सीवान के बिंदुसार में शहादत दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कामरेड चंद्रशेखर और कामरेड श्याम नारायण यादव को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर कामरेड चंद्रशेखर के स्मृति स्थल का विधिवत अनावरण किया गया, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए संघर्ष और जननिष्ठ राजनीति का प्रेरणास्रोत बनेगा। स्मृति स्थल का अनावरण धीरेंद्र झा, अदिति मिश्रा और सबा आफरीन ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, छात्रों और युवाओं की भागीदारी रही। मार्च में सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया
इसके बाद बिंदुसार से चंद्रशेखर गोलंबर तक युद्ध-विरोधी शांति मार्च निकाला गया। मार्च में सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया और “युद्ध नहीं, शांति चाहिए” तथा “लोकतंत्र बचाओ” जैसे नारों के साथ वैश्विक शांति और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का संदेश दिया। खुले सत्र में वक्ताओं ने देश और बिहार की वर्तमान राजनीतिक-आर्थिक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त की। अदिति मिश्रा ने कहा कि दुनिया आज युद्ध और आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही है, ऐसे समय में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा जरूरी है। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए शिक्षा के निजीकरण और बजट कटौती को छात्रों के हितों के खिलाफ बताया। शोषण के खिलाफ संगठित होकर संघर्ष तेज करना चाहिए
सबा आफरीन ने शहीदों की विरासत को याद करते हुए कहा कि युवा वर्ग को अन्याय और शोषण के खिलाफ संगठित होकर संघर्ष तेज करना चाहिए। वहीं मुख्य वक्ता धीरेंद्र झा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कॉरपोरेट हितों के दबाव में काम कर रही है, जिससे आम जनता पर महंगाई और बेरोजगारी का बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने बिहार की राजनीतिक स्थिति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य में सत्ता संतुलन को बिगाड़ने की कोशिश हो रही है, जिसका जनता लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगी। वक्ताओं ने जोर दिया कि बिहार में बेरोजगारी, पलायन, शिक्षा और स्वास्थ्य संकट गंभीर होते जा रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में शहीदों के सपनों को साकार करने और सामाजिक न्याय पर आधारित लोकतांत्रिक समाज के निर्माण के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया गया। सीवान के बिंदुसार में शहादत दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कामरेड चंद्रशेखर और कामरेड श्याम नारायण यादव को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर कामरेड चंद्रशेखर के स्मृति स्थल का विधिवत अनावरण किया गया, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए संघर्ष और जननिष्ठ राजनीति का प्रेरणास्रोत बनेगा। स्मृति स्थल का अनावरण धीरेंद्र झा, अदिति मिश्रा और सबा आफरीन ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, छात्रों और युवाओं की भागीदारी रही। मार्च में सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया
इसके बाद बिंदुसार से चंद्रशेखर गोलंबर तक युद्ध-विरोधी शांति मार्च निकाला गया। मार्च में सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया और “युद्ध नहीं, शांति चाहिए” तथा “लोकतंत्र बचाओ” जैसे नारों के साथ वैश्विक शांति और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का संदेश दिया। खुले सत्र में वक्ताओं ने देश और बिहार की वर्तमान राजनीतिक-आर्थिक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त की। अदिति मिश्रा ने कहा कि दुनिया आज युद्ध और आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही है, ऐसे समय में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा जरूरी है। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए शिक्षा के निजीकरण और बजट कटौती को छात्रों के हितों के खिलाफ बताया। शोषण के खिलाफ संगठित होकर संघर्ष तेज करना चाहिए
सबा आफरीन ने शहीदों की विरासत को याद करते हुए कहा कि युवा वर्ग को अन्याय और शोषण के खिलाफ संगठित होकर संघर्ष तेज करना चाहिए। वहीं मुख्य वक्ता धीरेंद्र झा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कॉरपोरेट हितों के दबाव में काम कर रही है, जिससे आम जनता पर महंगाई और बेरोजगारी का बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने बिहार की राजनीतिक स्थिति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य में सत्ता संतुलन को बिगाड़ने की कोशिश हो रही है, जिसका जनता लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगी। वक्ताओं ने जोर दिया कि बिहार में बेरोजगारी, पलायन, शिक्षा और स्वास्थ्य संकट गंभीर होते जा रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में शहीदों के सपनों को साकार करने और सामाजिक न्याय पर आधारित लोकतांत्रिक समाज के निर्माण के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया गया।


