उत्तर प्रदेश क्षत्रिय लोक सेवक परिवार महासमिति ने क्षत्रिय पुरोधा श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में प्राचीन काल से आधुनिक युग तक के 25 क्षत्रिय पुरोधाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। समारोह की शुरुआत पुरोधाओं के चित्रों पर पुष्पांजलि और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने कहा कि यह आयोजन क्षत्रिय समाज की गौरवशाली परंपरा, शौर्य, बलिदान और सेवा भाव को स्मरण करने का अवसर है। उन्होंने आगे कहा कि क्षत्रियों ने रणभूमि के साथ-साथ नीति, मर्यादा, न्याय और कर्तव्यनिष्ठा से समाज को दिशा दी है।। 25 पुरोधाओं को श्रद्धांजलि देने की परंपरा शुरू की महासमिति के अध्यक्ष बाबा हरदेव सिंह ने पूर्वजों को याद करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि हम अपने पूर्वजों को स्मरण नहीं करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान को भूल जाएंगी। उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से महासमिति ने प्रतिवर्ष 25 पुरोधाओं को श्रद्धांजलि देने की परंपरा शुरू की है। समारोह में ऋषि विश्वामित्र, भगवान राम, महाराज इक्ष्वाकु, महाराज भगीरथ, महाराज हरिश्चंद्र, महाराज अग्रसेन, सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य, सम्राट अशोक, रानी दुर्गावती, सम्राट हर्षवर्धन, महाराज सुहेलदेव, वीर कुंवर सिंह, बंधू सिंह, राणा वेणी माधव सिंह बैस, महाराज गंगा सिंह, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली, राजा उदय प्रताप सिंह, राजा बलवंत सिंह, तिलकधारी सिंह, राजा युवराज दत्त सिंह, राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती सहित कुल 25 पुरोधाओं को नमन किया गया। पुरोधाओं के वंशजों को सम्मानित किया गया पद्मश्री साहित्यकार विद्या बिंदु सिंह ने इस आयोजन को पितृ ऋण चुकाने की परंपरा बताया। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ की कुलपति प्रो. लवली शर्मा और भातखंडे संस्कृत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने ऐसे आयोजनों को समाज के लिए प्रेरक बताया। कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले पुरोधाओं के वंशजों को सम्मानित किया गया। इनमें यूपी कॉलेज वाराणसी, आरबीएस कॉलेज आगरा और टीडी कॉलेज जौनपुर से जुड़े प्रतिनिधियों को सम्मान प्रदान किया गया। समिति के पदाधिकारियों और सहयोगियों को भी उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। अंत में, एसकेडी सिंह ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।


