डिलीवरी ब्वाय के खाते में 130 करोड़ रुपये का लेनदेन करने वाले बीकॉम फाइनल ईयर स्टूडेंट समेत दो आरोपियों को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है। पीड़ित डिलीवरी ब्वाय का कहना है कि पहले यह रकम 35 करोड़ रुपये थी, जब पुलिस ने बैंक खातों से जानकारी जुटाई तो यह रकम बढ़कर 130 करोड़ रुपये पहुंच गई। पुलिस आरोपियों के पास मौजूद म्यूल खातों की संख्या के बारे में जानकारी जुटा रही है। जिससे आरोपियों के नेटवर्क के बारे में जानकारी की जा सके। पकड़े गए आरोपियों ने शहर के साथ ही दिल्ली और प्रदेश की करीब 19 फर्जी कंपनियों के खाते से लेनदेन किया है। डीसीपी ने बताया कि अब तक की जांच में सामने आया है कि 9 माह में आरोपियों ने 130 करोड़ का ट्रांजेक्शन किया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से एक लैपटाप, रुपये गिनने की मशीन, 6 मोबाइल फोन, 28 चेकबुक, 19 एटीएम कार्ड बरामद किए हैं। विदेश से भाई का पैसा मंगाने के नाम पर लिया था खाता बेकनगंज के पेचबाग निवासी डिलीवरी मैन ओवेस का कुछ साल पहले गल्ला कारोबारी था, जिसके लिए उन्होंने बैंक में करंट अकाउंट खुलवाया था। व्यापार में नुकसान होने पर वह डिलीवरी बॉय का काम करने लगे। इस बीच उनकी मुलाकात बेकनगंज निवासी मो.अमान और चमनगंज निवासी मो.वसीउद्दीन उर्फ सरताज से हुई। इन लोगों ने विदेश में रहने वाले भाई से खाते में रुपये मंगवाने की बात कहकर किराए पर खाता लेकर चेकबुक व एटीएम ले लिया। जिसके एवज में उसे हर महीने 20 हजार रुपये का कमीशन दिया जाता था। आरोपियों ने 9 माह के अंदर उनके खाते में 35 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन कर डाला। जिसकी जानकारी होने पर ओवैस ने पुलिस से शिकायत की। डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सोमवार को जब बैंक खुलने पर खाते की जांच की गई तो 9 माह में 35 की जगह 130 करोड़ रुपये का लेनदेन करने की बात सामने आई। आरोपियों के पास से यह हुआ बरामद आरोपियों के पास ऐसे कितने म्यूल बैंक अकाउंट है, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। एजेंट अमान जहां बीकाम फाइनल की पढ़ाई कर रहा है, वहीं वसीउद्दीन उर्फ सरताज बीए पास है। आरोपियों के पास से दो फर्मों के बैनर 39 साइन की हुई चेक,दो किराएदारीनामा,दो एग्रीमेंट एक सहमति पत्र और तीन आधारकार्ड बरामद हुए हैं। वहीं पीड़ित ओवैस का कहना है कि उसके द्वारा दी गई चेकों से ज्यादा का उपयोग एजेंटों ने करते हुए करोड़ों का लेनदेन कर डाला है। प्रारंभिक जांच में रुपये साइबर ठगी या फर्जी फर्म बनाकर जीएसटी वापसी का अंदेशा जताया जा रहा है जिसकी जांच की जा रही है।


