अमेरिका (United States of America) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अपने ही देश में घिरते जा रहे हैं। ईरान के खिलाफ युद्ध (War Against Iran) के मामले पर एक बार फिर विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी (Democratic Party) ट्रंप के खिलाफ आक्रामक हो गई है। हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के सीनियर डेमोक्रेटिक सांसदों ने ट्रंप के ईरान के साथ चल रहे युद्ध पर कड़ी आलोचना की। उन्होंने ट्रंप के देश के नाम संबोधन से पहले, इस युद्ध से होने वाले बढ़ते मानवीय, आर्थिक और भू-राजनीतिक नुकसान की चेतावनी दी।
33 दिन बीते, फिर भी युद्ध नहीं जीते
एक संयुक्त बयान में डेमोक्रेटिक पार्टी के रैंकिंग सदस्य ग्रेगरी मीक्स (Gregory Meeks), एडम स्मिथ (Adam Smith) और जिम हिम्स (Jim Himes) ने कहा, “ट्रंप को ईरान के साथ अपनी पसंद का युद्ध एकतरफा रूप से शुरू किए हुए एक महीने से ज़्यादा समय बीत चुका है, और वह अपने अस्पष्ट लक्ष्यों को हासिल करने के करीब भी नहीं पहुंचे हैं। 33 दिन बीते के बाद भी ट्रंप युद्ध नहीं जीते हैं।”
नहीं निकला कोई सार्थक परिणाम
डेमोक्रेटिक सांसदों ने तर्क दिया कि ईरान के खिलाफ युद्ध में कोई भी सार्थक रणनीतिक परिणाम हासिल करने में ट्रंप प्रशासन विफल रहा है। उन्होंने कहा, “ईरानी शासन में कोई बुनियादी बदलाव नहीं आया है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि वो अब परमाणु कार्यक्रम को आगे नहीं बढ़ा पाएगा, बैलिस्टिक मिसाइलें नहीं बना पाएगा या आतंकी गुटों का समर्थन नहीं कर पाएगा। ट्रंप ईरान के लंबे समय से पीड़ित लोगों को राहत देने में भी विफल रहे हैं। न सिर्फ इस युद्ध से कोई लक्ष्य हासिल नहीं हुआ है, बल्कि ट्रंप के युद्ध का मिडिल ईस्ट और दुनिया पर भी गहरा विनाशकारी प्रभाव पड़ा है।”
“देश के लिए खतरा हैं ट्रंप”
डेमोक्रेटिक सांसदों ने ट्रंप को देश के लिए खतरा बताया। उन्होंने कहा, “अमेरिका और वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं उर्वरक, हीलियम और तेल सहित आवश्यक वस्तुओं के प्रवाह में भारी कमी से काफी प्रभावित हुई हैं। अमेरिका में भी महंगाई बढ़ी है जिसका असर अमेरिकियों पर पड़ा है। ट्रंप देश के लिए खतरा हैं। ट्रंप ने ईरान से दुश्मनी की आग में मिडिल ईस्ट को झोंक दिया और इस वजह से अमेरिका के कई प्रमुख सहयोगियों के साथ संबंधों में भी तनाव पैदा हो गए हैं। इस युद्ध में कई अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और उससे भी ज़्यादा घायल हुए हैं। बिलियन डॉलर्स का गोला-बारूद और अन्य हथियार इस्तेमाल हुए हैं। हज़ारों ईरानी नागरिक मारे गए हैं, जिनमें 150 से ज़्यादा ईरानी स्कूली छात्राएं भी शामिल हैं। अनगिनत लोग अमेरिका के खिलाफ कट्टरपंथी बन गए हैं, जिसका कारण ट्रंप द्वारा मचाया गया भारी विनाश है।”


