Bikaneri Bhujia: जयपुर. अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और मिडिल ईस्ट में बिगड़ते हालात का असर अब भारत के पारंपरिक खाद्य उद्योगों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। खासतौर पर राजस्थान के बीकानेर का प्रसिद्ध नमकीन उद्योग इस वैश्विक संकट की चपेट में आ गया है। बीकानेरी भुजिया, पापड़ और मसालों के निर्यात में भारी बाधाएं सामने आ रही हैं, जिससे व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है।
निर्यातकों के मुताबिक, पहले जो माल समुद्री रास्ते से लगभग 30 दिनों में खाड़ी और यूरोपीय देशों तक पहुंच जाता था, अब वही शिपमेंट 60 दिन तक का समय ले रहा है। इसका मुख्य कारण जहाजों द्वारा सुरक्षित लेकिन लंबा मार्ग अपनाना है, जिससे समय और लागत दोनों में वृद्धि हो रही है। कंटेनरों की कमी और उनकी धीमी आवाजाही ने समस्या को और गंभीर बना दिया है।
बीकानेर के नमकीन उद्योग से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि माल ढुलाई शुल्क में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसके साथ ही कच्चे माल की कीमतों में भी तेजी आई है। खाद्य तेल, विशेष रूप से ताड़ और सोयाबीन तेल की कीमतों में पिछले एक महीने में करीब 20 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे उत्पादन लागत पर सीधा असर पड़ा है।
निर्यातकों के अनुसार, “लगातार बढ़ती लागत और शिपमेंट में देरी के कारण व्यापार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। मांग तो बनी हुई है, लेकिन समय पर सप्लाई न होने से नुकसान उठाना पड़ रहा है।” वहीं, एक अन्य निर्यातक राजेश जिंदल ने बताया कि आयात और निर्यात दोनों प्रभावित हो रहे हैं, जिससे नकदी प्रवाह पर भी असर पड़ रहा है और व्यापारियों को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है।
बीकानेर से हर महीने लगभग 15 से 20 कंटेनर भुजिया, पापड़ और अन्य नमकीन उत्पादों के निर्यात होते हैं, जबकि अन्य सामानों के करीब 60 कंटेनर भी विदेश भेजे जाते हैं। लेकिन मौजूदा हालात में करोड़ों रुपए का माल बंदरगाहों पर अटका हुआ है या रास्ते में देरी का शिकार हो रहा है।
इसके अलावा पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों ने पैकेजिंग लागत को भी 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। इससे छोटे और मध्यम स्तर के उद्योगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
बीकानेरी स्नैक्स की मांग खाड़ी देशों के साथ-साथ यूरोप में भी लगातार बनी हुई है। इन उत्पादों का निर्यात ईरान, इराक, ओमान, यूएई, कतर और बहरीन के अलावा ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन जैसे देशों में होता है। लेकिन सप्लाई चेन में आई रुकावटों के कारण यह व्यापार फिलहाल मंदी के दौर से गुजर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो इसका असर लंबे समय तक बीकानेर के नमकीन उद्योग पर बना रह सकता है। ऐसे में व्यापारियों को वैकल्पिक बाजार और नए निर्यात मार्ग तलाशने की जरूरत होगी, ताकि इस संकट से उबरा जा सके।


