पश्चिमी सिंहभूम जिले और ओडिशा सीमा से सटे इलाकों में एक दंतैल हाथी (दो दांत वाला हाथी) का आतंक पिछले 11 दिनों से जारी है। इस हाथी के हमलों में अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई ग्रामीण घायल हुए हैं। झारखंड और ओडिशा की संयुक्त वन विभाग टीम, विशेषज्ञों और ड्रोन कैमरों के बावजूद सोमवार को तीसरे दिन भी हाथी की सटीक लोकेशन का पता नहीं चल पाया है। वन विभाग के अनुसार, शुक्रवार को मझगांव प्रखंड के बेनीसागर इलाके में दंतैल हाथी लगभग 12 घंटे तक एक ही स्थान पर रहा था। इसके बाद से उनका लोकेशन ट्रैक नहीं हो पा रहा है। शुक्रवार को उसे ट्रैंकुलाइज कर पकड़ने की पूरी तैयारी की गई थी, लेकिन घने जंगल और तकनीकी बाधाओं के कारण यह ऑपरेशन सफल नहीं हो सका। इसके बाद हाथी ओडिशा सीमा की ओर स्थित काजू बागानों में चला गया, जिससे उसका मूवमेंट ट्रैक करना और भी मुश्किल हो गया है।
15 से 20 लोग एक साथ रात गुजार रहे हाथी के लगातार आतंक से बेनीसागर, खड़पोस और आसपास के गांवों में ग्रामीणों में भारी दहशत है। लोग रात में अपने घरों में अकेले सोने से डर रहे हैं। कई गांवों में महिलाएं और बच्चे सुरक्षित पक्के मकानों में शरण ले रहे हैं, जहां 15 से 20 लोग एक साथ रात गुजार रहे हैं। वहीं, गांव के पुरुष मशाल और टॉर्च लेकर पूरी रात पहरेदारी कर रहे हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना से समय रहते बचाव किया जा सके। 30 गांवों को हाई अलर्ट पर रखा गया है: डीएफओ चाईबासा के डीएफओ आदित्य नारायण ने बताया कि बेनीसागर और खड़पोस क्षेत्र में वन विभाग की तीन टीमें और SOS की विशेषज्ञ टीम लगातार निगरानी कर रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि अलग-अलग स्थानों से हाथी देखे जाने की सूचनाएं मिल रही हैं, लेकिन जांच के बाद कई सूचनाएं अफवाह साबित हो रही हैं, जिससे सर्च ऑपरेशन में बाधा आ रही है। फिलहाल ओडिशा सीमा से सटे लगभग 30 गांवों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे रात के समय अकेले बाहर न निकलें, जंगल की ओर जाने से बचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके। पश्चिमी सिंहभूम जिले और ओडिशा सीमा से सटे इलाकों में एक दंतैल हाथी (दो दांत वाला हाथी) का आतंक पिछले 11 दिनों से जारी है। इस हाथी के हमलों में अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई ग्रामीण घायल हुए हैं। झारखंड और ओडिशा की संयुक्त वन विभाग टीम, विशेषज्ञों और ड्रोन कैमरों के बावजूद सोमवार को तीसरे दिन भी हाथी की सटीक लोकेशन का पता नहीं चल पाया है। वन विभाग के अनुसार, शुक्रवार को मझगांव प्रखंड के बेनीसागर इलाके में दंतैल हाथी लगभग 12 घंटे तक एक ही स्थान पर रहा था। इसके बाद से उनका लोकेशन ट्रैक नहीं हो पा रहा है। शुक्रवार को उसे ट्रैंकुलाइज कर पकड़ने की पूरी तैयारी की गई थी, लेकिन घने जंगल और तकनीकी बाधाओं के कारण यह ऑपरेशन सफल नहीं हो सका। इसके बाद हाथी ओडिशा सीमा की ओर स्थित काजू बागानों में चला गया, जिससे उसका मूवमेंट ट्रैक करना और भी मुश्किल हो गया है।
15 से 20 लोग एक साथ रात गुजार रहे हाथी के लगातार आतंक से बेनीसागर, खड़पोस और आसपास के गांवों में ग्रामीणों में भारी दहशत है। लोग रात में अपने घरों में अकेले सोने से डर रहे हैं। कई गांवों में महिलाएं और बच्चे सुरक्षित पक्के मकानों में शरण ले रहे हैं, जहां 15 से 20 लोग एक साथ रात गुजार रहे हैं। वहीं, गांव के पुरुष मशाल और टॉर्च लेकर पूरी रात पहरेदारी कर रहे हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना से समय रहते बचाव किया जा सके। 30 गांवों को हाई अलर्ट पर रखा गया है: डीएफओ चाईबासा के डीएफओ आदित्य नारायण ने बताया कि बेनीसागर और खड़पोस क्षेत्र में वन विभाग की तीन टीमें और SOS की विशेषज्ञ टीम लगातार निगरानी कर रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि अलग-अलग स्थानों से हाथी देखे जाने की सूचनाएं मिल रही हैं, लेकिन जांच के बाद कई सूचनाएं अफवाह साबित हो रही हैं, जिससे सर्च ऑपरेशन में बाधा आ रही है। फिलहाल ओडिशा सीमा से सटे लगभग 30 गांवों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे रात के समय अकेले बाहर न निकलें, जंगल की ओर जाने से बचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके।


