राजगढ़ जिले के खिलचीपुर में जगन्नाथ मंदिर से भगवान की प्रतिमाएं हटने के बाद अब इस मामले ने और भावनात्मक मोड़ ले लिया है। मंदिर परिसर में रहने वाले 75 वर्षीय संत बालयोगी सोहनदास महाराज ने भगवान के जाने से आहत होकर अन्न त्याग दिया है। वे पिछले करीब 18 घंटे से अधिक समय से भूखे हैं और कुछ भी खाने से इनकार कर दिया है। संत सोहनदास महाराज का कहना है कि जब तक भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा की प्रतिमाएं वापस मंदिर में स्थापित नहीं हो जातीं, तब तक वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे। उन्होंने भावुक होकर कहा- “भगवान के चले जाने से मन बहुत दुखी है, अब कुछ खाने का मन ही नहीं करता।”
“भगवान चले गए, अब भोजन कैसे करूं”
संत ने बताया कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि पुजारी भगवान की प्रतिमाएं क्यों लेकर गए, लेकिन मंदिर में हुई घटनाओं ने उन्हें अंदर से झकझोर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भंवरलाल नाम के व्यक्ति ने मंदिर में आकर शराब के नशे में पुजारी के साथ अभद्रता की और थप्पड़ तक मारा था। संत का कहना है कि मंदिर की गरिमा के साथ इस तरह की घटनाएं बेहद पीड़ादायक हैं और यही वजह है कि वे मानसिक रूप से बेहद आहत हैं। 20 साल की उम्र में त्यागा था घर
संत सोहनदास महाराज उदासीन सम्प्रदाय से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने 20 साल की उम्र में ही घर-परिवार छोड़कर संत जीवन अपना लिया था। पिछले करीब 55 वर्षों से वे साधना और सेवा में लगे हुए हैं। खिलचीपुर में श्रीराम पेट्रोल पंप के पास उन्होंने 45 साल पहले अपना आश्रम स्थापित किया था और तब से लगातार यही निवास कर रहे हैं। मंदिर परिसर में ही रहकर वे धार्मिक गतिविधियों का संचालन भी करते रहे हैं। प्रतिमाएं लाने वृंदावन रवाना हुआ दल
इधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए शनिवार सुबह खिलचीपुर टीआई उमाशंकर मुकाती पुलिस टीम और नगर के कुछ लोगों के साथ वृंदावन के लिए रवाना हुए हैं। टीम का उद्देश्य भगवान जगन्नाथ की प्रतिमाओं को वापस लाना और पुजारी से चर्चा करना है। स्थानीय लोग भी संत के इस निर्णय से भावुक हैं और जल्द से जल्द प्रतिमाओं की वापसी की मांग कर रहे हैं। यह भी पढ़ें… सुबह मंदिर पहुंचे तो भगवान नहीं मिले, रो पड़े श्रद्धालु
राजगढ़ जिले के खिलचीपुर स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में शुक्रवार सुबह श्रद्धालु पूजा के लिए पहुंचे तो भगवान की मूर्तियां नहीं मिलीं। भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा की मूर्तियां गायब थीं। वीरान मंदिर को देखकर श्रद्धालु डॉ. एस. प्रसाद मंदिर परिसर में ही बैठकर रो पड़े। उन्होंने कहा, हमारे भगवान हमें छोड़कर चले गए। पूरी खबर पढ़िए…


