बिहार खेल विभाग के दो साल,राजगीर अकादमी ने रचा इतिहास:2025 में 257 प्रखंड स्तरीय स्टेडियम तैयार, खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं

बिहार खेल विभाग के दो साल,राजगीर अकादमी ने रचा इतिहास:2025 में 257 प्रखंड स्तरीय स्टेडियम तैयार, खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं

दो साल पहले जब बिहार में अलग से खेल विभाग का गठन हुआ था, तब शायद कम ही लोगों ने सोचा होगा कि यह महज एक प्रशासनिक पुनर्गठन से कहीं आगे जाकर राज्य की पहचान बदलने वाला कदम साबित होगा। 9 जनवरी 2024 से शुरू हुआ यह सफर आज एक ऐसे मुकाम पर पहुंच चुका है, जहां खेल महज प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का सशक्त माध्यम बन गया है। राजगीर से शुरू हुई नई इबारत अगस्त 2024 में राजगीर खेल अकादमी की स्थापना ने बिहार के खेल इतिहास में एक नया अध्याय लिखा। यह महज एक प्रशिक्षण केंद्र नहीं था, बल्कि वैज्ञानिक पद्धति से खिलाड़ी तैयार करने की बिहार की पहली कोशिश थी। इसी वर्ष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार खेल विश्वविद्यालय, राजगीर का उद्घाटन किया, जिसने खेल को शिक्षा और करियर से जोड़ने का स्थायी ढांचा खड़ा कर दिया। अब बिहार का युवा यह समझने लगा है कि खेल केवल शौक नहीं, भविष्य का विकल्प भी है। गांव-गांव तक पहुंची खेल की सुविधा खेल विभाग की सबसे बड़ी उपलब्धि रही है, अवसंरचना को लोकतांत्रिक बनाना। शहरों से लेकर पंचायतों तक, प्रखंड स्तरीय आउटडोर स्टेडियम, जिला खेल भवन सह जिमनैजियम और गांवों में विकसित खेल मैदानों ने खेल को हर वर्ग तक पहुंचाया है। 2025 में ही 257 प्रखंड स्तरीय स्टेडियम पूर्ण हो गए, जो इस बात का प्रमाण है कि योजनाएं कागजों से उतरकर जमीन पर उतर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मंच पर बिहार की धाक बीते दो वर्षों में बिहार ने खुद को अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के भरोसेमंद मेजबान के रूप में स्थापित किया है। एशियन चैंपियंस ट्रॉफी, सेपक टाकरा वर्ल्ड कप, एशियन रग्बी सेवन्स, खेलो इंडिया यूथ गेम्स, हीरो एशिया कप हॉकी और ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज एथलेटिक्स चैंपियनशिप जैसे आयोजनों ने यह साबित कर दिया कि बिहार वैश्विक मानकों पर खरा उतरने की पूरी क्षमता रखता है। यह वही राज्य है जिसे कभी खेल अवसंरचना के मामले में पिछड़ा माना जाता था। आज विदेशी टीमें यहां आकर बिहार की मेजबानी की तारीफ कर रही हैं। प्रतिभा खोज से लेकर प्रशिक्षण तक ‘मशाल’ जैसी व्यापक प्रतिभा खोज पहल ने लाखों बच्चों को खेल से जोड़ा है। एकलव्य स्पोर्ट्स स्कूलों और खेलो इंडिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, राजगीर जैसे प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से अब प्रतिभाओं को निरंतर मार्गदर्शन मिल रहा है। पहले बिहार के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब वे अपने ही राज्य में विश्वस्तरीय सुविधाएं पा रहे हैं। खिलाड़ियों को मिला सम्मान और सुरक्षा खेल विभाग ने प्रशासन को खिलाड़ी-केंद्रित बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। पंचायत स्तर तक गठित खेल क्लबों ने स्थानीय नेतृत्व को मजबूत किया है। छात्रवृत्ति, सरकारी नियुक्ति, प्रोत्साहन राशि और कल्याणकारी योजनाओं ने बिहार के खिलाड़ियों को यह भरोसा दिया है कि उनकी प्रतिभा का सम्मान होगा और उनका भविष्य सुरक्षित रहेगा। पदक विजेता अब केवल तालियां नहीं, बल्कि स्थायी अवसर भी प्राप्त कर रहे हैं। 2026: विस्तार और आत्मविश्वास का वर्ष नया साल बिहार खेल विभाग के लिए और भी महत्वाकांक्षी योजनाओं के साथ शुरू हो रहा है। सात निश्चय योजना (03) के तहत पटना में प्रस्तावित स्पोर्ट्स सिटी, जिला-विशेष खेल उत्कृष्टता केंद्र, एकलव्य खेल केंद्रों का संचालन, नई छात्रवृत्ति प्रक्रियाएं और खेल प्रशासन में बड़े पैमाने पर नियुक्तियां, ये सभी बिहार को खेल-आधारित विकास मॉडल की ओर तेजी से ले जाएंगी। दो साल पहले जब बिहार में अलग से खेल विभाग का गठन हुआ था, तब शायद कम ही लोगों ने सोचा होगा कि यह महज एक प्रशासनिक पुनर्गठन से कहीं आगे जाकर राज्य की पहचान बदलने वाला कदम साबित होगा। 9 जनवरी 2024 से शुरू हुआ यह सफर आज एक ऐसे मुकाम पर पहुंच चुका है, जहां खेल महज प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का सशक्त माध्यम बन गया है। राजगीर से शुरू हुई नई इबारत अगस्त 2024 में राजगीर खेल अकादमी की स्थापना ने बिहार के खेल इतिहास में एक नया अध्याय लिखा। यह महज एक प्रशिक्षण केंद्र नहीं था, बल्कि वैज्ञानिक पद्धति से खिलाड़ी तैयार करने की बिहार की पहली कोशिश थी। इसी वर्ष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार खेल विश्वविद्यालय, राजगीर का उद्घाटन किया, जिसने खेल को शिक्षा और करियर से जोड़ने का स्थायी ढांचा खड़ा कर दिया। अब बिहार का युवा यह समझने लगा है कि खेल केवल शौक नहीं, भविष्य का विकल्प भी है। गांव-गांव तक पहुंची खेल की सुविधा खेल विभाग की सबसे बड़ी उपलब्धि रही है, अवसंरचना को लोकतांत्रिक बनाना। शहरों से लेकर पंचायतों तक, प्रखंड स्तरीय आउटडोर स्टेडियम, जिला खेल भवन सह जिमनैजियम और गांवों में विकसित खेल मैदानों ने खेल को हर वर्ग तक पहुंचाया है। 2025 में ही 257 प्रखंड स्तरीय स्टेडियम पूर्ण हो गए, जो इस बात का प्रमाण है कि योजनाएं कागजों से उतरकर जमीन पर उतर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मंच पर बिहार की धाक बीते दो वर्षों में बिहार ने खुद को अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के भरोसेमंद मेजबान के रूप में स्थापित किया है। एशियन चैंपियंस ट्रॉफी, सेपक टाकरा वर्ल्ड कप, एशियन रग्बी सेवन्स, खेलो इंडिया यूथ गेम्स, हीरो एशिया कप हॉकी और ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज एथलेटिक्स चैंपियनशिप जैसे आयोजनों ने यह साबित कर दिया कि बिहार वैश्विक मानकों पर खरा उतरने की पूरी क्षमता रखता है। यह वही राज्य है जिसे कभी खेल अवसंरचना के मामले में पिछड़ा माना जाता था। आज विदेशी टीमें यहां आकर बिहार की मेजबानी की तारीफ कर रही हैं। प्रतिभा खोज से लेकर प्रशिक्षण तक ‘मशाल’ जैसी व्यापक प्रतिभा खोज पहल ने लाखों बच्चों को खेल से जोड़ा है। एकलव्य स्पोर्ट्स स्कूलों और खेलो इंडिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, राजगीर जैसे प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से अब प्रतिभाओं को निरंतर मार्गदर्शन मिल रहा है। पहले बिहार के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब वे अपने ही राज्य में विश्वस्तरीय सुविधाएं पा रहे हैं। खिलाड़ियों को मिला सम्मान और सुरक्षा खेल विभाग ने प्रशासन को खिलाड़ी-केंद्रित बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। पंचायत स्तर तक गठित खेल क्लबों ने स्थानीय नेतृत्व को मजबूत किया है। छात्रवृत्ति, सरकारी नियुक्ति, प्रोत्साहन राशि और कल्याणकारी योजनाओं ने बिहार के खिलाड़ियों को यह भरोसा दिया है कि उनकी प्रतिभा का सम्मान होगा और उनका भविष्य सुरक्षित रहेगा। पदक विजेता अब केवल तालियां नहीं, बल्कि स्थायी अवसर भी प्राप्त कर रहे हैं। 2026: विस्तार और आत्मविश्वास का वर्ष नया साल बिहार खेल विभाग के लिए और भी महत्वाकांक्षी योजनाओं के साथ शुरू हो रहा है। सात निश्चय योजना (03) के तहत पटना में प्रस्तावित स्पोर्ट्स सिटी, जिला-विशेष खेल उत्कृष्टता केंद्र, एकलव्य खेल केंद्रों का संचालन, नई छात्रवृत्ति प्रक्रियाएं और खेल प्रशासन में बड़े पैमाने पर नियुक्तियां, ये सभी बिहार को खेल-आधारित विकास मॉडल की ओर तेजी से ले जाएंगी।  

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