रोहतक में जाट एजुकेशन सोसाइटी के प्रधान गुलाब सिंह दिमाना व महासचिव नवदीप सिंह उर्फ मोनू पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कोषाध्यक्ष सुधीर हुड्डा धरने पर बैठ गए। धरने के दौरान प्रधान गुलाब सिंह दिमाना पहुंचे और कोषाध्यक्ष को समझाया, जिसके बाद धरने को खत्म किया गया। जाट एजुकेशन सोसाइटी के कोषाध्यक्ष सुधीर हुड्डा ने प्रधान गुलाब सिंह पर आरोप लगाया कि सभी संस्थानों में 5 जुलाई 2024 से अब तक बिना विज्ञापन के नियुक्तियां की गई है। इन नियुक्तियों की जांच संस्था हित में अत्यधिक आवश्यक है। प्रधान अपने रिश्तेदारों और परिवार के लोगों को बिना विज्ञापन रोजगार दे रहे हैं, जिसकी जांच जरूरी है। बिना नोटिस दिए कर्मचारियों को नौकरी से हटाया
सुधीर हुड्डा ने कहा कि प्रधान व महासचिव ने द्वेष भावना व बिना कारण बताओं नोटिस जारी किए, कर्मचारियों को नौकरी से हटाया, जो पूर्णतया अन्याय है। ऐसे फैसले वापिस लेने चाहिए। जाट कॉलेज व संस्था के अन्य कॉलेजों से करोड़ों रुपए के फंड्स का अपने स्तर पर अपने हिसाब से प्रयोग करवाना गैरकानूनी है, क्योंकि अभी तक गवर्निंग बॉडी ऑफ कॉलेजेज बनी ही नहीं है। इसकी विजिलेंस इन्क्वायरी होनी जरूरी है। सोसाइटी के खातों से चल रहा पैसों का लेनदेन
सुधीर हुड्डा ने आरोप लगाया कि सोसाइटी के खातों से पैसे का लेन देन प्रधान गुलाब सिंह और महासचिव नवदीप सिंह उर्फ मोनू के हस्ताक्षर से पिछले डेढ़ साल से चल रहा है। कोषाध्यक्ष और गवर्निंग बॉडी के कुछ सदस्यों से लेन देन सम्बन्धित दस्तावेज और सोसाइटी कार्यवाही रजिस्टर कभी भी नहीं दिखाया जाता, जो अधिकारों का हनन बनता है। इसकी जांच होनी चाहिए। करोड़ों रुपए से बनवाया नया ऑफिस
सुधीर हुड्डा ने आरोप लगाया कि सोसाइटी के वर्षों से चल रहे ऑफिस की जगह जाट कॉलेज में अपनी निजी सुविधा के हिसाब से लाखों रुपए खर्च कर नया ऑफिस कुछ समय पहले ही तैयार किया। करोड़ों रुपए का टेंडर नए मैनेजमेंट ऑफिस के निर्माण हेतु जारी कर दिया। फिजूलखर्ची की जांच होनी चाहिए। विद्यार्थियों के लिए क्लासरूम नहीं थे, ये पैसे वहां लगने चाहिए थे। प्रधान ने पहुंचकर गलती मानी, धरना कर दिया खत्म
सुधीर हुड्डा ने कहा कि धरना शुरू होने के दो घंटे बाद ही प्रधान गुलाब सिंह व महासचिव नवदीप सिंह पहुंचे और अपनी गलती मानते हुए कहा कि जो मामले उठाए है, उनकी जांच करवाएंगे। आगे से इन बातों का ध्यान रखेंगे। सुधीर हुड्डा ने कहा कि अगर जांच नहीं करवाई गई तो दोबारा धरने पर बैठ जाएंगे।


