मेयर हेमलता दिवाकर कुशवाह और नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल के बीच चल रहे विवाद में अब नया मोड़ आ गया है। नगर निगम के अधिकारी खुद कटघरे में खड़े नजर आ रहे हैं। नगर निगम के जिस सहायक अभियंता ने नगर निगम में संदिग्धों द्वारा बवाल की आशंका जताई थी, उसने यू-टर्न ले लिया है।
थाने में प्रार्थना पत्र लेकर अपने पूर्व के शिकायती पत्र पर कार्रवाई न करने की मांग की है। साथ ही लिखा है-उच्च अधिकारियों के कहने पर उन्होंने शिकायत की थी। अब उनके प्रार्थना पत्र पर किसी पर कार्रवाई न की जाए। क्या है मामला?
नगर निगम के सहायक अभियंता जीवेक ने 25 मार्च को थाना हरीपर्वत में तहरीर दी थी। इसमें उनका कहना था-23 मार्च को नगर निगम आगरा की बैठक के दौरान 10 से 15 संदिग्ध और अज्ञात लोग पहुंचे थे। बैठक में बवाल की आशंका थी। वे किसी प्रकार के उपद्रव की योजना के तहत वहां पहुंचे थे। नगर निगम प्रशासन के अनुसार इन संदिग्ध लोगों के पास हथियार होने के भी संकेत मिले हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इस एंगल से भी जांच में जुट गई हैं। नगर निगम प्रशासन द्वारा बैठक स्थल और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, जिसमें कई संदिग्ध चेहरों की पहचान किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
कहा गया है कि इन बाहरी लोगों को विशेष रूप से बैठक के दौरान बवाल कराने के लिए बुलाया गया था। लेकिन अधिकारियों और जिम्मेदार पदाधिकारियों के समय पर बैठक में नहीं पहुंचने के कारण कथित साजिश पूरी तरह से नाकाम हो गई। हरीपर्वत थाने में दी तहरीर
इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगर निगम प्रशासन सतर्क हो गया है। इस मामले में थाना हरीपर्वत में सहायक अभियंता जीवेक की ओर से तहरीर दी गई है। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी की जा रही है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल पूरे मामले की जांच तेज कर दी गई है और जल्द ही कई अहम खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है। तहरीर ली वापस
थाने में बवाल की आशंका की तहरीर देने वाले नगर निगम के सहायक अभियंता जीवेक बैक पुट पर हैं। थाने में तहरीर देने वाले अधिकारी ने गलिखित में प्रार्थन पत्र दिया है। उन्होंने लोगों को संदिग्ध मानने को बताया भूल और गलतफहमी बताया है। कहा-प्रार्थना पत्र में लिखा उच्च अधिकारियों के कहने पर प्रार्थना पत्र दिया था।
पत्र में लिखा कि अब मैं नहीं चाहता कोई कार्रवाई नहीं चाहता। सोशल मीडिया पर अधिकारी का कार्रवाई न करने का आग्रह वाला लिखित प्रार्थना पत्र वायरल हो रहा है।
इसके बाद नगर निगम के अधिकारी सवालों के घेरे में आ गए हैं। आखिर किस अधिकारी के आदेश पर थाने में प्रार्थना पत्र दिया गया था।


