केंद्रीय बजट में पंजाब के लिए कुछ न देने का आरोप लगाने वाले विरोधी नेताओं को केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने करारा जवाब दिया है। बिट्टू ने कहा कि अकेले रेल मंत्रालय के आंकड़े जारी करके कहा कि बजट में पंजाब के लिए 5673 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा है। बिट्टू ने कहा कि पिछली सरकारों से अगर रेलवे की इस रकम की तुलना करें तो यह 25 गुणा से ज्यादा है। बिट्टू ने कहा इसी तरह अन्य मंत्रालयों से भी पंजाब के लिए बड़ी सौगातें दी गई हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट को जब डिटेल से पढ़ेंगे तो पंजाब के लिए बहुत कुछ मिलेगा। रेल बजट में 25 गुना की ऐतिहासिक बढ़ोतरी विपक्ष को आंकड़ों के जरिए घेरते हुए रवनीत सिंह बिट्टू ने बताया कि 2009-2014 (UPA सरकार) के दौरान पंजाब के लिए औसत वार्षिक रेल बजट मात्र 225 करोड़ रुपये था। वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इसे बढ़ाकर 5,673 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह आवंटन यूपीए की तुलना में लगभग 25 गुना अधिक है। इंफ्रास्ट्रक्चर का कायाकल्प, ₹26,382 करोड़ के प्रोजेक्ट्स रेल राज्य मंत्री ने बताया कि वर्तमान में पंजाब में कुल 26,382 करोड़ रुपये के रेलवे प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। इसमें ट्रैक निर्माण, स्टेशनों का पुनर्विकास और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं।पंजाब के स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए ‘अमृत स्टेशन योजना’ के तहत 30 स्टेशनों का पुनर्निमाण हो रहा है। स्टेशनों के आधुनिकीकरण पर 1,311 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। मुक्तसर, साहिबजादा अजीत सिंह नगर (मोहाली) और आनंदपुर साहिब स्टेशनों पर पुनर्विकास का कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। कनेक्टिविटी में सुधार, वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनें: बिट्टू ने कहा कि पंजाब में प्रीमियम ट्रेन सेवाओं का विस्तार तेजी से हुआ है। वर्तमान में पंजाब में 6 जोड़ी वंदे भारत सेवाएं संचालित हो रही हैं। आम आदमी के लिए सुविधाजनक 1 जोड़ी सेवा शुरू की गई है। नेटवर्क विस्तार और 100% इलेक्ट्रिफिकेशन: बिट्टू ने कहा कि साल 2014 के बाद से पंजाब में लगभग 400 किलोमीटर नए ट्रैक बनाए गए हैं। बिट्टू ने तुलना करते हुए कहा कि यह विस्तार फिलीपींस जैसे देश के पूरे रेल नेटवर्क से भी ज्यादा है। पंजाब ने 100% रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन का लक्ष्य हासिल कर लिया है। 2014 से अब तक 1,715 किलोमीटर रेल लाइनों का विद्युतीकरण किया गया है। राज्य में 414 फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए गए हैं ताकि रेल यात्रा सुरक्षित और बाधा रहित हो सके। साथ ही ‘कवच’ (स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली) के तहत 149 किलोमीटर का कार्य स्वीकृत किया गया है।


