लखनऊ में 11 मार्च को प्रस्तावित शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के गौ-रक्षा जनजागरण अभियान के मुख्य कार्यक्रम पर फिलहाल रोक लग सकती है। आयोजन स्थल के लिए आवश्यक अनुमति और एनओसी समय पर जमा न होने के कारण कार्यक्रम अभी तक मंजूरी नहीं मिल सकी है। सूत्रों की माने तो आयोजन टल सकता है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के अधिकारियों के मुताबिक आयोजन कराने वाली संस्था को स्मारक समिति के माध्यम से कई विभागों से एनओसी लेकर जमा करनी थी, लेकिन निर्धारित समय के भीतर दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इसी वजह से आयोजन स्थल पर कार्यक्रम की अनुमति अभी तक नहीं दी गई। तीन दिन के कार्यक्रम के लिए किया था आवेदन सूत्रों के मुताबिक आयोजकों की ओर से स्मारक स्थल पर तीन दिन के कार्यक्रम के लिए आवेदन किया गया था। इसके लिए करीब साढ़े चार लाख रुपए शुल्क भी जमा किया गया था। हालांकि, आवेदन के साथ जरूरी विभागीय एनओसी पूरी नहीं होने के कारण प्रक्रिया अधूरी रह गई। क्या होता है एनओसी का प्रोसेस किसी भी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए आयोजकों को संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना होता है। इसमें पुलिस, फायर विभाग, यातायात पुलिस, नगर निगम और अन्य संबंधित एजेंसियों की अनुमति शामिल होती है। इन विभागों की रिपोर्ट के आधार पर ही अंतिम अनुमति दी जाती है। स्मारक समिति की क्या होती है भूमिका एलडीए के अधीन आने वाले स्मारक और सार्वजनिक स्थलों पर किसी भी बड़े आयोजन की अनुमति स्मारक समिति के जरिए दी जाती है। समिति यह सुनिश्चित करती है कि आयोजन से सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, ट्रैफिक और परिसर की व्यवस्था प्रभावित न हो। कार्यक्रम के लिए क्या करना होता है अधिकारियों के अनुसार आयोजकों को पहले आवेदन करना होता है, निर्धारित शुल्क जमा करना होता है और सभी संबंधित विभागों से एनओसी लेकर स्मारक समिति को सौंपनी होती है। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही आयोजन की अंतिम मंजूरी दी जाती है।


