देशभर में जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स और लोगों का यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर विरोध तेज हो गया है। भाजपा और RSS समर्थक भी खुलकर मोदी सरकार की आलोचना कर रहे हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि किसी को भी इसका गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं होगा। किसी के भी साथ अत्याचार या भेदभाव नहीं होगा। हालांकि, प्रधान जो बातें बोल रहे हैं उसका नए नियम में जिक्र नहीं है। बिहार-UP में बढ़ते विरोध के बीच 7 दिन पहले बने भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन की चुनौतियां बढ़ गई है। या यूं कहे नितिन नवीन की पहली परीक्षा UGC का नया नियम ही है। इन सबकी चर्चा आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। UGC का नया नियम क्या है? UGC ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था। इसका नाम है- ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026।’ इसके तहत कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने के निर्देश दिए हैं। ये टीमें खासतौर पर SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखेंगी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं। आंकड़ों में…क्या कैंपस में OBC-SC/ST के साथ भेदभाव हो रहा? UGC ने नया ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026’ नियम जारी करते हुए बताया कि बीते 5 सालों में कैंपस के अंदर जाति-आधारित भेदभाव की शिकायतें बढ़ी हैं। 2019-20 में 173 शिकायतें मिली थी, जबकि 2023-24 में 378 शिकायतें मिली। मतलब 118.4% बढ़ोत्तरी। AISHE (All India Survey on Higher Education) 2021-22 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में कुल 12,002 कॉलेज-यूनिवर्सिटी में करीब 4.33 करोड़ स्टूडेंट्स हैं। जातीय भेदभाव की शिकायतें मिली 378। मतलब सिर्फ 0.00087%। यानी एक फीसदी से भी बहुत कम। 4 पॉइंट में नितिन नवीन की पहली परीक्षा… 1. पार्टी समर्थकों की बढ़ती नाराजगी दूर करना UGC के नए नियम से जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स और लोग नाराज हैं। वह विरोध कर रहे हैं। खास बात है कि इसमें भाजपा समर्थक खुलकर विरोध में शामिल हो गए हैं। कुछ युवकों ने तो PM मोदी को अनफॉलो भी कर दिया है। बिहार में तो नहीं, लेकिन उत्तर प्रदेश में कई BJP नेता और कार्यकर्ता इस्तीफा दे चुके हैं, जैसे नोएडा युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष और लखनऊ यूनिट से 10 पदाधिकारी। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने भी UGC नीतियों से असहमति जताकर इस्तीफा दिया। 2. बिहार-UP-बंगाल में वोट बैंक को रोकना मुश्किल पॉलिटिकल एनालिस्ट अरविंद मोहन कहते हैं, ‘सवर्ण समाज BJP का मजबूत आधार वोटर है। अब तक यह ऐसा वर्ग रहा है जो आंख बंद कर भाजपा को वोट करता है। बहुत सारी चीजों को इग्नोर कर देता है। लेकिन इस बार उसकी UGC के नए नियम को लेकर बढ़ रही है।’ बिहारः सवर्ण भाजपा के कोर वोटर बिहार जातीय गणना-2022 के मुताबिक, राज्य में इनकी आबादी 10.56% है। एक्सपर्ट के मुताबिक, संख्या भले कम है, लेकिन जमीनी स्तर पर सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों के कारण इनका दबदबा है। चुनाव जीतने-जिताने में इनकी अहम भूमिका होती है। उत्तर प्रदेशः 4 बार से ब्राह्मण तय कर रहे सत्ता CSDS-लोकनीति के अनुमानित आंकड़े के मुताबिक, UP में ब्राह्मणों की आबादी 9% से 11% के बीच मानी जाती है। OBC 45% से 50%, अनुसूचित जाति 21% से 22%, अनुसूचित जाति 19% से 20%, राजपूत 7% से 8%, वैश्य 3% से 4% और अन्य 2% से 3% हैं। बीते 4 विधानसभा चुनाव के आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि जिधर सवर्ण समाज खासकर ब्राह्मण गया है, उसकी सरकार बनी है। पश्चिम बंगालः फॉरवर्ड कार्ड फेल हो सकता है भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन कायस्थ समाज से आते हैं। उनके समाज की बंगाल में आबादी करीब 3% है। हालांकि, हार-जीत में बड़ी भूमिका निभाते हैं। पश्चिम बंगाल में 37 साल कायस्थ मुख्यमंत्री (कांग्रेस के विधानचंद्र राय 14 साल और CPM के ज्योति बसु 23 साल) रहे हैं। नितिन नवीन की भाजपा अध्यक्ष पद पर नियुक्ति को बंगाल की राजनीति से जोड़कर देखा गया था। 3. हिन्दुत्व की राजनीति कमजोर पड़ेगी सीनियर जर्नलिस्ट अभिरंजन कुमार कहते हैं, ‘भाजपा हिन्दुत्व की राजनीति करती रही है। वह हिन्दू समाज को जातियों से ऊपर उठाकर एकजुट करने पर फोकस करती है, लेकिन इस नियम से ‘कास्ट आइडेंटिटी’ संस्थागत रूप से मजबूत होगी।’ 4. पार्टी के सुधारवादी एजेंडे को झटका देशभर में जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स और लोगों का यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर विरोध तेज हो गया है। भाजपा और RSS समर्थक भी खुलकर मोदी सरकार की आलोचना कर रहे हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि किसी को भी इसका गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं होगा। किसी के भी साथ अत्याचार या भेदभाव नहीं होगा। हालांकि, प्रधान जो बातें बोल रहे हैं उसका नए नियम में जिक्र नहीं है। बिहार-UP में बढ़ते विरोध के बीच 7 दिन पहले बने भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन की चुनौतियां बढ़ गई है। या यूं कहे नितिन नवीन की पहली परीक्षा UGC का नया नियम ही है। इन सबकी चर्चा आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। UGC का नया नियम क्या है? UGC ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था। इसका नाम है- ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026।’ इसके तहत कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने के निर्देश दिए हैं। ये टीमें खासतौर पर SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखेंगी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं। आंकड़ों में…क्या कैंपस में OBC-SC/ST के साथ भेदभाव हो रहा? UGC ने नया ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026’ नियम जारी करते हुए बताया कि बीते 5 सालों में कैंपस के अंदर जाति-आधारित भेदभाव की शिकायतें बढ़ी हैं। 2019-20 में 173 शिकायतें मिली थी, जबकि 2023-24 में 378 शिकायतें मिली। मतलब 118.4% बढ़ोत्तरी। AISHE (All India Survey on Higher Education) 2021-22 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में कुल 12,002 कॉलेज-यूनिवर्सिटी में करीब 4.33 करोड़ स्टूडेंट्स हैं। जातीय भेदभाव की शिकायतें मिली 378। मतलब सिर्फ 0.00087%। यानी एक फीसदी से भी बहुत कम। 4 पॉइंट में नितिन नवीन की पहली परीक्षा… 1. पार्टी समर्थकों की बढ़ती नाराजगी दूर करना UGC के नए नियम से जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स और लोग नाराज हैं। वह विरोध कर रहे हैं। खास बात है कि इसमें भाजपा समर्थक खुलकर विरोध में शामिल हो गए हैं। कुछ युवकों ने तो PM मोदी को अनफॉलो भी कर दिया है। बिहार में तो नहीं, लेकिन उत्तर प्रदेश में कई BJP नेता और कार्यकर्ता इस्तीफा दे चुके हैं, जैसे नोएडा युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष और लखनऊ यूनिट से 10 पदाधिकारी। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने भी UGC नीतियों से असहमति जताकर इस्तीफा दिया। 2. बिहार-UP-बंगाल में वोट बैंक को रोकना मुश्किल पॉलिटिकल एनालिस्ट अरविंद मोहन कहते हैं, ‘सवर्ण समाज BJP का मजबूत आधार वोटर है। अब तक यह ऐसा वर्ग रहा है जो आंख बंद कर भाजपा को वोट करता है। बहुत सारी चीजों को इग्नोर कर देता है। लेकिन इस बार उसकी UGC के नए नियम को लेकर बढ़ रही है।’ बिहारः सवर्ण भाजपा के कोर वोटर बिहार जातीय गणना-2022 के मुताबिक, राज्य में इनकी आबादी 10.56% है। एक्सपर्ट के मुताबिक, संख्या भले कम है, लेकिन जमीनी स्तर पर सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों के कारण इनका दबदबा है। चुनाव जीतने-जिताने में इनकी अहम भूमिका होती है। उत्तर प्रदेशः 4 बार से ब्राह्मण तय कर रहे सत्ता CSDS-लोकनीति के अनुमानित आंकड़े के मुताबिक, UP में ब्राह्मणों की आबादी 9% से 11% के बीच मानी जाती है। OBC 45% से 50%, अनुसूचित जाति 21% से 22%, अनुसूचित जाति 19% से 20%, राजपूत 7% से 8%, वैश्य 3% से 4% और अन्य 2% से 3% हैं। बीते 4 विधानसभा चुनाव के आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि जिधर सवर्ण समाज खासकर ब्राह्मण गया है, उसकी सरकार बनी है। पश्चिम बंगालः फॉरवर्ड कार्ड फेल हो सकता है भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन कायस्थ समाज से आते हैं। उनके समाज की बंगाल में आबादी करीब 3% है। हालांकि, हार-जीत में बड़ी भूमिका निभाते हैं। पश्चिम बंगाल में 37 साल कायस्थ मुख्यमंत्री (कांग्रेस के विधानचंद्र राय 14 साल और CPM के ज्योति बसु 23 साल) रहे हैं। नितिन नवीन की भाजपा अध्यक्ष पद पर नियुक्ति को बंगाल की राजनीति से जोड़कर देखा गया था। 3. हिन्दुत्व की राजनीति कमजोर पड़ेगी सीनियर जर्नलिस्ट अभिरंजन कुमार कहते हैं, ‘भाजपा हिन्दुत्व की राजनीति करती रही है। वह हिन्दू समाज को जातियों से ऊपर उठाकर एकजुट करने पर फोकस करती है, लेकिन इस नियम से ‘कास्ट आइडेंटिटी’ संस्थागत रूप से मजबूत होगी।’ 4. पार्टी के सुधारवादी एजेंडे को झटका


