नालंदा में शैक्षणिक सत्र 2026-27 में पहली कक्षा में नामांकन के लिए रैंडमाइजेशन विधि के जरिए 2218 बच्चों को स्कूलों का आवंटन कर दिया गया। जिले के निबंधित निजी विद्यालयों में 25 फीसदी सीटें कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं, जिन पर दाखिले के लिए शिक्षा विभाग ने ज्ञानदीप पोर्टल पर 15 फरवरी तक ऑनलाइन आवेदन मांगे थे। इस अवधि में जिले भर से कुल 2351 बच्चों ने पहली कक्षा में नामांकन के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी, जिनमें से पारदर्शी प्रक्रिया के बाद सोमवार को 2218 बच्चों की लॉटरी निकल गई है। चयनित हुए इन सभी छात्र-छात्राओं का अब 24 फरवरी से लेकर 10 मार्च तक उनके आवंटित स्कूलों में दाखिला सुनिश्चित किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के बीच एक बड़ी लापरवाही और निजी स्कूलों की मनमानी भी खुलकर सामने आई है। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में कुल 801 निजी विद्यालय मान्यता प्राप्त (निबंधित) हैं। लेकिन, इनमें से दर्जनों विद्यालयों ने गरीब बच्चों को मुफ्त पढ़ाने की जिम्मेदारी से बचने के लिए ज्ञानदीप पोर्टल पर अपनी नामांकन क्षमता ही अपलोड नहीं की। शिक्षा विभाग द्वारा कई माध्यमों से अपील किए जाने के बावजूद इन स्कूल संचालकों ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। क्षमता अपलोड न होने के कारण इन स्कूलों में शिक्षा के अधिकार के तहत गरीब बच्चों का नामांकन नहीं हो सकेगा, जो सीधे तौर पर नियमों की अनदेखी है। विभाग कार्रवाई के मूड में इस मनमानी को लेकर शिक्षा विभाग अब सख्त कार्रवाई के मूड में है। समग्र शिक्षा के डीपीओ मो. शाहनवाज ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जिन निबंधित निजी स्कूलों ने पोर्टल पर अपनी नामांकन क्षमता अपलोड नहीं की है, उनकी अब स्थलीय (भौतिक) जांच कराई जाएगी। जांच में कोताही पाए जाने पर ऐसे स्कूलों की प्रस्वीकृति यानी मान्यता रद्द करने के लिए वरीय अधिकारियों से सख्त अनुशंसा की जाएगी। विभागीय छानबीन में एक और चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि आरटीई के तहत बच्चों के नामांकन के लिए क्षमता अपलोड न करने वाले कई विद्यालय ऐसे हैं, जो शिक्षा विभाग के कागजों में तो निबंधित हैं, लेकिन धरातल पर उनका कोई अता-पता ही नहीं है। शिक्षा विभाग के सूत्रों की मानें तो जिले में ऐसे ‘कागजी’ विद्यालयों की संख्या 50 से 70 के बीच हो सकती है, जिन पर अब विभाग का डंडा चलना तय माना जा रहा है। विभाग भुगतान करेगी आरटीई के तहत निजी स्कूलों में दाखिला पाने वाले बच्चों को सरकार की तरफ से कई अहम सुविधाएं दी जाती हैं। इन स्कूलों में नामांकित बच्चों की पढ़ाई का शुल्क, उनकी पोशाक और पाठ्यपुस्तकों की राशि की प्रतिपूर्ति सरकार द्वारा की जाती है। स्कूल प्रबंधन द्वारा ज्ञानदीप पोर्टल पर बच्चों के इन खर्चों की इंट्री की जाती है, जिसके आधार पर विभाग सीधे राशि का भुगतान करता है। इस पूरी प्रक्रिया पर जिला शिक्षा पदाधिकारी आनंद विजय ने बताया कि आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में पहली कक्षा में नामांकन की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है। ज्ञानदीप पोर्टल पर आवेदन करने वाले पात्र छात्रों को स्कूल आवंटित कर दिए गए हैं और अब तय समय सीमा के भीतर बच्चों का उनके आवंटित स्कूलों में नामांकन कराने की प्रक्रिया शुरू करा दी जाएगी। नालंदा में शैक्षणिक सत्र 2026-27 में पहली कक्षा में नामांकन के लिए रैंडमाइजेशन विधि के जरिए 2218 बच्चों को स्कूलों का आवंटन कर दिया गया। जिले के निबंधित निजी विद्यालयों में 25 फीसदी सीटें कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं, जिन पर दाखिले के लिए शिक्षा विभाग ने ज्ञानदीप पोर्टल पर 15 फरवरी तक ऑनलाइन आवेदन मांगे थे। इस अवधि में जिले भर से कुल 2351 बच्चों ने पहली कक्षा में नामांकन के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी, जिनमें से पारदर्शी प्रक्रिया के बाद सोमवार को 2218 बच्चों की लॉटरी निकल गई है। चयनित हुए इन सभी छात्र-छात्राओं का अब 24 फरवरी से लेकर 10 मार्च तक उनके आवंटित स्कूलों में दाखिला सुनिश्चित किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के बीच एक बड़ी लापरवाही और निजी स्कूलों की मनमानी भी खुलकर सामने आई है। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में कुल 801 निजी विद्यालय मान्यता प्राप्त (निबंधित) हैं। लेकिन, इनमें से दर्जनों विद्यालयों ने गरीब बच्चों को मुफ्त पढ़ाने की जिम्मेदारी से बचने के लिए ज्ञानदीप पोर्टल पर अपनी नामांकन क्षमता ही अपलोड नहीं की। शिक्षा विभाग द्वारा कई माध्यमों से अपील किए जाने के बावजूद इन स्कूल संचालकों ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। क्षमता अपलोड न होने के कारण इन स्कूलों में शिक्षा के अधिकार के तहत गरीब बच्चों का नामांकन नहीं हो सकेगा, जो सीधे तौर पर नियमों की अनदेखी है। विभाग कार्रवाई के मूड में इस मनमानी को लेकर शिक्षा विभाग अब सख्त कार्रवाई के मूड में है। समग्र शिक्षा के डीपीओ मो. शाहनवाज ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जिन निबंधित निजी स्कूलों ने पोर्टल पर अपनी नामांकन क्षमता अपलोड नहीं की है, उनकी अब स्थलीय (भौतिक) जांच कराई जाएगी। जांच में कोताही पाए जाने पर ऐसे स्कूलों की प्रस्वीकृति यानी मान्यता रद्द करने के लिए वरीय अधिकारियों से सख्त अनुशंसा की जाएगी। विभागीय छानबीन में एक और चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि आरटीई के तहत बच्चों के नामांकन के लिए क्षमता अपलोड न करने वाले कई विद्यालय ऐसे हैं, जो शिक्षा विभाग के कागजों में तो निबंधित हैं, लेकिन धरातल पर उनका कोई अता-पता ही नहीं है। शिक्षा विभाग के सूत्रों की मानें तो जिले में ऐसे ‘कागजी’ विद्यालयों की संख्या 50 से 70 के बीच हो सकती है, जिन पर अब विभाग का डंडा चलना तय माना जा रहा है। विभाग भुगतान करेगी आरटीई के तहत निजी स्कूलों में दाखिला पाने वाले बच्चों को सरकार की तरफ से कई अहम सुविधाएं दी जाती हैं। इन स्कूलों में नामांकित बच्चों की पढ़ाई का शुल्क, उनकी पोशाक और पाठ्यपुस्तकों की राशि की प्रतिपूर्ति सरकार द्वारा की जाती है। स्कूल प्रबंधन द्वारा ज्ञानदीप पोर्टल पर बच्चों के इन खर्चों की इंट्री की जाती है, जिसके आधार पर विभाग सीधे राशि का भुगतान करता है। इस पूरी प्रक्रिया पर जिला शिक्षा पदाधिकारी आनंद विजय ने बताया कि आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में पहली कक्षा में नामांकन की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है। ज्ञानदीप पोर्टल पर आवेदन करने वाले पात्र छात्रों को स्कूल आवंटित कर दिए गए हैं और अब तय समय सीमा के भीतर बच्चों का उनके आवंटित स्कूलों में नामांकन कराने की प्रक्रिया शुरू करा दी जाएगी।


