उमरिया जिले के सुंदर दादर और कल्दा गांवों के बीच नदी पर बन रहा पुल पिछले तीन वर्षों से अधूरा है। ठेकेदार ने सिर्फ एक पिलर खड़ा कर काम बंद कर दिया। इससे करीब 15 गांवों के ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सेतु निगम ने अब ठेका निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह पुल निर्माण कार्य शुरू होने के बाद से ही धीमी गति से चल रहा था। ठेकेदार ने परियोजना का एक पिलर ही खड़ा किया और उसके बाद से निर्माण पूरी तरह ठप पड़ा है। इस लापरवाही के कारण परियोजना अपने निर्धारित समय से काफी पीछे चल रही है। यह पुल उमरिया के साथ-साथ शहडोल और डिंडोरी जिलों से सीधा संपर्क स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता। निर्माण कार्य रुकने से ग्रामीणों को या तो जोखिम भरे तरीके से नदी के पानी से होकर गुजरना पड़ता है या फिर 50 से 60 किलोमीटर का लंबा वैकल्पिक रास्ता तय करना पड़ता है, जिससे उनका समय और धन दोनों बर्बाद होते हैं। ग्रामीण दिनेश यादव ने बताया कि सामान्य दिनों में भी नदी पार करना जोखिम भरा होता है और बारिश के मौसम में पानी बढ़ने पर आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है। पुल निर्माण की मांग कल्दा गांव के सरपंच ज्ञान सिंह परस्ते ने भी तीन वर्षों से पुल का काम अधूरा होने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण जल्द से जल्द पुल निर्माण पूरा कराने की मांग कर रहे हैं ताकि उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हो सके। उच्च अधिकारियों को पत्र भेजा इस संबंध में सेतु निगम के अनुविभागीय अधिकारी प्रदीप पटेल ने बताया कि उन्होंने स्वयं मौके का निरीक्षण किया है। उन्होंने पुष्टि की कि ठेकेदार ने केवल एक पिलर खड़ा कर कार्य बंद कर दिया है। ठेकेदार की कार्य करने की मंशा स्पष्ट न होने के कारण ठेका निरस्त करने की कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र भेजा गया है।


