आदिवासी गांव बना सरकारी नौकरी का ‘मॉडल’, 4 साल में लगी 78 सरकारी नौकरियाँ

आदिवासी गांव बना सरकारी नौकरी का ‘मॉडल’, 4 साल में लगी 78 सरकारी नौकरियाँ

गुजरात के आदिवासी क्षेत्र का छोटा सा गांव नानी भटलाव पूरे देश के लिए शिक्षा और करियर निर्माण का आदर्श बन गया है। युवा सरपंच अंकित चौधरी की दूरदर्शिता और ग्रामीणों के सहयोग से यहां शिक्षा की ऐसी पहल शुरू हुई, जिसने कई युवाओं का भविष्य बदल दिया। पिछले चार वर्ष में गांव और आसपास के क्षेत्र के 78 युवक-युवतियों ने पुलिस, शिक्षक और वन विभाग जैसी सरकारी नौकरियों में सफलता हासिल की है।

कोरोना काल में हुई परिवर्तन की शुरुआत

परिवर्तन की शुरुआत कोरोना काल में हुई, जब सरपंच ने 30,000 रुपए का ऋण लेकर प्राथमिक स्कूल में लाइब्रेरी शुरू की। पहले ही वर्ष में 8 युवाओं का कांस्टेबल और चार का एएसआई पद पर चयन हुआ। धीरे-धीरे यह पहल मज़बूत संस्था में बदल गई। आज ‘वतन प्रेम योजना’ और ‘मुकुल ट्रस्ट’ के सहयोग से 17.50 लाख रुपए की लागत से भव्य पुस्तकालय भवन तैयार है, जिसमें 24 घंटे अध्ययन की सुविधा, अलग-अलग बैठने की व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं का पूरा स्टडी मैटेरियल उपलब्ध है।

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