बिहार के हृदयस्थल में बुनियादी ढांचे के विकास का एक नया अध्याय जुड़ चुका है। गंगा नदी पर बेगूसराय (सिमरिया) और पटना (मोकामा) को जोड़ने वाला बहुप्रतीक्षित नया डबल ट्रैक रेल पुल अब पूरी तरह से तैयार है। यह सिर्फ पत्थर और लोहे का ढांचा नहीं है। बल्कि उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच व्यापार, संस्कृति और कनेक्टिविटी का नई सहारा हैं। इस पुल की खासियत है कि रेल की रफ्तार इस पर कम नहीं होगी और 160 की स्पीड से चलेगी। दिल्ली जाने में भी आधा घंटा कम समय लगेगा और पुल को ऐसे तैयार किया गया है कि भूंकप और बाढ़ को ये आसानी से झेल सकेगा। सालों के इंतजार और आधुनिक इंजीनियरिंग की चुनौतियों को पार करते हुए इस पुल के 12 पीलर पर ट्रैक बिछाया जा चुका है और काम तेजी से चल रहा है। गंगा नदी पर राजेन्द्र पुल के समानांतर बन रहे डबल ट्रैक रेल पुल का निर्माण काम साल 2018 में इरकॉन की ओर से एफकॉन एजेंसी को सौंपा गया था। 2020 से पुल निर्माण की रफ्तार पकड़ने के बाद 26 जनवरी 2026 में पुल बनकर तैयार हो गया। करीब 1700 करोड़ की लागत से 1.86 किलोमीटर लंबा डबल ट्रैक रेल पुल का निर्माण कर रहे एफकॉन एजेंसी को मार्च 2026 तक हेंड ओवर करना है। इसके बाद जून 2026 तक पुल को चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। 160 की रफ्तार से गुजरेगी ट्रेनें पुल की सौंदर्यीकरण को लेकर हाथीदह सिरे से इसका पेंटिंग का काम शुरू कर दिया गया है। पुल निर्माण पूरा होते ही इसमें बचे हुए रेलवे ट्रैक को बिछाने, बिजली, सिंगनल, केबल समेत संबंधित अन्य काम भी युद्धस्तर पर किया जा रहा है। इसके साथ ही रेलवे की ओर से सेफ्टी की भी जांच की जा रही है। गंगा नदी पर बने डबल ट्रैक रेल पुल पर 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेन को दौड़ने की क्षमता वाले उक्त पुल की खासियत होगी कि ट्रेन के पुल में प्रवेश करने के दौरान भी इसकी स्पीड में कोई कमी नहीं आएगी। पुल में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग आमतौर पर देखा जाता है कि अधिकतर पुल में ट्रेन को प्रवेश करने के साथ ही उसकी स्पीड कम हो जाती है। लेकिन इस पुल में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे पुल में ट्रेन के प्रवेश करने पर स्पीड कम नहीं होगी। वेल फाउंडेशन तकनीक का उपयोग कर इसके पिलरों को गहराई तक धंसाया गया है, जिससे भीषण भूकंप और बाढ़ को झेल सके। पुल का 18 पाया जमीन से 65-70 मीटर गहराई पर है। इसमें 17 स्पेन हैं, जिसमें 32 मीटर का दो, 123 मीटर का 13 और 110 मीटर का एक स्पेन है। वहीं, 123 मीटर का स्पेन एक हजार 450 मैट्रिक टन क्षमता है। प्रोजेक्ट की पृष्ठभूमि साल 1959 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने सिमरिया और मोकामा के बीच देश के सबसे पहले रेल-सह-सड़क पुल का उद्घाटन किया था। छह दशकों तक राजेंद्र सेतु ने बिहार की जीवनरेखा के रूप में काम किया। लेकिन समय बीतने के साथ, पुल पुराना हो गया और भारी मालगाड़ियों का बोझ सहने की उसकी क्षमता कम होने लगी। पुराना पुल सिंगल रेल लाइन था, जिससे ट्रेनों को घंटों क्रॉसिंग के लिए रुकना पड़ता था। पूर्व मध्य रेलवे के लिए यह सेक्शन बॉटलनेक बन गया था। इसी को देखते हुए नए रेल पुल के निर्माण को मंजूरी दी गई। यह नया पुल अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर बनाया गया है, जो अगले 100 साल की जरूरतों को ध्यान में रख कर बनाया गया है। जो भारी मालगाड़ियों और हाई-स्पीड वंदे भारत जैसी ट्रेनों के अनुकूल है। इस पुल के शुरू होने से आम जनता और यात्रियों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव आने वाले हैं। अब तक ट्रेनों को पुल पार करने के लिए बाहरी स्टेशनों पर घंटों इंतजार करना पड़ता था। डबल ट्रैक होने से अब ट्रेनें बिना रुके और तेज गति से गंगा पार कर सकेंगी। दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी की ओर जाने वाली ट्रेनों के समय में 30 से 45 मिनट की कमी आएगी। होगी आर्थिक और व्यापारिक क्रांति बेगूसराय को बिहार की औद्योगिक राजधानी कहा जाता है। बरौनी रिफाइनरी (IOCL), खाद कारखाना (HURL) और थर्मल पावर स्टेशन (NTPC) के लिए यह पुल एक गेम चेंजर साबित होगा। कोयला, पेट्रोलियम और उर्वरक की ढुलाई अब बिना किसी रुकावट के हो सकेगी। इससे लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी। बेहतर कनेक्टिविटी हमेशा नए उद्योगों और निवेश को आकर्षित करती है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। ट्रैक की क्षमता बढ़ने से रेल मंत्रालय इस रूट पर नई एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनें शुरू कर पाएगा। बनाया गया है तीन आरओआर पुल निर्माण अभियंता ने बताया कि डबल रेल ट्रैक पुल के उत्तरी छोड़ में सिमरिया-बरौनी तो दक्षिणी छोड़ लखीसराय जाने वाले रूट में रामपुर-डुमरा और पटना की ओर जाने वाले रूट में औंटा-टाल में मिलेगी। औंटा टाल, रामपुर डुमरा व हाथीदह में तीन जगह आरओआर का निर्माण किया गया है। जबकि, कुल आठ मंझले पुल-पुलिया का भी निर्माण किया गया। हाथीदह में एनएच-80 पर एक आरयूबी (रोड अंडर ब्रिज) का निर्माण तथा दो जगह आरओबी (रेल ऊपरी ब्रिज) हाथीदह जंक्शन एवं औंटा के पास बनाया गया है। सामरिक दृष्टि से साबित होगा मील का पत्थर राजेन्द्र सेतु के समानांतर निर्माणाधीन हाथीदह-सिमरिया दो लेन रेल पुल देश की सुरक्षा को लेकर भी मिल का पत्थर साबित होगा। अधिकारियों ने बताया कि चीन समेत देश के अन्य सीमा पर जरूरत पड़ने पर तोप समेत अन्य लड़ाकू सामग्री सड़क परिवहन से तेज गति में नहीं पहुंच पाता है। डबल ट्रैक रेल पुल निर्माण हो जाने से जरूरत पड़ने पर रेल मार्ग से तेज गति में देश के सीमा पर सुरक्षा का सभी उपकरण पहुंच जाएगा। राजेन्द्र पुल स्टेशन पर बन रहा तीन प्लेटफार्म सिमरिया गंगा धाम के करीब राजेन्द्र पुल स्टेशन पर कुल पांच रेल ट्रैक एवं तीन प्लेटफार्म के साथ दो फुट ओवर ब्रिज बनाया जा रहा है। छह सौ मीटर लंबे प्लेटफार्म पर एक सौ मीटर लंबा एवं नौ मीटर चौड़ा दो मंजिला स्टेशन भवन बन रहा है। इसके अलावा स्टेशन परिसर में ही स्टॉल, फूड प्लाजा, काम्प्लेक्स, दुकानें, एटीएम, शेड, पर्याप्त मात्रा में प्रकाश की व्यवस्था, यात्रियों को समान चढ़ाने के लिए रैम्प (स्लोपिंग सीढ़ी) और पार्किंग आदि का भी निर्माण चल रहा है। हाथीदह जंक्शन के ऊपरी ट्रैक पर बन रहा चार प्लेटफार्म दो लेन रेल पुल के साथ हाथीदह जंक्शन के ऊपरी रेल ट्रैक पर आधुनिक सुविधाओं से लैस करीब चार सौ मीटर लंबा चार रेल ट्रैक का निर्माण किया जा रहा है। इसमें दो रेल ट्रैक मेन लाइन एवं दो रेल ट्रैक लूप लाइन की होगी। प्लेटफार्म पर चढ़ने के लिए लिफ्ट सहित सभी अत्याधुनिक सुविधाएं होगी। अभी हाथीदह जंक्शन के तीन नंबर प्लेटफार्म पर एक ही रेल ट्रैक एवं कोई सुविधा नहीं रहने के कारण यात्रियों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। तीन नंबर प्लेटफार्म से गुजरने वाली लंबी ट्रेन को हाथीदह जंक्शन मेन लाइन पर आरओआर रहने के कारण दो बार रुकनी पड़ती है। बजेगी बिहार के उज्ज्वल भविष्य की सीटी विशेषज्ञों का कहना है यह पुल भारतीय रेलवे के उस विजन का हिस्सा है, जहां हम बिहार को केवल लेबर हब नहीं, बल्कि एक लॉजिस्टिक हब के रूप में देख रहे हैं। बेगूसराय और मोकामा के बीच नए रेल पुल का निर्माण केवल एक भौतिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह बिहार के आत्मविश्वास का प्रतीक है। यह पुल दूरी कम करेगा, दिलों को जोड़ेगा और विकास के पहिये को रफ्तार देगा। अब वह दिन दूर नहीं जब सिमरिया के किनारे से गुजरती ट्रेनें बिहार के उज्ज्वल भविष्य की सीटी बजाएंगी। सिमरिया घाट पर साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। नया पुल तीर्थयात्रियों के लिए सफर को आरामदायक बनाएगा। बिहार के हृदयस्थल में बुनियादी ढांचे के विकास का एक नया अध्याय जुड़ चुका है। गंगा नदी पर बेगूसराय (सिमरिया) और पटना (मोकामा) को जोड़ने वाला बहुप्रतीक्षित नया डबल ट्रैक रेल पुल अब पूरी तरह से तैयार है। यह सिर्फ पत्थर और लोहे का ढांचा नहीं है। बल्कि उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच व्यापार, संस्कृति और कनेक्टिविटी का नई सहारा हैं। इस पुल की खासियत है कि रेल की रफ्तार इस पर कम नहीं होगी और 160 की स्पीड से चलेगी। दिल्ली जाने में भी आधा घंटा कम समय लगेगा और पुल को ऐसे तैयार किया गया है कि भूंकप और बाढ़ को ये आसानी से झेल सकेगा। सालों के इंतजार और आधुनिक इंजीनियरिंग की चुनौतियों को पार करते हुए इस पुल के 12 पीलर पर ट्रैक बिछाया जा चुका है और काम तेजी से चल रहा है। गंगा नदी पर राजेन्द्र पुल के समानांतर बन रहे डबल ट्रैक रेल पुल का निर्माण काम साल 2018 में इरकॉन की ओर से एफकॉन एजेंसी को सौंपा गया था। 2020 से पुल निर्माण की रफ्तार पकड़ने के बाद 26 जनवरी 2026 में पुल बनकर तैयार हो गया। करीब 1700 करोड़ की लागत से 1.86 किलोमीटर लंबा डबल ट्रैक रेल पुल का निर्माण कर रहे एफकॉन एजेंसी को मार्च 2026 तक हेंड ओवर करना है। इसके बाद जून 2026 तक पुल को चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। 160 की रफ्तार से गुजरेगी ट्रेनें पुल की सौंदर्यीकरण को लेकर हाथीदह सिरे से इसका पेंटिंग का काम शुरू कर दिया गया है। पुल निर्माण पूरा होते ही इसमें बचे हुए रेलवे ट्रैक को बिछाने, बिजली, सिंगनल, केबल समेत संबंधित अन्य काम भी युद्धस्तर पर किया जा रहा है। इसके साथ ही रेलवे की ओर से सेफ्टी की भी जांच की जा रही है। गंगा नदी पर बने डबल ट्रैक रेल पुल पर 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेन को दौड़ने की क्षमता वाले उक्त पुल की खासियत होगी कि ट्रेन के पुल में प्रवेश करने के दौरान भी इसकी स्पीड में कोई कमी नहीं आएगी। पुल में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग आमतौर पर देखा जाता है कि अधिकतर पुल में ट्रेन को प्रवेश करने के साथ ही उसकी स्पीड कम हो जाती है। लेकिन इस पुल में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे पुल में ट्रेन के प्रवेश करने पर स्पीड कम नहीं होगी। वेल फाउंडेशन तकनीक का उपयोग कर इसके पिलरों को गहराई तक धंसाया गया है, जिससे भीषण भूकंप और बाढ़ को झेल सके। पुल का 18 पाया जमीन से 65-70 मीटर गहराई पर है। इसमें 17 स्पेन हैं, जिसमें 32 मीटर का दो, 123 मीटर का 13 और 110 मीटर का एक स्पेन है। वहीं, 123 मीटर का स्पेन एक हजार 450 मैट्रिक टन क्षमता है। प्रोजेक्ट की पृष्ठभूमि साल 1959 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने सिमरिया और मोकामा के बीच देश के सबसे पहले रेल-सह-सड़क पुल का उद्घाटन किया था। छह दशकों तक राजेंद्र सेतु ने बिहार की जीवनरेखा के रूप में काम किया। लेकिन समय बीतने के साथ, पुल पुराना हो गया और भारी मालगाड़ियों का बोझ सहने की उसकी क्षमता कम होने लगी। पुराना पुल सिंगल रेल लाइन था, जिससे ट्रेनों को घंटों क्रॉसिंग के लिए रुकना पड़ता था। पूर्व मध्य रेलवे के लिए यह सेक्शन बॉटलनेक बन गया था। इसी को देखते हुए नए रेल पुल के निर्माण को मंजूरी दी गई। यह नया पुल अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर बनाया गया है, जो अगले 100 साल की जरूरतों को ध्यान में रख कर बनाया गया है। जो भारी मालगाड़ियों और हाई-स्पीड वंदे भारत जैसी ट्रेनों के अनुकूल है। इस पुल के शुरू होने से आम जनता और यात्रियों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव आने वाले हैं। अब तक ट्रेनों को पुल पार करने के लिए बाहरी स्टेशनों पर घंटों इंतजार करना पड़ता था। डबल ट्रैक होने से अब ट्रेनें बिना रुके और तेज गति से गंगा पार कर सकेंगी। दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी की ओर जाने वाली ट्रेनों के समय में 30 से 45 मिनट की कमी आएगी। होगी आर्थिक और व्यापारिक क्रांति बेगूसराय को बिहार की औद्योगिक राजधानी कहा जाता है। बरौनी रिफाइनरी (IOCL), खाद कारखाना (HURL) और थर्मल पावर स्टेशन (NTPC) के लिए यह पुल एक गेम चेंजर साबित होगा। कोयला, पेट्रोलियम और उर्वरक की ढुलाई अब बिना किसी रुकावट के हो सकेगी। इससे लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी। बेहतर कनेक्टिविटी हमेशा नए उद्योगों और निवेश को आकर्षित करती है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। ट्रैक की क्षमता बढ़ने से रेल मंत्रालय इस रूट पर नई एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनें शुरू कर पाएगा। बनाया गया है तीन आरओआर पुल निर्माण अभियंता ने बताया कि डबल रेल ट्रैक पुल के उत्तरी छोड़ में सिमरिया-बरौनी तो दक्षिणी छोड़ लखीसराय जाने वाले रूट में रामपुर-डुमरा और पटना की ओर जाने वाले रूट में औंटा-टाल में मिलेगी। औंटा टाल, रामपुर डुमरा व हाथीदह में तीन जगह आरओआर का निर्माण किया गया है। जबकि, कुल आठ मंझले पुल-पुलिया का भी निर्माण किया गया। हाथीदह में एनएच-80 पर एक आरयूबी (रोड अंडर ब्रिज) का निर्माण तथा दो जगह आरओबी (रेल ऊपरी ब्रिज) हाथीदह जंक्शन एवं औंटा के पास बनाया गया है। सामरिक दृष्टि से साबित होगा मील का पत्थर राजेन्द्र सेतु के समानांतर निर्माणाधीन हाथीदह-सिमरिया दो लेन रेल पुल देश की सुरक्षा को लेकर भी मिल का पत्थर साबित होगा। अधिकारियों ने बताया कि चीन समेत देश के अन्य सीमा पर जरूरत पड़ने पर तोप समेत अन्य लड़ाकू सामग्री सड़क परिवहन से तेज गति में नहीं पहुंच पाता है। डबल ट्रैक रेल पुल निर्माण हो जाने से जरूरत पड़ने पर रेल मार्ग से तेज गति में देश के सीमा पर सुरक्षा का सभी उपकरण पहुंच जाएगा। राजेन्द्र पुल स्टेशन पर बन रहा तीन प्लेटफार्म सिमरिया गंगा धाम के करीब राजेन्द्र पुल स्टेशन पर कुल पांच रेल ट्रैक एवं तीन प्लेटफार्म के साथ दो फुट ओवर ब्रिज बनाया जा रहा है। छह सौ मीटर लंबे प्लेटफार्म पर एक सौ मीटर लंबा एवं नौ मीटर चौड़ा दो मंजिला स्टेशन भवन बन रहा है। इसके अलावा स्टेशन परिसर में ही स्टॉल, फूड प्लाजा, काम्प्लेक्स, दुकानें, एटीएम, शेड, पर्याप्त मात्रा में प्रकाश की व्यवस्था, यात्रियों को समान चढ़ाने के लिए रैम्प (स्लोपिंग सीढ़ी) और पार्किंग आदि का भी निर्माण चल रहा है। हाथीदह जंक्शन के ऊपरी ट्रैक पर बन रहा चार प्लेटफार्म दो लेन रेल पुल के साथ हाथीदह जंक्शन के ऊपरी रेल ट्रैक पर आधुनिक सुविधाओं से लैस करीब चार सौ मीटर लंबा चार रेल ट्रैक का निर्माण किया जा रहा है। इसमें दो रेल ट्रैक मेन लाइन एवं दो रेल ट्रैक लूप लाइन की होगी। प्लेटफार्म पर चढ़ने के लिए लिफ्ट सहित सभी अत्याधुनिक सुविधाएं होगी। अभी हाथीदह जंक्शन के तीन नंबर प्लेटफार्म पर एक ही रेल ट्रैक एवं कोई सुविधा नहीं रहने के कारण यात्रियों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। तीन नंबर प्लेटफार्म से गुजरने वाली लंबी ट्रेन को हाथीदह जंक्शन मेन लाइन पर आरओआर रहने के कारण दो बार रुकनी पड़ती है। बजेगी बिहार के उज्ज्वल भविष्य की सीटी विशेषज्ञों का कहना है यह पुल भारतीय रेलवे के उस विजन का हिस्सा है, जहां हम बिहार को केवल लेबर हब नहीं, बल्कि एक लॉजिस्टिक हब के रूप में देख रहे हैं। बेगूसराय और मोकामा के बीच नए रेल पुल का निर्माण केवल एक भौतिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह बिहार के आत्मविश्वास का प्रतीक है। यह पुल दूरी कम करेगा, दिलों को जोड़ेगा और विकास के पहिये को रफ्तार देगा। अब वह दिन दूर नहीं जब सिमरिया के किनारे से गुजरती ट्रेनें बिहार के उज्ज्वल भविष्य की सीटी बजाएंगी। सिमरिया घाट पर साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। नया पुल तीर्थयात्रियों के लिए सफर को आरामदायक बनाएगा।


