वैश्विक ऊर्जा बाजार में इन दिनों भारी अस्थिरता देखी जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने तेल कीमतों को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा दिया था। इसी बीच मंगलवार को बाजार में गिरावट दर्ज की गई। वॉल स्ट्रीट जर्नल (Wall Street Journal) की एक रिपोर्ट ने मंगलवार को पूरे बाजार को चौंका दिया। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने अपने करीबी सहयोगियों को बताया है कि वह स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को पूरी तरह खोले बिना भी ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान रोकने को तैयार हैं और हॉर्मुज को खोलने का काम बाद के किसी चरण में किया जा सकता है।
बयान के बाद तेल के भाव
ब्रेंट क्रूड के मई वाले फ्यूचर्स की कीमत 1.22 डॉलर यानी 1.08 प्रतिशत गिरकर 111.56 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि ट्रेडिंग की शुरुआत में यह करीब 2 फीसदी तक बढ़ी थी। मई वाला कॉन्ट्रैक्ट मंगलवार को खत्म हो रहा है, इसलिए अब ज्यादा ट्रेडिंग जून वाले कॉन्ट्रैक्ट में हो रही है, जिसकी कीमत 105.76 डॉलर प्रति बैरल चल रही है। वहीं, अमेरिका का WTI crude (वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट) मई फ्यूचर्स भी 98 सेंट यानी 0.95 फीसदी गिरकर 101.90 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि शुरुआती कारोबार के दौरान यह 9 मार्च के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर तक पहुंच गया था।
क्रूड का सबसे बड़ा मासिक रिकॉर्ड
ब्रेंट क्रूड ने इस महीने 59 फीसदी की उछाल दर्ज की और मार्च 2026 इतिहास में दर्ज हो गया। यह अब तक का सबसे बड़ा मासिक उछाल है। इसके साथ ही WTI ने 58 फीसदी की बढ़त बनाकर मई 2020 के बाद इसकी सबसे मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। फरवरी के अंत में जब अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए तब क्रूड करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था। एक महीने में यह 112 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया।
क्रूड ऑयल का अगला पड़ाव कहां?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक आगे का रास्ता बेहद अनिश्चित है। एसएस वेल्थस्ट्रीट (SS WealthStreet) की सुगंधा सचदेवा के मुताबिक ब्रेंट क्रूड के लिए 93 से 73 डॉलर का मजबूत सपोर्ट लेवल हैं। ऊपर की तरफ 120 डॉलर तक की वापसी संभव है और अगर जियोपॉलिटिकल रिस्क और बढ़ा तो 150 डॉलर प्रति बैरल तक का रास्ता भी खुल सकता है। यह आंकड़े बताते हैं कि बाजार पूरी तरह जियोपॉलिटिक्स पर चल रहा है।
सचदेवा के मुताबिक सप्लाई डिसरप्शन, स्ट्रैटेजिक रिजर्व एक्शन और पॉलिसी रिस्पॉन्स मिलकर आने वाले समय में क्रूड की दिशा तय करेंगे। भारत में MCX पर चॉइस ब्रोकिंग (Choice Broking) के कमोडिटी और करेंसी विश्लेषक आमिर मकड़ा के मुताबिक 10,000 रुपये का मनोवैज्ञानिक स्तर अहम रेजिस्टेंस है, अगर इसे पार किया तो नया ऑल-टाइम हाई संभव है।


