श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से आयोजित रामलला की द्वितीय प्रतिष्ठा द्वादशी के पहले दिन श्रीरामकथा के प्रख्यात वक्ता जगदगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य ने श्री रामकथा में राम के जीवन को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में समाज के लिए उपयोगी बताते हुए उनके वृतान्तों के माध्यम से रुचिकर प्रसंग सुनाए। नित्य वंदन करने वाला अहंकारी नहीं हो सकता
उन्होंने कहा नित्य वंदन करने वाला अहंकारी नहीं हो सकता। प्रणाम इसीलिए बनाया गया है। जो इसका अभ्यासी हो जाता है उसके जीवन में कभी अहंकार नहीं रहता। तुलसीदास ने सबको प्रणाम किया, यहाँ तक कि दुष्टों को भी नमन किया। रामकथा तीनों लोकों को पवन करती है उन्होंने कहा राम कथा सबका मंगल करने वाली है। यह तीनों लोकों को पवन करती है। कलयुग में जीव के कल्याण का एकमात्र साधन भगवान का नाम है| जिन्होंने राम के नाम का सहारा लिया उन सब की मुक्ति हो गई| कलयुग की सबसे बड़ी भक्ति का नाम है नाम जप| यह नाम जप जीव किसी भी अवस्था में कर सकता है। राम का नाम मात्र जीव के पाप को जला कर देता है। जगदगुरु स्वामी रामदिनेशाचार्य कहा कि श्री हनुमान जी ने नाम जप के बल पर ही प्रभु राम को अपने वश में कर लिया। संत प्रवर ने इसी क्रम में पूरे विश्व पर राज्य करने वाले सिकंदर की कथा का भी जिक्र किया जिसमें कहा कि भारत के एक संत की नसीहत पर सिकंदर ने कहा था कि उसकी मृत्यु के बाद हाथ कफन के बाहर करके शव यात्रा निकलना जिससे दुनिया देख ले कि इस दुनिया से कोई कुछ साथ नहीं ले जा सकता।
कथा पूजन में श्रीरामवल्लभाकुंज के प्रमुख स्वामी राजकुमार दास, कनक आश्रम के महंत जयराम दास, ट्रस्ट महासचिव चम्पत राय, डॉ अनिल मिश्र, निर्माण प्रभारी गोपाल, धनन्जय पाठक सहित अनेक वरिष्ठजन उपस्थित रहे ।


