राजनीति और टैक्स से परेशान अरबपति छोड़ रहे अपना देश:ब्रिटेन-अमेरिका से मोहभंग; इटली, पुर्तगाल और सिंगापुर नए ठिकाने बने, 2018 में 1.08 लाख और 2025 में 1.42 लाख अमीरों ने देश छोड़ा

राजनीति और टैक्स से परेशान अरबपति छोड़ रहे अपना देश:ब्रिटेन-अमेरिका से मोहभंग; इटली, पुर्तगाल और सिंगापुर नए ठिकाने बने, 2018 में 1.08 लाख और 2025 में 1.42 लाख अमीरों ने देश छोड़ा

दुनिया के सबसे अमीर परिवारों के बीच इन दिनों अपना देश छोड़कर दूसरे देशों में बसने की लहर सी चल रही है। विशेषज्ञ इसे इतिहास का ‘सबसे बड़ा निजी संपत्ति प्रवास’ बता रहे हैं। कभी टैक्स लाभ की तलाश में होने वाला यह पलायन अब ‘रक्षात्मक’ हो गया है। अमीर अब अपनी संपत्ति बचाने, पीढ़ियों की सुरक्षा और राजनीतिक अस्थिरता से बचने के लिए ‘गोल्डन वीसा’ और विदेशी नागरिकता का सहारा ले रहे हैं। स्विस बैंक यूबीएस ने अपने 87 अरबपति ग्राहकों के सर्वेक्षण में पाया कि 2025 में 36% अरबपति कम से कम एक बार अपना निवास स्थान बदल चुके हैं, जबकि 9% अन्य इस पर विचार कर रहे हैं। विशेष रूप से 54 वर्ष से कम उम्र के 44% युवा अरबपति पिछले साल दूसरे देश शिफ्ट हुए हैं। निवेश प्रवास फर्म ‘हेनली एंड पार्टनर्स’ के पास साल-दर-साल आवेदनों में 28% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। हेनले एंड पार्टनर्स की ‘प्राइवेट वेल्थ माइग्रेशन रिपोर्ट’ के मुताबिक 2018 में जहां करीब 1.08 लाख अरबपतियों ने देश बदला था, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 1.34 लाख और 2025 में रिकॉर्ड 1.42 लाख पहुंच गया और इस साल यानी 2026 में और ज्यादा माइग्रेशन का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स एफिशिएंसी अमीरों के फैसले की बड़ी वजह है। इटली में नए रेजीडेंट्स के लिए €2 लाख सालाना फ्लेट टैक्स स्कीम 15 साल तक विदेशी आय पर टैक्स को कैप करती है, जो अमीरों के लिए आकर्षक है। पुर्तगाल ने पुराने ‘गोल्डन वीसा’ और नई स्कीम के तहत 20% टैक्स छूट और रिसर्च/इनोवेशन इंसेंटिव देकर धनी प्रवासियों को खींचा है। सिंगापुर ने भी इसी तरह की कई रियायतें घोषित की हैं। हेनले रिपोर्ट कहती है कि 2025 में इटली में 3,600, पुर्तगाल में 1,400 और ग्रीस में 1,200 नए अरबपति बसे हैं। दूसरी तरफ ब्रिटेन लगातार नेट आउटफ्लो झेल रहा है, जहां हाई टैक्स और ब्रेग्जिट के बाद की अनिश्चितता से पैसे वाले परिवार विकल्प तलाश रहे हैं। टेक्नोलॉजी ने अमीरों को ‘जहां चाहो, वहीं रहो’ की आजादी दी माइग्रेशन सलाहकार जेरमी सेवरी कहते हैं, ‘टेक्नोलॉजी ने अमीरों के लिए दुनिया को खुला मैदान बना दिया है। अब आप कंपनी सिंगापुर, परिवार इटली और संपत्ति दुबई में रख सकते हैं।’ हेनले की रिपोर्ट भी मानती है कि रिमोट वर्क, डिजिटल बिजनेस और फिनटेक टूल्स ने देश छोड़ना आसान बनाया है। हेनले के सीईओ डॉ. युर्ग स्टेफन कहते हैं, ‘पुरानी वेल्थ राजधानी जैसे ब्रिटेन और अमेरिका से पलायन और दक्षिण यूरोप, एशिया की ओर अरबपतियों के बसने का झुकाव नई हकीकत है।’

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *