UGC Rules Update : राजस्थान में सुप्रीम कोर्ट के ‘स्टे’ पर विभिन्न संगठन ने जताई खुशी, 1 फरवरी को करेंगे जयपुर में सभा

UGC Rules Update : राजस्थान में सुप्रीम कोर्ट के ‘स्टे’ पर विभिन्न संगठन ने जताई खुशी, 1 फरवरी को करेंगे जयपुर में सभा

UGC Rules Update : भारत सरकार की ओर से हाल ही लागू किए यूजीसी के नए नियमों के विरोध में विभिन्न संगठनों की ओर से रविवार को शहीद स्मारक पर दोपहर 12 बजे सभा का आयोजन किया जाएगा। स्टेच्यू सर्कल स्थित एक होटल में आयोजित बैठक में महासभा के संस्थापक सुनील उदेईया ने आरोप लगाया कि यह कानून देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त करने, विद्यार्थियों में जातिगत भेदभाव भड़काने और एकपक्षीय कार्रवाई को बढ़ावा देता है।

करणी सेना के प्रमुख महिपाल मकराना ने कहा कि यह सभा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा के मंदिरों को जातिवाद से बचाने का संकल्प है। इस दौरान परशुराम सेना के अध्यक्ष अनिल चतुर्वेदी, अग्रवाल समाज के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश भाड़ेवाला और वैश्य सेना के अध्यक्ष राजेंद्र मित्तल समेत अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया।

राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

इधर, यूजीसी अधिनियम 2026 के विरोध में राजस्थान ब्राह्मण महासभा के परामर्शदाता तथा पूर्व शिक्षा मंत्री शैलेंद्र जोशी के नेतृत्व में राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन राज्यपाल को सौंपा गया। जोशी ने बताया कि इस अधिनियम के लागू होने से शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक समरसता में कमी आएगी और इसके दुरुपयोग की आशंका है।

ऐसे में केंद्र सरकार से इस कानून को वापस लेने का आग्रह किया गया है। इस दौरान राजस्थान ब्राह्मण महासभा के संरक्षक एस.डी. शर्मा, अध्यक्ष आर.एस. जैमिनी समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

सुप्रीम कोर्ट के ‘स्टे’ का स्वागत

जयपुर में गुरुवार को विभिन्न सामाजिक संगठनों की संयुक्त बैठक राजपूत सभा अध्यक्ष राम सिंह चंदलाई की अध्यक्षता में हुई। यह बैठक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से हाल ही जारी ‘समानता प्रोत्साहन विनियम 2026’ के विरोध में बुलाई गई थी।

बैठक के दौरान ही सुप्रीम कोर्ट की ओर से इन विवादित प्रावधानों पर अंतरिम रोक (स्टे) लगाए जाने की सूचना मिलते ही उपस्थित सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने इसका स्वागत किया, लेकिन पूर्ण समाधान होने तक अपनी रणनीति जारी रखने का संकल्प लिया।

विभिन्न संगठनों के अध्यक्षों ने कहा, हम प्रतिभाओं के हनन और कैंपस में विभाजनकारी नीतियों को बर्दाश्त नहीं करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने जो रोक लगाई है, वह इस बात का प्रमाण है कि ये नियम संवैधानिक रूप से त्रुटिपूर्ण हैं। यदि हमारी मांगों को अनसुना किया तो राजस्थान की सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन जारी रहेगा।

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