बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में पिछले तीन दशकों की प्रगति अब गंभीर संकट में है। यूनिसेफ (UNICEF) समेत संयुक्त राष्ट्र – यूएन (United Nations – UN) के अन्य संगठनों की ताजा संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार अगर मौजूदा रफ्तार जारी रही, तो वर्ष 2025 से 2030 के बीच दुनिया भर में 2.73 करोड़ बच्चे अपना पांचवां जन्मदिन देखने से पहले ही दम तोड़ देंगे। इनमें से करीब 1.3 करोड़ मौतें जन्म के पहले महीने (नवजात) में होने की आशंका है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि अकेले साल 2024 में 5 साल से कम उम्र के लगभग 49 लाख बच्चों ने अपनी जान गंवाई, जिनको बेहतर चिकित्सा या सावधानी होने पर बचाया जा सकता था। इसमें से 23 लाख मौतें जन्म के पहले 28 दिनों के भीतर हुईं। एक महीने से 5 साल तक के बच्चों के लिए निमोनिया, डायरिया और मलेरिया आज भी सबसे बड़े जानलेवा कारण बने हुए हैं, जिन्हें खराब पोषण और और भी बदतर बना रहा है।
साढ़े 5 मिनट में एक मौत, नवजात शिशुओं को सबसे ज़्यादा खतरा
रिपोर्ट के अनुसार समय पूर्व जन्म और जन्म के समय सांस लेने में दिक्कत मौत का प्रमुख कारण है। साथ ही एक महीने से 5 साल तक के बच्चों के लिए निमोनिया, डायरिया और मलेरिया आज भी सबसे बड़े दुश्मन बने हुए हैं।
कुपोषण हैं ‘साइलेंट किलर’
रिपोर्ट के अनुसार अकेले 2024 में 1 लाख से ज़्यादा बच्चों की मौत सीधे तौर पर गंभीर कुपोषण के कारण हुई। तमाम प्रगति के बाद भी इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की मौतों कुपोषण से होना चिंता का कारण बना हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक होने वाली इन अधिकांश मौतों का रोका जा सकता है। टीके, बेहतर पोषण और बुनियादी मातृत्व देखभाल जैसे संसाधन मौजूद हैं, लेकिन वो सबसे कमजोर आबादी तक नहीं पहुंच रहे हैं, जो चिंता का विषय है।
अब ज़रूरत सिर्फ…
जलवायु परिवर्तन, बढ़ते संघर्ष और फंडिंग की कमी इस संकट को और गहरा कर रही है। अब ज़रूरत सिर्फ ‘राजनीतिक इच्छाशक्ति’ और निवेश की है। अगर ऐसा कर लिया गया, तो बच्चों को बचाया जा सकेगा। नहीं तो बड़ी संख्या में मासूमों की जान खतरे में पड़ जाएगी।


