कबीरधाम जिले में पर्यटन विकास को नई गति देने के लिए स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत 146 करोड़ रुपए की लागत से भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन नववर्ष पर गुरुवार को किया गया। यह परियोजना जिले के ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना के भूमिपूजन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित केन्द्रीय मंत्री तोखन साहू, डिप्टी सीएम विजय शर्मा, अरुण साव, सांसद संतोष पांडे शामिल हुए। केन्द्रीय पर्यटन मंत्री शेखावत ने कहा कि आस्था स्थलों का समुचित विकास हो, दर्शन सुलभ हो और देशभर में सांस्कृतिक चेतना मजबूत हो, इसी संकल्प के साथ केन्द्र सरकार कार्य कर रही है। सीएम साय ने कहा कि भोरमदेव में पर्यटन और आस्था से जुड़े अनेक विकास कार्य किए जाएंगे। भोरमदेव एक पवित्र स्थल है, जहां अमरकंटक से जल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाता है, ऐसे आस्था केंद्रों का समुचित विकास सरकार की प्राथमिकता है। कहा कि मोदी की गारंटी का मतलब केवल घोषणा नहीं, बल्कि उसे पूरा करना है। बीते दो वर्षों में बड़ी संख्या में आवास पूरे किए गए हैं। महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना के तहत हर माह सहायता राशि दी जा रही है, वहीं रामलला दर्शन जैसी योजनाएं भी संचालित हैं। देश और प्रदेश के हर वर्ग के विकास के लिए योजनाएं लागू की जा रही हैं। आदिवासी क्षेत्रों में जनमन योजना के माध्यम से सड़क, पानी और बिजली पहुंचाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने भोरमदेव-बोड़ला सड़क निर्माण की मांग पूरी करने की भी घोषणा की। 11वीं शताब्दी में कराया गया था मंदिर निर्माण
भोरमदेव छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल है, जिसे उसकी अद्वितीय पहचान के कारण छत्तीसगढ़ का खजुराहो कहा जाता है। भोरमदेव मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में फणी नागवंशी राजा गोपालदेव के काल में हुआ माना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और नागर शैली की उत्कृष्ट स्थापत्य कला का अनुपम उदाहरण है। मंदिर की दीवारों पर देवी-देवताओं, नृत्य मुद्राओं, पशु-पक्षियों और जनजीवन से जुड़ी बारीक नक्काशी तत्कालीन कला और समाज की झलक प्रस्तुत करती है। भोरमदेव की विशेषता केवल मंदिर तक सीमित नहीं है। यह स्थल मैकल पर्वत शृंखला और घने वन क्षेत्र के बीच स्थित है। इस राशि से केवल मंदिर सौंदर्यीकरण ही नहीं, बल्कि भोरमदेव-रामचुआ-सरोदा बांध को जोड़ने वाला एक समग्र भोरमदेव कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। परियोजना के तहत भोरमदेव के इतिहास और विरासत को सहेजने के लिए वीडियो डॉक्यूमेंट्री तैयार की जाएगी। लाइट और साउंड शो के माध्यम से मंदिर की कथा और उससे जुड़े ऐतिहासिक प्रसंग दर्शाए जाएंगे। जिला पुरातत्व समिति के अनुसार लिडार सर्वे कर मंदिर की थ्री-डी डिजाइन तैयार की जाएगी, जिसे इंटरनेट पर अपलोड किया जाएगा। गूगल पर भोरमदेव सर्च करने पर थ्री-डी विजुअल दिखाई देगी।


