भास्कर न्यूज|दरभंगा वरिष्ठ पत्रकार प्रो हरिनारायण सिंह ने कहा कि परंपरागत पत्रकारिता के पास अभी भी वह गहराई, विश्वसनीयता और नैतिकता है, जो डिजिटल मीडिया को चुनौती दे सकती है। आधुनिक युग में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के तीव्र विकास ने समाज के हर क्षेत्र को प्रभावित किया है और पत्रकारिता भी इससे अछूती नहीं रही। वे सोमवार को यहां वरिष्ठ पत्रकार स्व रामगोविन्द प्रसाद जी की 30वीं पुण्यतिथि पर “डिजिटल युग मे परम्परागत पत्रकारिता की विश्वसनीयता” विषयक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। पहले जहां समाचार संगठनों के पास सूचना के प्रसार का एकाधिकार था, वहीं अब कोई भी व्यक्ति अपने स्मार्टफोन के माध्यम से समाचार बना सकता है और उसे विश्व भर में फैला सकता है। समाचार संगठनों में प्रशिक्षित पत्रकार और सम्पादक यह सुनिश्चित करते थे कि जनता तक केवल सत्यापित और सटीक जानकारी ही पहुंचे। इसके विपरीत, सोशल मीडिया पर सूचनाएं बिना किसी सम्पादकीय निगरानी के प्रसारित होती हैं। यहां झूठी खबरें (फेक न्यूज़), अफवाहें और गलत सूचनाएं तेजी से फैलती हैं। पत्रकारिता कभी वृद्ध नहीं होती संगोष्ठी को वरिष्ठ पत्रकार कृष्ण कुमार, रविभूषण चतुर्वेदी, गंगेश मिश्र, विष्णु कुमार झा ने कहा कि पत्रकारिता कभी वृद्ध नहीं होती वो बदलती रहती है। सूचना, उपयोगिता और रोचकता ये तीन पहले भी थे और आज के डिजिटल युग में भी उसी तरह से विद्यमान है। लंबे लेख, खोजी पत्रकारिता और डेटा-आधारित कहानियां पाठकों को आकर्षित कर सकती हैं, जो डिजिटल मीडिया के युग मे उपलब्ध नहीं होतीं। स्वर्गीय रामगोविन्द प्रसाद गुप्ता के तैल चित्र पर अतिथियों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। सेमिनार का सफल संचालन डॉ एडीएन सिंह ने किया। अतिथियों का स्वागत वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप कुमार गुप्ता ने किया वहीं, धन्यवाद ज्ञापन पत्रकार प्रमोद गुप्ता ने किया। पत्रकारिता की गुणवत्ता पर असर पड़ता : डॉ तिवारी दरभंगा इंजीनियरिंग कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ संदीप तिवारी ने अब सोशल मीडिया पर समाचार सेकंडों में विश्व भर में फैल जाता है। इस तीव्रता ने परम्परागत पत्रकारिता पर दबाव डाला है कि वे भी तुरंत समाचार प्रदान करें। इस जल्दबाजी में तथ्यों की जांच और गहन विश्लेषण की प्रक्रिया अक्सर प्रभावित होती है, जिससे पत्रकारिता की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। भास्कर न्यूज|दरभंगा वरिष्ठ पत्रकार प्रो हरिनारायण सिंह ने कहा कि परंपरागत पत्रकारिता के पास अभी भी वह गहराई, विश्वसनीयता और नैतिकता है, जो डिजिटल मीडिया को चुनौती दे सकती है। आधुनिक युग में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के तीव्र विकास ने समाज के हर क्षेत्र को प्रभावित किया है और पत्रकारिता भी इससे अछूती नहीं रही। वे सोमवार को यहां वरिष्ठ पत्रकार स्व रामगोविन्द प्रसाद जी की 30वीं पुण्यतिथि पर “डिजिटल युग मे परम्परागत पत्रकारिता की विश्वसनीयता” विषयक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। पहले जहां समाचार संगठनों के पास सूचना के प्रसार का एकाधिकार था, वहीं अब कोई भी व्यक्ति अपने स्मार्टफोन के माध्यम से समाचार बना सकता है और उसे विश्व भर में फैला सकता है। समाचार संगठनों में प्रशिक्षित पत्रकार और सम्पादक यह सुनिश्चित करते थे कि जनता तक केवल सत्यापित और सटीक जानकारी ही पहुंचे। इसके विपरीत, सोशल मीडिया पर सूचनाएं बिना किसी सम्पादकीय निगरानी के प्रसारित होती हैं। यहां झूठी खबरें (फेक न्यूज़), अफवाहें और गलत सूचनाएं तेजी से फैलती हैं। पत्रकारिता कभी वृद्ध नहीं होती संगोष्ठी को वरिष्ठ पत्रकार कृष्ण कुमार, रविभूषण चतुर्वेदी, गंगेश मिश्र, विष्णु कुमार झा ने कहा कि पत्रकारिता कभी वृद्ध नहीं होती वो बदलती रहती है। सूचना, उपयोगिता और रोचकता ये तीन पहले भी थे और आज के डिजिटल युग में भी उसी तरह से विद्यमान है। लंबे लेख, खोजी पत्रकारिता और डेटा-आधारित कहानियां पाठकों को आकर्षित कर सकती हैं, जो डिजिटल मीडिया के युग मे उपलब्ध नहीं होतीं। स्वर्गीय रामगोविन्द प्रसाद गुप्ता के तैल चित्र पर अतिथियों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। सेमिनार का सफल संचालन डॉ एडीएन सिंह ने किया। अतिथियों का स्वागत वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप कुमार गुप्ता ने किया वहीं, धन्यवाद ज्ञापन पत्रकार प्रमोद गुप्ता ने किया। पत्रकारिता की गुणवत्ता पर असर पड़ता : डॉ तिवारी दरभंगा इंजीनियरिंग कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ संदीप तिवारी ने अब सोशल मीडिया पर समाचार सेकंडों में विश्व भर में फैल जाता है। इस तीव्रता ने परम्परागत पत्रकारिता पर दबाव डाला है कि वे भी तुरंत समाचार प्रदान करें। इस जल्दबाजी में तथ्यों की जांच और गहन विश्लेषण की प्रक्रिया अक्सर प्रभावित होती है, जिससे पत्रकारिता की गुणवत्ता पर असर पड़ता है।


