से लेकर वितरण तक की चेन ऑनलाइन दर्ज रहेगी। इससे किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की आशंका कम होगी और दोषियों की पहचान आसानी से की जा सकेगी। सरकार का मानना है कि यह कदम किसानों के हितों की रक्षा में मील का पत्थर साबित होगा।

व्यापक प्रशिक्षण अभियान

नई प्रणाली को सफल बनाने के लिए प्रदेश के कृषि विभाग ने व्यापक प्रशिक्षण अभियान चलाया है। कृषि निदेशालय में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी ने किया। इस प्रशिक्षण में केंद्र सरकार और महाराष्ट्र कृषि विभाग की टीम ने भी भाग लिया। महाराष्ट्र में ‘साथी’ पोर्टल के सफल क्रियान्वयन के अनुभव साझा किए गए। वहां के अधिकारियों ने बताया कि इस प्रणाली से बीज वितरण में पारदर्शिता बढ़ी है और किसानों का भरोसा मजबूत हुआ है। प्रशिक्षण सत्र में वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञों और आईटी अधिकारियों ने पोर्टल के संचालन, डेटा अपलोड, ट्रैकिंग सिस्टम और QR कोड सत्यापन की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।

हर जनपद में बनेंगे मास्टर ट्रेनर

अपर कृषि निदेशक (बीज एवं प्रक्षेत्र) अनिल कुमार पाठक ने बताया कि बीज उत्पादक संस्थाओं, कृषक उत्पादक संगठनों (FPO) और बीज कंपनियों के प्रतिनिधियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। पहले चरण में बीज उत्पादकों और कंपनियों को प्रशिक्षण दिया गया। दूसरे चरण में थोक एवं खुदरा विक्रेताओं को प्रशिक्षित किया गया। अब ये मास्टर ट्रेनर अपने-अपने जनपदों में अन्य डीलरों और वितरकों को प्रशिक्षित करेंगे। इससे अप्रैल से नई व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने में सुविधा होगी।

70 प्रतिशत विक्रेता पहले ही पंजीकृत

अधिकारियों के अनुसार, लगभग 70 प्रतिशत बीज विक्रेता पहले ही पोर्टल पर पंजीकरण करा चुके हैं। शेष 30 प्रतिशत विक्रेताओं को 15 दिनों के भीतर पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी विक्रेता को तकनीकी समस्या आती है, तो वह संबंधित जिला कृषि अधिकारी से संपर्क कर सकता है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अप्रैल के बाद बिना पंजीकरण के बीज व्यापार करना कठिन होगा।

किसानों को क्या मिलेगा लाभ

  • प्रमाणिक बीज की पहचान: QR कोड स्कैन कर किसान बीज की असली-नकली की पुष्टि कर सकेंगे।
  • गुणवत्ता की जानकारी: उत्पादन तिथि, प्रमाणीकरण और स्रोत की जानकारी मिलेगी।
  • पारदर्शिता: वितरण प्रणाली में किसी भी स्तर पर हेरफेर की गुंजाइश कम होगी।

शिकायत निवारण में सुविधा: किसी समस्या की स्थिति में डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर त्वरित कार्रवाई संभव होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसानों का विश्वास बढ़ेगा और कृषि उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होगा।

कृषि क्षेत्र में डिजिटल बदलाव

‘साथी’ पोर्टल कृषि क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में बड़ा कदम है। बीज, जो किसी भी फसल की नींव होता है, उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम से न केवल नकली बीजों पर रोक लगेगी, बल्कि इन्वेंटरी प्रबंधन भी बेहतर होगा। इससे मांग और आपूर्ति का सटीक आकलन संभव होगा और समय पर बीज उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।

महाराष्ट्र का अनुभव बना प्रेरणा

महाराष्ट्र में ‘साथी’ पोर्टल के क्रियान्वयन के बाद सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। वहां किसानों ने बीज की गुणवत्ता में सुधार और पारदर्शिता का अनुभव किया है। प्रदेश सरकार इसी मॉडल को अपनाकर उत्तर प्रदेश में भी बीज वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करना चाहती है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण से इस प्रणाली को सफल बनाया जाएगा।

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