हिमाचल में टूरिज्म एक्टिव पर बैन:सिस्सू–कोकसर में टीवी-रेडियो और मोबाइल नहीं बजेंगे, 3 दिन बात नहीं करेंगे ग्रामीण, देवता स्वर्ग प्रवास पर

हिमाचल में टूरिज्म एक्टिव पर बैन:सिस्सू–कोकसर में टीवी-रेडियो और मोबाइल नहीं बजेंगे, 3 दिन बात नहीं करेंगे ग्रामीण, देवता स्वर्ग प्रवास पर

हिमाचल प्रदेश के ट्राइबल जिला लाहौल-स्पीति की सिस्सू और कोकसर पंचायत में 20 जनवरी से टूरिज्म एक्टिविटी पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया है। 28 फरवरी तक यानी 40 दिनों के दौरान न सिर्फ बाहरी पर्यटकों के प्रवेश पर रोक रहेगी, बल्कि मनोरंजन के सभी साधनों पर भी स्वैच्छिक प्रतिबंध रहेगा। परंपरा के अनुसार- स्थानीय लोग टीवी, रेडियो और मोबाइल फोन तक को बंद कर देते हैं, ताकि देव परंपराओं के निर्वहन के लिए पूर्ण शांति बनी रहे। इन दोनों पंचायतों में प्रतिबंध अवधि के दौरान शोर-शराबा करने की इजाजत नहीं होगी। प्रतिबंध के बावजूद यदि कोई टूरिस्ट गलती से सिस्सू-कोकसर पहुंचता है तो उन्हें आम दिनों की तरह हुड़दंग मचाने, गाड़ी में जोर से हॉर्न बजाने और लाउड म्यूजिक से परहेज करना होगा। पर्यटन गतिविधियों पर क्यों लगाया प्रतिबंध? प्रतिबंध को लेकर स्थानीय लोगों में दो तरह की मान्यताएं हैं। कुछ कहते हैं कि उनके आराध्य देवता ‘राजा घेपन’ स्वर्ग प्रवास पर जाते हैं। कुछ का मानना है कि सर्दियों में ‘राजा घेपन’ तपस्या में लीन रहते हैं। देवता की तपस्या भंग न हो, इसलिए घाटी में शांति जरूरी होती है। इसे देखते हुए टूरिज्म एक्टिविटी पर बैन लगाया गया है। यह प्रतिबंध हर साल लगाया जाता है। आसुरी शक्तियों के नाश को बल राजा की स्थापना मान्यता है कि देवता के तपस्या में लीन रहने से सर्दियों के दौरान घाटी में आसुरी शक्तियां सक्रिय रहती है। इन आसुरी शक्तियों के नाश को घाटी के लोग अगले 40 दिनों के दौरान विशेष पूजा अर्चना करते है। इसके लिए हालडा उत्सव शुरू होने से अगले तीन दिन तक हर घर में बल राजा की स्थापना की जाती है। हालडा उत्सव 27 जनवरी से शुरू हो रहा है। टूरिस्ट के कारण घाटी में अशांति सिस्सू पंचायत के उप-प्रधान संदीप ने बताया कि कई साल पहले तक क्षेत्र में भारी बर्फबारी होती थी। तब टूरिस्ट सर्दियों में क्षेत्र में नहीं पहुंच पाते थे। इसलिए देवता की तपस्या में कोई बाधा नहीं आती थी। मगर बीते कुछ सालों से कम बर्फ गिर रही है और अटल टनल बनने से आवाजाही आसान हुई है। इससे घाटी में शांति नहीं बन पा रही। इसे देखते हुए देवता कमेटी ने हालडा उत्सव के दौरान टूरिज्म एक्टिविटी पर बैन का फैसला लिया है। होटल-ढाबे व होम स्टे तक बंद कर देते हैं ग्रामीण अपने आराध्य देवता की तपस्या में कोई बाधा न आए, इसके लिए स्थानीय लोग अपने होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट और होम स्टे तक बंद कर देते हैं। खासकर कोकसर पंचायत में सभी लोग अपने व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर ताला जड़ देते हैं। वहीं सिस्सू में हाईवे किनारे अब ज्यादातर व्यापारिक प्रतिष्ठान बाहरी लोग चला रहे हैं। इसलिए, वहां कुछ लोग ही बंद रखते हैं। हिमाचल में सिर्फ सिस्सू-कोकसर में ही बर्फ हिमाचल के अधिकांश भागों में इस बार बर्फबारी नहीं हुई। मगर सिस्सू और कोकसर में बीते दिनों बर्फबारी हो चुकी है। इसलिए देशभर से मनाली पहुंच रहे अधिकांश टूरिस्ट सिस्सू और कोकसर जाना नहीं भूलते। ऐसे में टूरिस्ट को प्रतिबंध की अवधि के दौरान अपनी यात्रा टालनी होगी। सिस्सू और कोकसर के लिए मनाली से अटल टनल होते हुए पहुंचा जा सकता है। यहां पहुंचने में मनाली से लगभग सवा एक घंटे का वक्त लगता है। लाहौल-स्पीति के साथ-साथ कुल्लू घाटी में भी देवी-देवताओं के स्वर्ग प्रवास पर जाने की मान्यता है।

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