वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर 300 किमी/घंटा से दौड़ेगी ट्रेन:केंद्रीय बजट में 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा, प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगा

वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर 300 किमी/घंटा से दौड़ेगी ट्रेन:केंद्रीय बजट में 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा, प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगा

केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश में सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है। इनमें वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर भी शामिल है। यह प्रस्तावित कॉरिडोर लगभग 700 किलोमीटर लंबा होगा और उत्तर प्रदेश, बिहार तथा पश्चिम बंगाल को जोड़ेगा। रेलवे विशेषज्ञों के अनुसार, इस मार्ग पर ट्रेनें 300 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकेंगी, जिससे वाराणसी से सिलीगुड़ी का सफर मात्र 2 घंटे 55 मिनट में पूरा हो सकेगा। प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगा यह कॉरिडोर बिहार के कई प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगा, जिनमें बक्सर, आरा, पटना, कटिहार और किशनगंज शामिल हैं। किशनगंज के लिए यह परियोजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे स्थानीय निवासियों को वाराणसी, पटना और सिलीगुड़ी जैसे शहरों तक तेज और सुविधाजनक यात्रा की सुविधा मिलेगी। इस परियोजना से यात्रियों के समय की बचत होगी और माल ढुलाई में भी सुधार आएगा। यह क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देगा, आर्थिक गतिविधियों को गति देगा और नए रोजगार के अवसर पैदा करेगा। किशनगंज जैसे सीमांचल क्षेत्र के विकास में यह कॉरिडोर मील का पत्थर साबित होगा, जो पूर्वोत्तर भारत को मुख्य रेल नेटवर्क से बेहतर ढंग से जोड़ेगा। भविष्य में इसे गुवाहाटी तक विस्तारित करने की भी योजना है। पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 11,486 करोड़ का आवंटन केंद्रीय बजट में रेलवे को मजबूत करने के लिए पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के तहत पूर्वोत्तर राज्यों के लिए रिकॉर्ड 11,486 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। यह राशि 2014 की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक है। वर्तमान में पूर्वोत्तर में 72,468 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाएं चल रही हैं। रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ये कॉरिडोर ‘ग्रोथ कनेक्टर्स’ के रूप में काम करेंगे और पर्यावरण-अनुकूल यात्रा को बढ़ावा देंगे। कुल मिलाकर सात कॉरिडोर (मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी) लगभग 4,000 किलोमीटर लंबे होंगे, जिन पर करीब 16 लाख करोड़ रुपये का निवेश अनुमानित है। किशनगंजवासियों के लिए यह घोषणा विकास की नई उम्मीद लेकर आई है। जल्द ही इसकी डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) और आगे की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश में सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है। इनमें वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर भी शामिल है। यह प्रस्तावित कॉरिडोर लगभग 700 किलोमीटर लंबा होगा और उत्तर प्रदेश, बिहार तथा पश्चिम बंगाल को जोड़ेगा। रेलवे विशेषज्ञों के अनुसार, इस मार्ग पर ट्रेनें 300 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकेंगी, जिससे वाराणसी से सिलीगुड़ी का सफर मात्र 2 घंटे 55 मिनट में पूरा हो सकेगा। प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगा यह कॉरिडोर बिहार के कई प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगा, जिनमें बक्सर, आरा, पटना, कटिहार और किशनगंज शामिल हैं। किशनगंज के लिए यह परियोजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे स्थानीय निवासियों को वाराणसी, पटना और सिलीगुड़ी जैसे शहरों तक तेज और सुविधाजनक यात्रा की सुविधा मिलेगी। इस परियोजना से यात्रियों के समय की बचत होगी और माल ढुलाई में भी सुधार आएगा। यह क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देगा, आर्थिक गतिविधियों को गति देगा और नए रोजगार के अवसर पैदा करेगा। किशनगंज जैसे सीमांचल क्षेत्र के विकास में यह कॉरिडोर मील का पत्थर साबित होगा, जो पूर्वोत्तर भारत को मुख्य रेल नेटवर्क से बेहतर ढंग से जोड़ेगा। भविष्य में इसे गुवाहाटी तक विस्तारित करने की भी योजना है। पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 11,486 करोड़ का आवंटन केंद्रीय बजट में रेलवे को मजबूत करने के लिए पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के तहत पूर्वोत्तर राज्यों के लिए रिकॉर्ड 11,486 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। यह राशि 2014 की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक है। वर्तमान में पूर्वोत्तर में 72,468 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाएं चल रही हैं। रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ये कॉरिडोर ‘ग्रोथ कनेक्टर्स’ के रूप में काम करेंगे और पर्यावरण-अनुकूल यात्रा को बढ़ावा देंगे। कुल मिलाकर सात कॉरिडोर (मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी) लगभग 4,000 किलोमीटर लंबे होंगे, जिन पर करीब 16 लाख करोड़ रुपये का निवेश अनुमानित है। किशनगंजवासियों के लिए यह घोषणा विकास की नई उम्मीद लेकर आई है। जल्द ही इसकी डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) और आगे की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।  

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