केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने वर्ष 2026-27 का बजट पेश कर दिया है। इसमें उन्होंने शहरी विकास के लिए पिछली बार की तुलना में काफी कम पैसा रखा है। इसके लिए आवंटन करीब 12 फीसदी कम कर दिया गया है। गांवों के विकास पर पिछली बार से थोड़ा ज्यादा ध्यान देते हुए आवंटन करीब दो फीसदी बढ़ाया गया है।
बजट आवंटन को देख कर लगता है कि आने वाले वित्त वर्ष में सरकार का सबसे ज्यादा ज़ोर ऊर्जा सेक्टर पर रहेगा, क्योंकि इस मद में आवंटन सबसे ज्यादा, 34 प्रतिशत बढ़ाया गया है। आईटी और टेलीकॉम के लिए आवंटन में सबसे ज्यादा, 22 फीसदी की कटौती की गई है।
बजट 2026 में किस मद में कितना आवंटन किया गया है और पिछले बजट में कितना किया गया था, यह आप इस टेबल में देख सकते हैं।
| क्षेत्र (Sectors) | बजट 2025 में आवंटन (₹ करोड़) | बजट 2026 में आवंटन (₹ करोड़) | आवंटन में अंतर | अंतर % |
| परिवहन (Transport) | — | 5,98,520 | — | — |
| रक्षा (Defence) | 4,91,732 | 5,94,585 | +1,02,853 | +20.92% |
| ग्रामीण विकास (Rural Development) | 2,66,817 | 2,73,108 | +6,291 | +2.36% |
| गृह मामले (Home Affairs) | 2,33,211 | 2,55,234 | +22,023 | +9.44% |
| कृषि और संबद्ध गतिविधियाँ | 1,71,437 | 1,62,671 | -8,766 | -5.11% |
| शिक्षा (Education) | 1,28,650 | 1,39,289 | +10,639 | +8.27% |
| ऊर्जा (Energy) | 81,174 | 1,09,029 | +27,855 | +34.31% |
| स्वास्थ्य (Health) | 98,311 | 1,04,599 | +6,288 | +6.40% |
| शहरी विकास (Urban Development) | 96,777 | 85,522 | -11,255 | -11.63% |
| आईटी और दूरसंचार (IT & Telecom) | 95,298 | 74,560 | -20,738 | -21.76% |
| वाणिज्य और उद्योग | 65,553 | 70,296 | +4,743 | +7.24% |
| समाज कल्याण (Social Welfare) | 60,052 | 62,362 | +2,310 | +3.85% |
| वैज्ञानिक विभाग (Scientific Depts) | 55,679 | 55,756 | +77 | +0.14% |
| कर प्रशासन (Tax Administration) | — | 45,500 | — | — |
| विदेश मामले (External Affairs) | — | 22,119 | — | — |
| वित्त (Finance) | — | 20,649 | — | — |
| पूर्वोत्तर का विकास (DoNER) | — | 6,812 | — | — |
रक्षा बजट में भी खूब इजाफा
ऊर्जा के बाद सबसे ज्यादा (21 प्रतिशत) बढ़ोतरी रक्षा क्षेत्र में की गई है। पाकिस्तान के साथ बढ़े तनाव और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे सैन्य अभियान की वजह से रक्षा क्षेत्र में खर्च बढ़ाने की जरूरत समझी जा सकती है। भारत के पड़ोस से पैदा होने वाली सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनजर भी रक्षा क्षेत्र में ज्यादा खर्च करने की जरूरत है। वैसे रक्षा पर खर्च पिछले सात साल से लगातार बढ़ाया ही जाता रहा है। वित्त वर्ष 2021 में यह 485681 करोड़ था जो इस बजट में 594585 करोड़ हो गया है। यह सेना की ताकत बढ़ाने के साथ-साथ हथियार और साजो-सामान के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने में भी मददगार साबित होगा।
सेना पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाला पांचवा देश भारत
रक्षा बजट बढ़ाना इसलिए भी जरूरी हो जाता है, क्योंकि भारत में सेना पर खर्च भी ज्यादा है। स्टॉकहोम इंटेरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के मुताबिक 2024 में भारत ने सेना पर 86 अरब डॉलर खर्च किया। इससे ज्यादा खर्च करने वाले दुनिया में मात्र चार देश ही थे। देखिए यह चार्ट
| रैंक (2024) | देश | सेना पर 2024 में खर्च ($ अरब) |
| 1 | अमेरिका (United States) | 997 |
| 2 | चीन (China) | 314 |
| 3 | रूस (Russia) | 149 |
| 4 | जर्मनी (Germany) | 89 |
| 5 | भारत (India) | 86 |
| 6 | यूनाइटेड किंगडम (UK) | 82 |
| 7 | सऊदी अरब (Saudi Arabia) | 80 |
| 8 | यूक्रेन (Ukraine) | 65 |
| 9 | फ्रांस (France) | 65 |
| 10 | जापान (Japan) | 55 |


