गोरखपुर में शनिवार को राज्य कर विभाग द्वारा व्यापारी संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जीएसटी से जुड़े नए सुधारों की जानकारी देना और व्यापारियों की समस्याओं पर सीधे संवाद कर समाधान निकालना रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अजय कुमार राय, अपर आयुक्त, गोरखपुर मंडल रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में अखिलेश कुमार सिंह, संयुक्त आयुक्त, राज्य कर मुख्यालय, लखनऊ, नितिन कुमार जायसवाल, अध्यक्ष समस्त व्यापार मंडल, गोरखपुर, अनिल अग्रवाल, वाइस चेयरमैन आईसीएआई गोरखपुर और उमेश मद्धेशिया, पूर्व अध्यक्ष किराना कमेटी, गोरखपुर उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संजय कुमार, प्रभारी अपर आयुक्त ग्रेड-1, राज्य कर, गोरखपुर जोन ने की। व्यापारी संवाद कार्यक्रम का विषय प्रवर्तन विवेक सिंह, अपर आयुक्त ग्रेड-2, राज्य कर, गोरखपुर द्वारा किया गया। कार्यक्रम का मुख्य फोकस जीएसटी 2.0 सुधार, पंजीकरण प्रक्रिया, रिटर्न फाइलिंग, पंजीकरण के लाभ, समाधान योजना, ईंट भट्ठा राजस्व, टीडीएस/टीसीएस और मुख्यमंत्री व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना पर रहा। इन सभी विषयों की जानकारी पीपीटी के माध्यम से दी गई, जिसका संयोजन अभिषेक कुमार पाण्डेय, सहायक आयुक्त ने किया। कार्यक्रम में राज्य कर विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। साथ ही गोरखपुर के प्रमुख व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। व्यापारी प्रतिनिधियों ने संवाद के दौरान कई महत्वपूर्ण सुझाव और मांगें रखीं। इनमें समाधान योजना का टर्नओवर 1.5 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ किए जाने, कर वादों की सुनवाई में व्यापारी को व्यक्तिगत रूप से सुनने का अवसर, सुनवाई से संबंधित नोटिस की सीधी तामीली, व्यापारियों के साथ हर माह बैठक, एक राष्ट्र–एक कर व्यवस्था के बाद भी मंडी टैक्स वसूली का मुद्दा, व्यापारियों की समस्याओं के समाधान के लिए हेल्प डेस्क की स्थापना, सचल दस्त के दौरान वाहन चालकों के लिए कार्यालय में रुकने की व्यवस्था, जीएमटी प्रणाली में अभिलेखीय त्रुटियों का विभागीय स्तर पर सुधार तथा व्यापारिक अभिलेखों के रख-रखाव की अवधि तय करने जैसे सुझाव शामिल रहे। राज्य कर विभाग के अधिकारियों ने व्यापारियों को आश्वस्त किया कि विभागीय स्तर पर आने वाली समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान किया जाएगा। साथ ही जीएसटी अधिनियम में सुधार से जुड़े सुझावों को मुख्यालय स्तर पर भेजकर आवश्यक कार्यवाही कराई जाएगी। व्यापारिक संगठनों की मांग के अनुसार भविष्य में भी ऐसे व्यापारी संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।


