UDH मंत्री बोले-चुनाव के लिए सितंबर तक काम पूरा होगा:108 निकायों का सीमांकन बाकी, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है- जिसे चुनाव करवाने हैं वो हाईकोर्ट जाएं

UDH मंत्री बोले-चुनाव के लिए सितंबर तक काम पूरा होगा:108 निकायों का सीमांकन बाकी, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है- जिसे चुनाव करवाने हैं वो हाईकोर्ट जाएं

सीकर में UDH राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा- निकाय चुनाव के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जिस किसी को भी तकलीफ हो, वह राजस्थान हाईकोर्ट जाए। सरकार की तरफ से कोई भी ऐसा काम बकाया नहीं है, जो चुनाव करवाने में किसी तरह की बाधा हो। हमें जो भी पुनर्गठन का काम करना था, वह हमने कर लिया। खर्रा ने कहा- नगर निकाय के मामले में हम सितंबर तक काम पूरा कर लेंगे। हमारी 3 नगर पालिकाओं को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में 4 याचिका लगी थी। उसमें हाईकोर्ट ने यह निर्णय दिया था कि जिनका सीमा विस्तार नहीं हुआ, उनका पुनर्गठन कायदे से नहीं होना चाहिए। UDH राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा शुक्रवार को सीकर के अर्बन हाट में शेखावाटी पंच गौरव राजसखी उद्योग मेले के शुभारंभ के मौके पर बोल रहे थे। राजस्थान में 108 ऐसे नगर निकाय का सीमा विस्तार नहीं हुआ UDH राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा- इस निर्णय के बाद राजस्थान के 108 ऐसे नगर निकाय थे, जिनका सीमा विस्तार नहीं हुआ था। इसके लिए राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की थी। अभी 6 मार्च को राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान नगर पालिका अधिनियम की धारा 10 को यह मानते हुए कि राज्य सरकार जब चाहे, तब नगर निकाय का परिसीमन और वार्डों का पुनर्गठन करने में सक्षम है। इसलिए राज्य सरकार के स्तर पर जो भी काम हुआ है, वह पूरी तरह से लीगल है। अब काम है राज्य पिछड़ा आयोग और राजस्थान निर्वाचन आयोग का, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का वर्ष 2022 और 2023 मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र के मामलों में एक निर्णय है कि जब तक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ट्रिपल टेस्ट के माध्यम से सर्वे करके अधिकृत आंकड़े राज्य सरकार को नहीं देगा, तब तक राज्य पिछड़ा आयोग को आरक्षण नहीं दे सकते। राजस्थान सरकार ने सत्ता में आने के बाद इस संबंध में आयोग का गठन किया था। आयोग ने अंतिम रूप से कहा था कि हम मार्च तक आंकड़े उपलब्ध करवा देंगे। अब राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का कहना है कि जिलों से जो आंकड़े मिले हैं, उनमें बहुत सारी कमियां हैं। इसलिए नए सिरे से सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप उनका सर्वे करना पड़ेगा और अध्ययन करना पड़ेगा। उसके बाद ही अधिकृत आंकड़े प्रस्तुत होंगे।

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