Middle East Conflict: 28 फरवरी से शुरू हुआ युद्ध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। ईरान पर हमला करते वक्त अमेरिका ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि ये युद्ध इतने दिन तक चलेगा। ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई को मारने के बाद यूएस प्रेसिडेंट ने खुद कहा था कि ये लड़ाई ज्यादा दिन तक नहीं चलेगी। ईरान के लोग अब आजाद हैं। उन्हें अब नई सरकार चुनने की आजादी है।
लेकिन हुआ इसके ठीक उलट। खामनेई की मौत के बाद लोग भारी संख्या में सरकार बनाने के लिए सड़कों पर नहीं उतरे। उन्हें अपने लीडर को खोने का दुख था। अमेरिका की टॉप लीडरशिप की खात्मे और रिजीम चेंज वाली पॉलिसी धरी की धरी रह गई। अंततः अली खामनेई की मौत के बाद उनके बेटे मुजतबा खामनेई ईरान के नए सुप्रीम लीडर बने।
ईरान से युद्ध करना कितना पड़ा भारी
CBS न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के टॉप सलाहकार और नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल के डायरेक्टर केविन हैसेट ने कहा कि 28 फरवरी को इजराइल के साथ जॉइंट स्ट्राइक शुरू करने के बाद से यूनाइटेड स्टेट्स ने ईरान के खिलाफ युद्ध पर लगभग 12 बिलियन अमेरिकी डालर यानी भारतीय रुपयों में लगभग 1200 करोड़ खर्च किए हैं।
खर्च और युद्ध को लेकर बढ़ी चिंता
US के डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में ईरान पर हमले और भी ज्यादा आक्रामक हो सकते हैं, इसका मतलब ये है कि ऑपरेशन का खर्च और ज्यादा बढ़ सकता है।
बता दें ये खर्च का आंकड़ा ऐसे समय में आया है, जब वॉशिंगटन में मिलिट्री कैंपेन के खर्च और लक्ष्यों को लेकर सवाल बढ़ रहे हैं। कुछ सांसदों ने लड़ाई की दिशा को लेकर भी चिंता जताई है।
इस महीने की शुरुआत में डेमोक्रेटिक लीडर चक शूमर ने कहा था कि वह युद्ध को लेकर चिंतित हैं। एडमिनिस्ट्रेशन की आलोचना करते हुए कहा कि यूनाइटेड स्टेट्स ने बिना किसी अनुमान- सजेशन के युद्ध के मैदान में कूद गए।
अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, हमले शुरू होने के बाद से ईरान में 1,400 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं। तेरह US सैनिक भी मारे गए हैं और 140 से ज्यादा घायल हुए हैं।


