चाईबासा में जंगली हाथी का आतंक जारी है। बीती देर रात नोवामुंडी प्रखंड के जेटिया पंचायत अंतर्गत भरबरिया गांव में हाथी ने 6 लोगों को कुचलकर मार डाला। दो लोग गंभीर रूप से घायल हैं। बीते 7 दिनों में हाथी इस क्षेत्र में कुल 16 लोगों की जान ले चुका है। मंगलवार की रात हुई घटना में मृतकों में सनातन मेराल, उनकी पत्नी जोंकों कुई, उनके दो बच्चे और दूसरे परिवार के दो सदस्य शामिल हैं। यह घटना रात करीब 10 बजे हुई, जब सभी सो रहे थे। अचानक हाथी ने घर पर हमला कर दिया। इस हमले में एक बच्चा किसी तरह अपनी जान बचाकर भागने में सफल रहा। हाथी बहुत तेजी से अपनी लोकेशन बदल रहा: डीएफओ चाईबासा के डीएफओ आदित्य नारायण ने हाथी बहुत तेजी से अपनी लोकेशन बदल रहा है, जिससे उसे लगातार ट्रेस कर पाना वन टीमों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल से विशेषज्ञ टीम को बुलाया गया है, जो हाथी को ट्रेंकुलाइज कर काबू में लेने की प्रक्रिया में मदद करेगी। इसके साथ ही वन्यजीव संरक्षण संगठन ‘वनतारा’ की टीम से भी संपर्क किया गया है और उनके आने के बाद आगे की कार्रवाई तेज की जाएगी। डीएफओ आदित्य नारायण ने बताया कि वन विभाग की पूरी टीम प्रभावित इलाकों में लगातार भ्रमण कर रही है, ड्रोन और अन्य संसाधनों की मदद से हाथी की मूवमेंट पर निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी नए गांव में नुकसान होने से पहले अलर्ट जारी किया जा सके। दिनभर जंगल में छिपकर रहता है हाथी सरकार और प्रशासन के लिए सिर दर्द बना हाथी दिनभर जंगल में छिपकर रहता है। अंधेरा होते ही वह गांवों की ओर मूव करता है। इस दौरान रास्ते में दिखने वाले घरों पर अटैक करता है। सोते हुए लोगों को भी हाथी पटक कर और घसीटकर मार रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हाथी के दो लंबे दांत हैं। अब थर्मल सेंसर ड्रोन से चौकसी होगी वन विभाग की तकनीकी टीम अब हाथी का पता लगाने के लिए रात को थर्मल सेंसर ड्रोन उड़ाएगी। देर शाम को तकनीकी टीम पहुंच गई है। वहीं, पश्चिम बंगाल से हाथी भगाने पहुंची टीम कोल्हान के संतरा वन क्षेत्र के कंपार्टमेंट नंबर 6 में मूव करेगी। इन 3 कारणों से आक्रामक हो जाता है हाथी दलमा वन क्षेत्र के वन्य प्राणी रिसर्चर व विशेषज्ञ राजा घोष के अनुसार, हाथियों के आक्रामक होने के 3 कारण हैं। नर हाथियों में हार्मोनल अवस्था आती है, जिसे ‘मस्त’ कहते हैं। इस दौरान शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर 60 गुना तक बढ़ जाता है। हाथी के कनपटी से गाढ़ा गंधयुक्त तरल पदार्थ निकलता है, जिसे मद कहा जाता है। इससे वह अत्यधिक आक्रामक हो जाता है। कई बार नर हाथी को उसकी हरकतों के कारण हथिनी समूह से अलग कर देती है। इससे वह चिड़चिड़ा हो जाता है। हाथियों के हैबिटेट्स रूट पर गांवों से निकलकर लोग जंगली इलाकों में बसने लगे हैं। इससे हाथी गुस्सैल होकर हमला कर देता है। चाईबासा में जंगली हाथी का आतंक जारी है। बीती देर रात नोवामुंडी प्रखंड के जेटिया पंचायत अंतर्गत भरबरिया गांव में हाथी ने 6 लोगों को कुचलकर मार डाला। दो लोग गंभीर रूप से घायल हैं। बीते 7 दिनों में हाथी इस क्षेत्र में कुल 16 लोगों की जान ले चुका है। मंगलवार की रात हुई घटना में मृतकों में सनातन मेराल, उनकी पत्नी जोंकों कुई, उनके दो बच्चे और दूसरे परिवार के दो सदस्य शामिल हैं। यह घटना रात करीब 10 बजे हुई, जब सभी सो रहे थे। अचानक हाथी ने घर पर हमला कर दिया। इस हमले में एक बच्चा किसी तरह अपनी जान बचाकर भागने में सफल रहा। हाथी बहुत तेजी से अपनी लोकेशन बदल रहा: डीएफओ चाईबासा के डीएफओ आदित्य नारायण ने हाथी बहुत तेजी से अपनी लोकेशन बदल रहा है, जिससे उसे लगातार ट्रेस कर पाना वन टीमों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल से विशेषज्ञ टीम को बुलाया गया है, जो हाथी को ट्रेंकुलाइज कर काबू में लेने की प्रक्रिया में मदद करेगी। इसके साथ ही वन्यजीव संरक्षण संगठन ‘वनतारा’ की टीम से भी संपर्क किया गया है और उनके आने के बाद आगे की कार्रवाई तेज की जाएगी। डीएफओ आदित्य नारायण ने बताया कि वन विभाग की पूरी टीम प्रभावित इलाकों में लगातार भ्रमण कर रही है, ड्रोन और अन्य संसाधनों की मदद से हाथी की मूवमेंट पर निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी नए गांव में नुकसान होने से पहले अलर्ट जारी किया जा सके। दिनभर जंगल में छिपकर रहता है हाथी सरकार और प्रशासन के लिए सिर दर्द बना हाथी दिनभर जंगल में छिपकर रहता है। अंधेरा होते ही वह गांवों की ओर मूव करता है। इस दौरान रास्ते में दिखने वाले घरों पर अटैक करता है। सोते हुए लोगों को भी हाथी पटक कर और घसीटकर मार रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हाथी के दो लंबे दांत हैं। अब थर्मल सेंसर ड्रोन से चौकसी होगी वन विभाग की तकनीकी टीम अब हाथी का पता लगाने के लिए रात को थर्मल सेंसर ड्रोन उड़ाएगी। देर शाम को तकनीकी टीम पहुंच गई है। वहीं, पश्चिम बंगाल से हाथी भगाने पहुंची टीम कोल्हान के संतरा वन क्षेत्र के कंपार्टमेंट नंबर 6 में मूव करेगी। इन 3 कारणों से आक्रामक हो जाता है हाथी दलमा वन क्षेत्र के वन्य प्राणी रिसर्चर व विशेषज्ञ राजा घोष के अनुसार, हाथियों के आक्रामक होने के 3 कारण हैं। नर हाथियों में हार्मोनल अवस्था आती है, जिसे ‘मस्त’ कहते हैं। इस दौरान शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर 60 गुना तक बढ़ जाता है। हाथी के कनपटी से गाढ़ा गंधयुक्त तरल पदार्थ निकलता है, जिसे मद कहा जाता है। इससे वह अत्यधिक आक्रामक हो जाता है। कई बार नर हाथी को उसकी हरकतों के कारण हथिनी समूह से अलग कर देती है। इससे वह चिड़चिड़ा हो जाता है। हाथियों के हैबिटेट्स रूट पर गांवों से निकलकर लोग जंगली इलाकों में बसने लगे हैं। इससे हाथी गुस्सैल होकर हमला कर देता है।


