UGC विवाद में नया अपडेट सामने आ गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने इसपर असहमति जताते हुए इस नियम पर रोक लगा दी। ही सुप्रीम कोर्ट ने UGC और केंद्र सरकार को नोटिस भेजकर जवाब भी मांगा है। इस मामले से इतर देश के विश्वविद्यालयों और छात्रों के लिए UGC ने गंभीर चेतावनी जारी की है। नौकरी और लेखन के नाम पर कुछ विदेशी संस्थाएं भारत से संवेदनशील जानकारियां जुटा रही हैं। इस बारे में मिले इनपुट के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने सभी शैक्षिक संस्थानों को सतर्क रहने को कहा है। यूजीसी ने देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को पत्र भेजकर साफ किया है कि कुछ विदेशी एजेंसियां जॉब ऑफर और लेख लिखवाने के बहाने छात्रों और पेशेवरों को निशाना बना रही हैं।
UGC: जान लें डिटेल्स
दरअसल, ये संस्थाएं भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा से जुड़े प्रतिष्ठानों, अहम बुनियादी ढांचे और सरकारी कामकाज जैसी संवेदनशील बातों पर लेख लिखने का काम देती हैं। इसके लिए लिंक्डइन, नौकरी डॉट कॉम जैसे जॉब पोर्टल का इस्तेमाल किया जा रहा है। खास तौर पर पत्रकारिता और रक्षा क्षेत्र में अनुभव रखने वाले लोगों को चुना जाता है और उन्हें फ्रीलांस या रिसर्च वर्क के नाम पर जोड़ा जाता है। UGC के अनुसार, लेखन के बदले भुगतान कभी भारतीय खातों में तो कभी विदेश से ट्रांसफर किया जाता है। कुछ मामलों में छात्रों के बैंक खातों और साइबर ठगी से जुड़े पैसों का भी इस्तेमाल होने की बात सामने आई है। यही नहीं, ये संस्थाएं अपनी असली पहचान छुपाकर खुद को किसी दूसरे देश की कंसल्टेंसी फर्म का प्रतिनिधि बताती हैं।
UGC: यूजीसी की नसीहत
सबसे चिंता की बात यह है कि रक्षा पृष्ठभूमि से जुड़े आवेदकों से पैन कार्ड, आधार कार्ड जैसे अहम डाक्यूमेंट्स भी मांगे जा रहे हैं। इन जानकारियों का भविष्य में किस तरह दुरुपयोग हो सकता है, इसका अंदाजा अभी किसी के पास नहीं है। यूजीसी ने शिक्षकों और छात्रों से अपील की है कि वे इस तरह के ऑफर से सावधान रहें। किसी भी अनजान संस्था या व्यक्ति के साथ संवेदनशील विषयों पर काम करने से पहले उसकी पूरी जांच-पड़ताल करें। अगर कोई ऑफर संदिग्ध लगे, तो उसे नजरअंदाज करें और संस्थान को इसकी जानकारी दें।


