ट्रंप की दादागिरी! कहा – “मुझे अंतर्राष्ट्रीय कानून की परवाह नहीं”

ट्रंप की दादागिरी! कहा – “मुझे अंतर्राष्ट्रीय कानून की परवाह नहीं”

अमेरिका (United States Of America) के राष्ट्रपति के तौर पर डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के दूसरे कार्यकाल को एक साल पूरा होने वाला है। अपने इस कार्यकाल में ट्रंप पूरी तरह से एक्टिव मोड में नज़र आए। इस दौरान उन्होंने अमेरिका के लिए कई बड़े फैसले लिए। ट्रंप के कई फैसलों को सराहा गया, लेकिंन उससे भी ज़्यादा फैसलों की आलोचना की गई। कुछ दिन पहले ही उनके आदेश पर अमेरिकी सेना ने वेनेज़ुएला में एयरस्ट्राइक्स करते हुए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (Nicolás Maduro) और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस (Cilia Flores) को किडनैप कर लिया और अब मादुरो पर न्यूयॉर्क में ड्रग्स की तस्करी और नार्को-आतंकवाद के मामलों में मुकदमा चलाया जा रहा है। दुनिया के कई देश जहाँ ट्रंप के इस कदम की आलोचना कर रहे हैं और अंतर्राष्टीय कानूनों के आधार पर इसे गलत बता रहे हैं। हालांकि ऐसा लगता है कि उन्हें इससे कोई मतलब नहीं है।

“मुझे अंतर्राष्ट्रीय कानून की परवाह नहीं”

ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में दादागिरी दिखाते हुए अंतर्राष्ट्रीय कानून को नज़रअंदाज़ कर दिया। ट्रंप ने कहा, “सिर्फ मेरा दिमाग ही मुझे रोक सकता है। मेरी अपनी नैतिकता और अपना दिमाग। यहीं वो चीज़ें हैं जो मुझे रोक सकती हैं। मुझे अंतर्राष्ट्रीय कानून की परवाह नहीं है और न ही इसकी ज़रूरत।

“चीन नहीं करेगा ताइवान पर हमला”

ट्रंप ने इंटरव्यू के दौरान चीन-ताइवान तनाव पर भी बात की। जब से रूस ने यूक्रेन पर हमला किया है, तभी से इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि चीन भी जल्द ही ताइवान पर हमला कर सकता है जिससे उस पर कब्ज़ा किया जा सके। जब ट्रंप से इस बारे में सवाल पूछा तब उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ऐसा कुछ नहीं करेंगे। जब तक मैं राष्ट्रपति हूं, तब तक चीन, ताइवान पर हमला नहीं करेगा। हो सकता है मेरे बाद जब कोई और अमेरिकी राष्ट्रपति बने, तब जिनपिंग ऐसा करें, लेकिन जब तक मैं ऑफिस में हूं, ऐसा नहीं होगा।”

“मैं नहीं होता तो पूरे यूक्रेन पर रूस का कब्ज़ा होता”

यूरोप के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हम हमेशा यूरोप के साथ मिलजुलकर रहेंगे, लेकिन मैं चाहता हूँ कि वो सुधर जाए। मैं ही हूं जिसने उन्हें नाटो पर ज़्यादा जीडीपी खर्च करने के लिए राज़ी किया। लेकिन यह भी साफ है कि अमेरिका के अलावा और किसी देश को नाटो की चिंता नहीं है। मैं यूरोप के प्रति बहुत लॉयल रहा हूं। मैंने अच्छा काम किया है। अगर मैं नहीं होता, तो अब तक पूरे यूक्रेन पर रूस का कब्ज़ा होता।”

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