प्रयागराज जाने वाली ट्रेनों में दोनों ओर लगेंगे इंजन:वापसी में इंजन नहीं बदलना पड़ेगा, माघ मेला जाने वाले श्रद्धालुओं का बचेगा समय

प्रयागराज जाने वाली ट्रेनों में दोनों ओर लगेंगे इंजन:वापसी में इंजन नहीं बदलना पड़ेगा, माघ मेला जाने वाले श्रद्धालुओं का बचेगा समय

माघ मेले के दौरान ग्वालियर से प्रयागराज जाने वाली प्रमुख ट्रेनों में अब आगे और पीछे दोनों ओर इंजन लगाए जाएंगे। इस व्यवस्था से ट्रेनों को वापसी के समय इंजन बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे समय की बचत होगी और स्टेशनों पर ट्रेनों को लंबे समय तक खड़ा नहीं रखना पड़ेगा। रेलवे की इस पहल से यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। रेलवे के डिप्टी चीफ ऑपरेटिंग मैनेजर डीके जैन ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार ग्वालियर से प्रयागराज के बीच चलने वाली बुंदेलखंड एक्सप्रेस (11107-11108) और प्रयागराज एक्सप्रेस (11801-02) में 1 जनवरी से 16 फरवरी तक दोनों ओर इंजन लगाए जाएंगे। यह व्यवस्था माघ मेले के दौरान यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए लागू की गई है। उल्लेखनीय है कि प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर माघ मेले का आयोजन होता है, जहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का पावन संगम है। इस वर्ष माघ मेले की शुरुआत पौष पूर्णिमा 3 जनवरी से होगी। मेले के दौरान देशभर से लाखों श्रद्धालु संगम स्नान के लिए प्रयागराज पहुंचते हैं, जिससे ट्रेनों पर अत्यधिक दबाव रहता है और समय पर परिचालन चुनौती बन जाता है। दोनों ओर इंजन से समय की होगी बचत
रेलवे अधिकारियों के अनुसार दोनों ओर इंजन लगाने से ट्रेनों की रिवर्सिंग की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। आमतौर पर टर्मिनल या दिशा परिवर्तन वाले स्टेशनों पर इंजन बदलने में 20 से 30 मिनट या उससे अधिक समय लग जाता है। नई व्यवस्था से यह समय बचेगा और ट्रेनों का संचालन अधिक सुचारू रहेगा। यात्रियों को अनावश्यक देरी से भी राहत मिलेगी। इस फैसले से ग्वालियर के साथ-साथ झांसी, ओरछा, सतना और प्रयागराज जाने वाले यात्रियों को लाभ मिलेगा। ट्रेनें हुईं फुल, अतिरिक्त कोच लगाए जाएंगे
माघ मेले के दौरान प्रयागराज जाने वाले यात्रियों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। बड़ी संख्या में यात्री रिजर्वेशन करा रहे हैं। कई तारीखों में ट्रेनों में सीटें फुल हो चुकी हैं और नोरूम की स्थिति बन गई है, जबकि अन्य तारीखों में वेटिंग लंबी हो गई है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यात्रियों की भीड़ को देखते हुए ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगाने के निर्देश दिए गए हैं। स्लीपर और एसी कोच आने वाले दिनों में लगभग फुल हो चुके हैं।

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