छपरा शहर में रविवार को UGC के सशक्त इक्विटी रेगुलेशन को लागू करने की मांग को लेकर मशाल जुलूस निकाला गया। इस जुलूस का उद्देश्य विश्वविद्यालयों को भेदभाव मुक्त बनाना था। यह जुलूस नगर पालिका कैंपस से शुरू होकर थाना चौक होते हुए नगर पालिका चौक पहुंचा, जहां यह एक सभा में परिवर्तित हो गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-युवाओं और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने भाग लिया। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में सामाजिक न्याय, समान अवसर और जातिगत भेदभाव से मुक्त माहौल सुनिश्चित करने के लिए यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन को प्रभावी ढंग से लागू करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि यह प्रावधान छात्र-युवाओं के लंबे संघर्षों का परिणाम है, लेकिन इस पर न्यायालय द्वारा लगाए गए स्थगन के कारण देशभर में असंतोष बढ़ गया है। 65 प्रतिशत आरक्षण को भी प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग उठाई वक्ताओं ने मांग की कि इस रेगुलेशन को ‘रोहित एक्ट’ की तर्ज पर लागू किया जाए, ताकि विश्वविद्यालय परिसरों में होने वाले भेदभाव और उत्पीड़न की घटनाओं पर प्रभावी रोक लग सके। इसके साथ ही, बिहार में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और पिछड़ा वर्ग के लिए निर्धारित 65 प्रतिशत आरक्षण को भी प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग उठाई गई। सभा में यह भी बताया गया कि यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन को लागू कराने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में आंदोलन तेज हो रहा है। बिहार के कई जिलों में इस मुद्दे पर जनजागरण के लिए कन्वेंशन, सभाएं और मशाल जुलूस आयोजित किए जा रहे हैं। छपरा में आयोजित यह कार्यक्रम इसी कड़ी का हिस्सा था। इक्विटी प्रावधानों को लेकर हुए आंदोलन का भी जिक्र किया वक्ताओं ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में इक्विटी प्रावधानों को लेकर हुए आंदोलन का भी जिक्र किया, जिसमें 14 छात्र नेताओं को जेल भेजा गया था। ये छात्र नेता अब देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर छात्रों और युवाओं को एकजुट कर रहे हैं, ताकि आंदोलन को और मजबूत बनाया जा सके। बिहार के अलग-अलग जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भागीदारी देखी जा रही है। कार्यक्रम के दौरान 18 मार्च को पटना में आयोजित होने वाले “74 आंदोलन के ऐतिहासिक दिवस” पर समता महाजुटान और मार्च में छपरा जिले से सैकड़ों छात्र-युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया। इसके लिए जिले भर में जनसंपर्क अभियान और संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन छात्रों-युवाओं के लंबे संघर्षों की उपलब्धि वक्ताओं ने कहा कि यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन छात्रों-युवाओं के लंबे संघर्षों की उपलब्धि है और इसे लागू कराने के लिए आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। विश्वविद्यालयों को भेदभाव मुक्त और समान अवसर वाला बनाने के लिए छात्र-युवा, शिक्षक और सामाजिक संगठनों को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा। छपरा शहर में रविवार को UGC के सशक्त इक्विटी रेगुलेशन को लागू करने की मांग को लेकर मशाल जुलूस निकाला गया। इस जुलूस का उद्देश्य विश्वविद्यालयों को भेदभाव मुक्त बनाना था। यह जुलूस नगर पालिका कैंपस से शुरू होकर थाना चौक होते हुए नगर पालिका चौक पहुंचा, जहां यह एक सभा में परिवर्तित हो गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-युवाओं और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने भाग लिया। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में सामाजिक न्याय, समान अवसर और जातिगत भेदभाव से मुक्त माहौल सुनिश्चित करने के लिए यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन को प्रभावी ढंग से लागू करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि यह प्रावधान छात्र-युवाओं के लंबे संघर्षों का परिणाम है, लेकिन इस पर न्यायालय द्वारा लगाए गए स्थगन के कारण देशभर में असंतोष बढ़ गया है। 65 प्रतिशत आरक्षण को भी प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग उठाई वक्ताओं ने मांग की कि इस रेगुलेशन को ‘रोहित एक्ट’ की तर्ज पर लागू किया जाए, ताकि विश्वविद्यालय परिसरों में होने वाले भेदभाव और उत्पीड़न की घटनाओं पर प्रभावी रोक लग सके। इसके साथ ही, बिहार में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और पिछड़ा वर्ग के लिए निर्धारित 65 प्रतिशत आरक्षण को भी प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग उठाई गई। सभा में यह भी बताया गया कि यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन को लागू कराने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में आंदोलन तेज हो रहा है। बिहार के कई जिलों में इस मुद्दे पर जनजागरण के लिए कन्वेंशन, सभाएं और मशाल जुलूस आयोजित किए जा रहे हैं। छपरा में आयोजित यह कार्यक्रम इसी कड़ी का हिस्सा था। इक्विटी प्रावधानों को लेकर हुए आंदोलन का भी जिक्र किया वक्ताओं ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में इक्विटी प्रावधानों को लेकर हुए आंदोलन का भी जिक्र किया, जिसमें 14 छात्र नेताओं को जेल भेजा गया था। ये छात्र नेता अब देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर छात्रों और युवाओं को एकजुट कर रहे हैं, ताकि आंदोलन को और मजबूत बनाया जा सके। बिहार के अलग-अलग जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भागीदारी देखी जा रही है। कार्यक्रम के दौरान 18 मार्च को पटना में आयोजित होने वाले “74 आंदोलन के ऐतिहासिक दिवस” पर समता महाजुटान और मार्च में छपरा जिले से सैकड़ों छात्र-युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया। इसके लिए जिले भर में जनसंपर्क अभियान और संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन छात्रों-युवाओं के लंबे संघर्षों की उपलब्धि वक्ताओं ने कहा कि यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन छात्रों-युवाओं के लंबे संघर्षों की उपलब्धि है और इसे लागू कराने के लिए आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। विश्वविद्यालयों को भेदभाव मुक्त और समान अवसर वाला बनाने के लिए छात्र-युवा, शिक्षक और सामाजिक संगठनों को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।


