अररिया में ग्रामीण आवास सहायकों की दो दिवसीय सांकेतिक हड़ताल मंगलवार को समाप्त हो गई। राज्य ग्रामीण आवास कर्मी संघ के बैनर तले कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर यह धरना दिया था। यह हड़ताल सोमवार से मंगलवार तक चली, जिसके दौरान कर्मचारियों ने जिला समाहरणालय परिसर स्थित धरना स्थल पर विरोध प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है। ”बार-बार आंदोलन के बावजूद सरकार सुनवाई नहीं कर रही” कर्मचारियों की मुख्य मांगों में पिछले आठ महीनों से लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान, पांच वर्षों से मानदेय पुनरीक्षण न होना, सेवा को स्थायी करना और राज्य कर्मी का दर्जा देकर उचित सुविधाएं प्रदान करना शामिल है। संघ के जिलाध्यक्ष जितेंद्र कुमार ने बताया कि बार-बार आंदोलन के बावजूद सरकार उनकी सुनवाई नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि अल्प मानदेय पर परिवार चलाना, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्चों का वहन करना मुश्किल हो गया है। ईंधन और अन्य खर्चों के अभाव में कार्यक्षेत्र के अलावा कार्यालय जाना भी कठिन हो गया है, जिससे कई कर्मचारी आर्थिक तंगी के कारण बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। जिले में लगभग 140 ग्रामीण आवास कर्मी कार्यरत जिले में लगभग 140 ग्रामीण आवास कर्मी कार्यरत हैं, जिनमें आवास सहायक, आवास सुपरवाइजर और लेखा सहायक शामिल हैं। ये कर्मचारी प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के सफल क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिसमें लाभार्थियों का चयन, सूची तैयार करना और निर्माण की निगरानी शामिल है। वे अन्य सरकारी योजनाओं में भी सहयोग करते हैं। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे। इससे प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य सरकारी कार्यों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। गौरतलब है कि सितंबर 2025 में मंत्रिपरिषद ने मानदेय पुनरीक्षण और भुगतान की स्वीकृति दी थी, इसके बावजूद विभागीय स्तर पर ढुलमुल रवैया जारी है। आवास सहायकों की यह मांग न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए जरूरी है, बल्कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भी महत्वपूर्ण है। सरकार को चाहिए कि इन समर्पित कर्मचारियों की मांगों पर त्वरित कार्रवाई करे ताकि गरीबों के आशियाने का सपना समय पर पूरा हो सके। अररिया में ग्रामीण आवास सहायकों की दो दिवसीय सांकेतिक हड़ताल मंगलवार को समाप्त हो गई। राज्य ग्रामीण आवास कर्मी संघ के बैनर तले कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर यह धरना दिया था। यह हड़ताल सोमवार से मंगलवार तक चली, जिसके दौरान कर्मचारियों ने जिला समाहरणालय परिसर स्थित धरना स्थल पर विरोध प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है। ”बार-बार आंदोलन के बावजूद सरकार सुनवाई नहीं कर रही” कर्मचारियों की मुख्य मांगों में पिछले आठ महीनों से लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान, पांच वर्षों से मानदेय पुनरीक्षण न होना, सेवा को स्थायी करना और राज्य कर्मी का दर्जा देकर उचित सुविधाएं प्रदान करना शामिल है। संघ के जिलाध्यक्ष जितेंद्र कुमार ने बताया कि बार-बार आंदोलन के बावजूद सरकार उनकी सुनवाई नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि अल्प मानदेय पर परिवार चलाना, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्चों का वहन करना मुश्किल हो गया है। ईंधन और अन्य खर्चों के अभाव में कार्यक्षेत्र के अलावा कार्यालय जाना भी कठिन हो गया है, जिससे कई कर्मचारी आर्थिक तंगी के कारण बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। जिले में लगभग 140 ग्रामीण आवास कर्मी कार्यरत जिले में लगभग 140 ग्रामीण आवास कर्मी कार्यरत हैं, जिनमें आवास सहायक, आवास सुपरवाइजर और लेखा सहायक शामिल हैं। ये कर्मचारी प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के सफल क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिसमें लाभार्थियों का चयन, सूची तैयार करना और निर्माण की निगरानी शामिल है। वे अन्य सरकारी योजनाओं में भी सहयोग करते हैं। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे। इससे प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य सरकारी कार्यों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। गौरतलब है कि सितंबर 2025 में मंत्रिपरिषद ने मानदेय पुनरीक्षण और भुगतान की स्वीकृति दी थी, इसके बावजूद विभागीय स्तर पर ढुलमुल रवैया जारी है। आवास सहायकों की यह मांग न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए जरूरी है, बल्कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भी महत्वपूर्ण है। सरकार को चाहिए कि इन समर्पित कर्मचारियों की मांगों पर त्वरित कार्रवाई करे ताकि गरीबों के आशियाने का सपना समय पर पूरा हो सके।


